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ग्वालियर। नईदुनिया प्रतिनिधि
ब्रह्मचर्र्य का पालन गृहस्थ व्यक्ति भी कर सकता है। ब्रह्मचर्य का पालन करने का अर्थ है कि मनुष्य का विवाह के बाद अपनी धर्मपत्नी के अलावा किसी और के प्रति आकर्षण नहीं होना चाहिए। वह पराई स्त्री को अपनी माता या बहन के रूप में ही देखे। यही गृहस्थ जीवन में ब्रह्मचर्य की साधना कहलाती है। यह बात मुनिश्री अविचल सागर महाराज ने नयाबाजार जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कही।
मुनिश्री ने कहा कि एक गृहस्थ भी ब्रह्मचर्य की साधना में निपुण बन सकता है। कामवासना का वेग काम करने के लिए सात्विक और नीरस भोजन करना चाहिए। तामसिक और राजसी भोजन से मन में अहंकार आता है। गृहस्थ का अपने पति-पत्नी के अलावा अन्य के प्रति मोहित नहीं होना ही ब्रह्मचर्य है।
शरीर के बहकावे में न आएं
मुनिश्री ने कहा कि आत्मा में रमने से दूसरों के शरीर के प्रति बहकना बंद हो जाता है। लेकिन हम अपने शरीर के प्रति आकर्षित रहते हैं। गृहस्थ एवं संन्यासी किसी को भी शरीर के बहकावे में नहीं आना चाहिए। जब आप ब्रह्मचर्य की साधना करते हैं, तब आपकी साधना को भंग करने के लिए भी बुरी शक्तियां आती हैं, लेकिन बुरी शक्तियों पर विजय पाकर ही ब्रह्मचर्य की साधना की जा सकती है।
ब्रह्मचर्य का सही अर्थ यह है
मुनिश्री ने बताया कि ब्रह्मचर्य का मतलब शादी नहीं करना और विपरीत शरीर के प्रति आकर्षित नहीं होने की शक्ति अपने भीतर उत्पन्न करने का अर्थ लोगों ने ब्रह्मचर्य से जोड़ दिया है। लेकिन गृहस्थ मनुष्य वैवाहिक जीवन में रहते हुए भी यह साधना कर सकता है। ब्रह्मचर्य का अर्थ है अपने जीवनसाथी के प्रति सदैव ईमानदार रहना, और किसी को भी गलत निगाह से नहीं देखना।
मुनिश्री ने किए केश लोचन
जैन समाज के प्रवक्ता ललित जैन ने बताया कि मुनिश्री अविचल सागर महाराज ने शनिवार को धर्मसभा के पूर्व केश लोचन किए। मुनिश्री ने अपने हाथों से अपने सिर और चेहरे के बाल खींचे। इस मौके पर चुनिंदा श्रावक ही मौजूद थे।