ग्वालियर-चंबल अंचल में BJP में असहमति के सुर, सिंधिया को काले झंडे से लेकर डबरा और दतिया तक गहराया असंतोष
नगर निगम चुनाव से पहले सामने आए इन प्रसंगों ने संगठन में संवाद और समन्वय को लेकर चर्चा जरूर बढ़ा दी है।
Publish Date: Fri, 25 Sep 2026 08:00:56 PM (IST)Updated Date: Fri, 25 Sep 2026 08:01:34 PM (IST)
कुशवाह समाज के सामुदायिक भवन के भूमिपूजन कार्यक्रम में सिंधिया को काले झंडे दिखाए थे। फाइल फोटोHighLights
- सार्वजनिक कार्यक्रमों में दिखी गुटबाजी
- तीन प्रमुख घटनाओं ने बढ़ाई हलचल
- प्रदेश नेतृत्व तक पहुंची रिपोर्ट
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। ग्वालियर-चंबल अंचल में भाजपा के सार्वजनिक कार्यक्रमों में सामने आए कुछ घटनाक्रमों ने संगठन के भीतर चल रहे आंतरिक विरोध को सार्वजनिक रूप से सामने ला दिया है। डबरा में पूर्व मंत्री इमरती देवी का पार्टी कार्यक्रम में मंच साझा नहीं करना और दतिया में नए जिलाध्यक्ष माधवेन्द्र सिंह के स्वागत के दौरान अलग-अलग नेताओं की सक्रियता को स्थानीय संगठनात्मक समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।
दूसरी ओर ग्वालियर में कुशवाह समाज के सामुदायिक भवन के भूमिपूजन कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को काले झंडे दिखाए जाने की घटना सीधे तौर पर विरोध प्रदर्शन का मामला है। तीनों तरह के घटनाक्रमों को अलग-अलग संदर्भ में देखा जा रहा है।
इन घटनाओं की जानकारी प्रदेश नेतृत्व तक जिले से प्रदेश नेतृत्व को भेजी गई है। नगर निगम चुनाव से पहले सामने आए इन प्रसंगों ने संगठन में संवाद और समन्वय को लेकर चर्चा जरूर बढ़ा दी है।
इमरती का मंच पर नहीं जाना
डबरा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में आयोजित सेवा संकल्प कार्यक्रम में इमरती देवी मंच पर नहीं गईं। उन्हें मंच पर बुलाने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कार्यकर्ताओं के बीच रहना पसंद किया। बाद में मीडिया से बातचीत में उन्होंने कार्यक्रम को लेकर अपनी बात रखी। मंच से उनकी दूरी और बैनर में तस्वीर नहीं होने की चर्चा को स्थानीय राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देखा गया।
सिंधिया को काले झंडे दिखाना
कुशवाह समाज के सामुदायिक भवन के भूमिपूजन कार्यक्रम में जो हुआ, वह प्रत्यक्ष विरोध का घटनाक्रम था। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के संबोधन के दौरान कुछ युवाओं ने नारेबाजी करते हुए काले झंडे दिखाए। इससे कुछ समय के लिए कार्यक्रम स्थल पर असहज स्थिति बनी।
यह कार्यक्रम सामाजिक था, लेकिन इसके सूत्रधार उद्यानिकी मंत्री नारायण सिंह कुशवाह थे। सजातीय सांसद भारत सिंह कुशवाह को कार्यक्रम में नहीं बुलाया जाना विरोध का कारण बना।
आंचलिक राजनीतिक समीकरणों में सांसद भारत सिंह कुशवाह विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और उद्यानिकी मंत्री केंद्रीय मंत्री के खेमे के माने जाते हैं। दोनों ही ध्रुवों के बीच अंचल में राजनीतिक वर्चस्व के लिए शीतयुद्ध चल रहा है।
दतिया में नहीं थम रहा है असंतोष
दतिया में भी नए जिलाध्यक्ष के स्वागत को लेकर स्थानीय स्तर पर अलग-अलग राजनीतिक सक्रियता दिखाई दी। प्रदेश नेतृत्व की ओर से नए जिलाध्यक्ष माधवेन्द्र सिंह और वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा के साथ दतिया पहुंचने की चर्चा थी, लेकिन दोनों अलग-अलग पहुंचे। नए जिलाध्यक्ष के झांसी से आशुतोष के काफिले के साथ दतिया पहुंचने की बात सामने आई। स्वागत के दौरान अलग-अलग नेताओं और समर्थकों की मौजूदगी को स्थानीय समीकरणों के संदर्भ में देखा गया। हालांकि इसे भी किसी औपचारिक गुटीय विवाद का रूप नहीं दिया गया है।
तीनों घटनाक्रम प्रदेश नेतृत्व के संज्ञान में
अंचल के तीनों मामले प्रदेश नेतृत्व के संज्ञान में हैं। जिलों से भी इस संबंध में विस्तृत जानकारी पहुंच चुकी है और नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती नगर निगम चुनावों से वरिष्ठ नेताओं के बीच चल रहे मतभेदों को दूर कर एक मंच लाने की है। दोनों ध्रुवों के बीच वर्चस्व का संघर्ष के साथ दतिया में भी गंभीर रूप धारण कर रहा है।