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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 14, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Kaal Bhairav Ashtami 2022: काशी के कोतवाल हैं काल भैरव, इनकी पूजा के बिना अधूरी है भगवान विश्वनाथ की आराधना

Bhairav Ashtami 2022: काल भैरव को काशी का कोतवाल कहा जाता है। साथ ही कहा जाता है कि यदि काल भैरव की पूजा नहीं की तो भगवान विश्वनाथ की आराधना अधूरी है।...और पढ़ें

By anil tomarEdited By: anil tomar
Publish Date: Mon, 14 Nov 2022 09:11:57 AM (IST)Updated Date: Mon, 14 Nov 2022 09:32:47 AM (IST)
Kaal Bhairav Ashtami 2022: काशी के कोतवाल हैं काल भैरव, इनकी पूजा के बिना अधूरी है भगवान विश्वनाथ की आराधना

- काल जयंती 16 नवंबर को मनेगी

Bhairav ​​Ashtami 2022: ग्वालियर. नईदुनिया प्रतिनिधि। काल भैरव को काशी का कोतवाल कहा जाता है। साथ ही कहा जाता है कि यदि काल भैरव की पूजा नहीं की तो भगवान विश्वनाथ की आराधना अधूरी है। ज्योतिषाचार्य सुनील चौपड़ा ने बताया कि वेदों की वाणी सुनकर ब्रह्मा जी के पांचवे मुख ने शिव के निमित्त अपशब्द बोलना शुरू कर दिया। इस दौरान एक दिव्यज्योति प्रकट हुई, यह कोई और नहीं महादेव के ही रौद्र अवतार काल भैरव थे। शिव के इस रूप ने ब्रह्मा जी का पांचवा मुख धड़ से अलग कर दिया। उस दिन मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि थी। काशी में जहां ब्रह्मा जी का सिर गिरा उसे कपाल तीर्थ कहा जाता है। काल भैरव को ब्रह्महत्या का पाप लगा। काल भैरव को काशी में ही इस पाप से मुक्ति मिली। शिव ने उन्हें काशी का कोतवाल नियुक्त किया। तभी से काल भैरव यहां निवास करते हैं। इनकी पूजा के बिना भगवान विश्वनाथ की आराधना अधूरी मानी जाती है।

मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को काल भैरव जयंती मनेगी

ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि बाबा भैरव को शिव जी का अंश माना जाता है, यह भोलेनाथ के पांचवे अवतार हैं। भैरव के दो स्वरूप हैं एक बटुक भैरव, जो शिव के बालरूप माने जाते हैं। यह सौम्य रूप में प्रसिद्ध है। वहीं दूसरे हैं काल भैरव जिन्हें दंडनायक माना गया है। अनिष्ट करने वालों को काल भैरव का प्रकोप झेलना पड़ता लेकिन जिस पर वह प्रसन्न हो जाए उसके कभी नकारात्मक शक्तियों, ऊपरी बाधा और भूत-प्रेत जैसी समस्याएं परेशान नहीं करती। अष्टमी तिथि का प्रारंभ 16 नवंबर पूर्वाह्न 05:49 बजे से अष्टमी तिथि की समाप्ति 17 नवंबर पूर्वाह्न 07:57 बजे होगी।


शहर के इन मंदिरों पर होंगे कार्यक्रम

- सराफा बाजार बच्छराज का बाड़ा स्थित 119 वर्ष से भी अधिक प्राचीन भैरव मंदिर में विशेष पूजन किया जाता है। भैरव अष्टमी पर त्रिमूर्ति भैरव मंदिर में सुबह भैरव महाराज का विधि विधानपूर्वक मंत्रोचार के साथ महाभिषेक किया जाएगा।

- भैलसा वाली माता मंदिर के ऊपर अमरावती पहाड़ पर स्थित 500 वर्ष पुराने प्राचीन काल भैरव मंदिर में भैरव अष्टमी मनाई जाती है। मंदिर में सुबह ब्राह्मणों द्वारा काल भैरव का पूजन कर अभिषेक किया जाता है। तदोपरांत काल भैरव का विशेष ऋंगार कर मूंग दाल के मंगोड़े का भाेग लगाया जाता है। मंदिर के बारे में मान्यता है कि माता के दर्शन के बाद काल भैरव के दर्शन करना आवश्यक होता है तभी भेलसे वाली माता के दर्शन पूर्ण माने जाते हैं।

-श्री मंशापूर्ण हनुमान मंदिर पड़ाव पुल के नीचे स्थित भैरव मंदिर पर सुबह ब्रह्म मुहुर्त में भैरव नाथ का अभिषेक एवं श्रृंगार किया जाता है। और भंडारे का भी आयोजन होता है।