
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। अमेरिकी नागरिकों को ठगने वाले चारों आरोपित कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिए गए हैं। अब पुलिस को इनके सरगना की तलाश है। जिसके पकड़े जाने के बाद ही इस ठगी के नेटवर्क की और कहानी सामने आ सकेगी। फिलहाल चारों आरोपितों से पूछताछ में यह भी सामने आया है कि इनके पास जो डाटा आता था, वह अमेरिका की किसी सोलर कंपनी का था।
यहीं से अमेरिकी नागरिकों के नाम, नंबर व अन्य जानकारी मिल जाती थी। यह डाटा डार्कवेब से खरीदा जाता था, फिर सरगना इन्हें अमेरिकी नागरिकों के नाम, नंबर व अन्य जानकारी उपलब्ध करवाता था। यह चारों रातभर अमेरिकी नागरिकों को कॉल करते थे।
ग्वालियर-शिवपुरी हाईवे पर मोहना स्थित होटल जैनपथ के कमरा नंबर-6 में ठगी का इंटरनेशनल कॉल सेंटर चल रहा था। जहां से पुलिस ने गुजरात के अहमदाबाद के राजपूत अभिषेक, शिवेंद्र नरेंद्र सिंह परिहार, नागालैंड के शुभोम घोष और झांसी के आर्यन को पकड़ा था। यह चारों पांच माह से यहां रुके थे और एक कमरे से ही लैपटॉप व अन्य डिवाइस के जरिये गूगल वॉयस कॉल करते थे। खुद को लैंडिंग क्लब का मेंबर बताकर लोन दिलाने का झांसा देते थे और ठगी करते थे।
इनका सरगना प्रबल परिहार है, जो गुजरात के अहमदाबाद में रहता है। उसी ने यहां होटल में कमरा दिलाया था। लैपटॉप, मोबाइल, हेडफोन सबकुछ उसी ने उपलब्ध करवाए थे। इन चारों से पूछताछ में सामने आया कि पहले तो कहा था कि सिर्फ लोगों से अंग्रेजी में बात करनी है।
बाद में जब यहां आए और अमेरिकी लोगों के नाम, नंबर साझा किए। इन्हें लोन का झांसा देने की स्क्रिप्ट पढ़ी तो प्रबल से बात की। इस पर वह बोला कि हर माह तनख्वाह के साथ रहने-खाने का भी पैसा उसी के द्वारा दिया जाएगा। नौकरी नहीं थी, इसलिए लालच में आ गए। इन लोगों ने पुलिस को बताया कि प्रबल को जो डाटा उपलब्ध कराया जाता था, वह डार्कवेब से खरीदता था। सोलर कंपनी का डाटा होता था।
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एएसपी जयराज कुबेर ने बताया कि विदेश मंत्रालय के जरिये अमेरिका की जांच एजेंसी एफबीआइ को सूचना दी जाएगी, क्योंकि वहीं के नागरिक ठगे गए हैं।
अभी इस मामले में पुलिस फरियादी है। अमेरिका के नागरिकों के बयान पुलिस एफबीआइ की मदद से दर्ज करेगी। जो लोग ठगे गए हैं, उनका डाटा भी है।
चारों आरोपितों को गिरफ्तार कर लेज भेज दिया गया है। एफबीआइ को सूचना दिलाई जाएगी। अमेरिका के उन नागरिकों के बयान होंगे, जो ठगे गए हैं।- जयराज कुबेर, एएसपी