प्रतिबंध सिर्फ कागजों पर! ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर 500 से 900 रुपये में बिक रहीं कार्बाइड और पोटाश गन, जरा सी चूक से जा सकती है आंखों की रोशनी
दीवाली पर पोटाश गन की धड़ल्ले से बिक्री हो रही है। जबकि यह कार्बाइड गन से और ज्यादा खतरनाक मानी जाती है। पोटाश और गंधक का मिश्रण घर्षण के प्रति बेहद संवेदनशील होता है।
Publish Date: Mon, 26 Oct 2026 09:36:50 AM (IST)Updated Date: Mon, 26 Oct 2026 09:37:17 AM (IST)
प्रतीकात्मक चित्र।HighLights
- ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खुलेआम बिक रही गन
- पिछले साल ग्वालियर में 36 लोगों की गई थी रोशनी
- प्रशासन की सख्ती के बाद भी जारी है अवैध बिक्री
अमित मिश्रा, नईदुनिया, ग्वालियर। दीपावली पर बच्चों और लोगों की आंखों की रोशनी छीनने वाली कार्बाइड गन को लेकर ग्वालियर में शासन से लेकर जिला प्रशासन तक सख्ती के निर्देश दिए गए। प्रतिबंध के बाद ग्वालियर में पुलिस और प्रशासन की टीम ने ताबड़तोड़ कार्रवाई की हैं। लगातार अलग-अलग ठिकानों पर दबिश देकर कारखाना से लेकर बेचने वाले तक पकड़े गए, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती कार्बाइड गन की ऑनलाइन बिक्री है।
नईदुनिया टीम ने पड़ताल की-कार्बाइड गन ऑनलाइन धड़ल्ले से बिक रही हैं। विभिन्न ई-कामर्स कंपनियों की वेबसाइट से लेकर फेसबुक, इंस्टाग्राम और इंटरनेट मीडिया के अलग-अलग प्लेटफार्म पर महज 500 से 900 रुपये में बिक रही है।
सीएम ने प्रभावी रोक लगाने के दिए हैं निर्देश
यहां बता दें कि 21 अक्टूबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए प्रदेश के कलेक्टरों, कमिश्नरों और पुलिस अधिकारियों को कार्बाइड गन व कार्बाइड लैंप के इस्तेमाल पर प्रभावी रोक लगाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान ने भी धारा 163 के तहत कार्बाइड-पोटाश गन को लेकर आदेश जारी किए। इसमें इनके उपयोग, भंडारण, निर्माण और बेचने पर रोक लगाई है।
इसके गंभीर खतरे
- आंखों की रोशनी जा सकती है: विस्फोट से आंख का पर्दा, कार्निया या नेत्रगोलक क्षतिग्रस्त हो
- सकता है।
- चेहरा और हाथ झुलस सकते हैं: गर्म गैस, आग और पाइप के टुकड़ों से गंभीर चोट लग सकती है।
- बच्चों के लिए विशेष खतरा: इसे खिलौना समझकर चेहरे के पास चलाने से स्थायी दिव्यांगता तक हो सकती है।
पोटाश गन कार्बाइड गन से ज्यादा खतरनाक-इसकी भी धड़ल्ले से बिक्री
दीवाली पर पोटाश गन की धड़ल्ले से बिक्री हो रही है। जबकि यह कार्बाइड गन से और ज्यादा खतरनाक मानी जाती है। पोटाश और गंधक का मिश्रण घर्षण के प्रति बेहद संवेदनशील होता है। इससे ब्लास्ट हो जाता है। वहीं कार्बाइड गन आंख फोड़वा गन कही जाने लगी है। इसमें एसिटिलीन गैस ब्लास्ट होता है, जो घटिया प्लास्टिक क्वालिटी के कारण आंख को चोट पहुंचा देता है। आंख की रोशनी चली जाती है।
