ग्वालियर में पराली और नरवाई जलाने पर प्रतिबंध, पकड़े जाने पर लगेगा भारी जुर्माना
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के दिशा-निर्देशों के तहत कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी चौहान द्वारा इस आशय का आदेश जारी किया गया है।
Publish Date: Sat, 24 Oct 2026 05:59:38 PM (IST)Updated Date: Sat, 24 Oct 2026 06:00:02 PM (IST)
HighLights
- जिला दण्डाधिकारी द्वारा प्रतिबंधात्मक आदेश जारी
- किसान भाईयों से अपील- पराली न जलाएं
- जलाने से घटती है खेत की उर्वरा शक्ति
डिजिटल डेस्क, ग्वालियर। पराली व नरवाई (फसल अवशेष) जलाना दण्डनीय अपराध है। जिले में पराली जलाने वालों पर जुर्माना लगाया जायेगा। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के दिशा-निर्देशों के तहत कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी चौहान द्वारा इस आशय का आदेश जारी किया गया है।
आदेश का उद्देश्य जान-माल की रक्षा
उन्होंने यह आदेश फसल के अवशेष जलाने से फैलने वाले प्रदूषण पर अंकुश, अग्नि दुर्घटनाएं रोकने एवं जान-माल की रक्षा के उद्देश्य से जारी किया है। आदेश के पालन के लिये जिला दण्डाधिकारी द्वारा संबंधित अनुविभागीय दण्डाधिकारी की अध्यक्षता में समितियां भी गठित कर दी हैं। साथ ही उप संचालक किसान कल्याण व कृषि विभाग को प्रतिदिन की कार्यवाही की जानकारी संकलित कर कलेक्ट्रेट कार्यालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
आदेश के उल्लंघन पर देना होगा मुआवजा
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि पराली जलाने वालों पर दो एकड़ से कम भूमि धारक को 2500 रूपए प्रति घटना, दो एकड़ से अधिक व पांच एकड़ से कम भूमि धारक को 5 हजार रूपए प्रति घटना एवं पांच एकड़ से अधिक भूमि धारक को 15 हजार रूपए प्रति घटना पर्यावरण मुआवजा देना होगा।
पर्यावरण को पहुंचती है भारी क्षति
जिले के किसानों से अपील की गई है कि वे अपने खेतों में पराली व नरवाई इत्यादि फसल अवशेष न जलाएं, इससे पर्यावरण को भारी क्षति पहुंचती है। साथ ही खेत की मिट्टी के लाभदायक सूक्ष्म जीवाणु मर जाते हैं।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार पराली जलाने से भूमि में अम्लीयता बढती है, जिससे मृदा को अत्यधिक क्षति पहुंचती है । सूक्ष्म जीवाणुओं की सक्रियता घटने लगती है एवं भूमि की जलधारण क्षमता पर भी विपरीत प्रभाव पडता है ।