सर्जिकल और पेस्ट कंट्रोल कैटेगरी में किया है लिस्टेड
- नईदुनिया ने अलग-अलग ई-कामर्स कंपनियों की वेबसाइट की पड़ताल की। फ्लिपकार्ट के एप पर 594 रुपये में क्रैकर पोटाश गन बेची जा रही है। सर्जिकल ग्रेड में यह लिस्टेड है। तीन नवंबर तक डिलीवरी का दावा किया जा रहा है। इसी प्लेटफार्म पर 914 रुपये में दूसरी गन बेची जा रही है।
दीवाली गन: मीशो कंपनी के एप पर यह 439 रुपये में बेची जा रही है। नाम ही पोटाश दीपावली गन है।
पीवीसी मंकी रेप्लर गन: अमेजन पर यह पीवीसी मंकी रेप्लर गन नाम से बेची जा रही है। इसकी कीमत करीब 1500 रुपये है। इसे सामान्य बोलचाल में कार्बाइड गन ही बोला जाता है। बंदर व अन्य जानवरों को भगाने के लिए इसका उपयोग किया जाता है, इसलिए मंकी रेप्लर गन कहा जाता है।
फेसबुक मार्केट प्लेस पर कई वेंडर इसे बेच रहे हैं। 200 से लेकर 500 रुपये में बेची जा रही है। टोपडा गन नाम से कार्बाइड गन 200 रुपये में बेची जा रही है। तीन दिन में 42 किलो कैल्शियम कार्बाइड पकड़ा-आनलाइन बिक्र
कैल्शियम कार्बाइड, गंधक और पोटाश की भी आनलाइन बिक्री हो रही है। जबकि कैल्शियम कार्बाइड पिछले तीन दिन में अलग-अलग जगह से करीब 42 किलो पकड़ा गया।
शहर में अब तक यह कार्रवाई
सिरोल स्थित मां पीतांबरा स्टील ट्रेडर्स के कारखाने से 58 कार्बाइड गन और पांच पैकेट पोटाश, जबकि मुरार के घासमंडी क्षेत्र की दो दुकानों से आठ गन जब्त की गईं। इस तरह कुल 66 गन बरामद हुईं। विभिन्न ई-कामर्स कंपनियों के स्थानीय प्रतिनिधि व डिलीवरी सहयोगी की बैठक पुलिस कंट्रोल रूम में ली गई। तमाम निर्देश दिए गए, लेकिन यह सिर्फ बैठक तक ही सीमित रह गए। इनकी बिक्री पर रोक नहीं लग सकी है। ऐसे में प्रशासन के सामने चुनौती केवल गन जब्त करने की नहीं, बल्कि निर्माण से लेकर बिक्री और इस्तेमाल तक पूरे नेटवर्क को रोकने की है।
अकेले ग्वालियर में 36 लोगों की आंख की रोशनी गई थी
पिछले साल कार्बाइड, पोटाश गन के कारण दीपावली पर अकेले ग्वालियर में ही 36 लोगों की आंख की रोशनी चली गई थी। कई गंभीर रूप से घायल हो गए थे। प्रदेश में यह आंकड़ा 300 से ज्यादा था।
बेल्डिंग की दुकान पर निर्माण
शहर में बेल्डिंग की दुकानों पर इनका निर्माण सबसे ज्यादा हो रहा है। पीवीसी, लोहे के पाइप से कार्बाइड-पोटाश गन तैयार की जा रही है। इन पर निगरानी जरूरी है। पिछले साल अलग-अलग जगह लोहपीटाओं के डेरों पर भी कार्बाइड गन बनी थी, इन पर निगरानी कमजोर है।
काबाईड गन पूर्णत: प्रतिबंधित की गई है, इंटरनेट पर यह बिक्री के लिए उपलब्ध है तो इसकी जांच कराकर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। -सीबी प्रसाद, अपर जिला मजिस्ट्रेट, ग्वालियर।