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ग्वालियर में जीवंत हुई सिंधिया राजसी परंपरा: ज्योतिरादित्य और महानआर्यमन ने किया शमी पूजन, सोने की पत्तियां लूटने उमड़े लोग

सोने के प्रतीक के रूप में शमी की पत्तियां लेने के लिए लोग पौधे की ओर दौड़े। दो से तीन मिनट में पौधे पर एक भी पत्ती नहीं बची। रस्म पूरी होने के बाद लोग...और पढ़ें

By Jogendra SenEdited By: Rajdil Shivhare
Publish Date: Tue, 20 Oct 2026 07:27:09 PM (IST)Updated Date: Tue, 20 Oct 2026 07:32:47 PM (IST)
ग्वालियर में जीवंत हुई सिंधिया राजसी परंपरा: ज्योतिरादित्य और महानआर्यमन ने किया शमी पूजन, सोने की पत्तियां लूटने उमड़े लोग
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने तलवार से शमी के पौधे को स्पर्श किया तो वहां मौजूद लोगों में पत्तियां लेने की होड़ लग गई। राकेश वर्मा

HighLights

  1. तलवार से स्पर्श कर किया शमी पूजन
  2. सोने के प्रतीक रूप में पत्तियां लूटने की होड़
  3. हेरिटेज कार से पहुंचे थे सिंधिया परिवार

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। विजयादशमी पर मंगलवार को ग्वालियर में सिंधिया राजपरिवार की करीब तीन सदी पुरानी परंपरा राजसी अंदाज में निभाई गई। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पुत्र महानआर्यमन सिंधिया के साथ कुलदेवी मांढरे की माता मंदिर के नीचे स्थित दशहरा मैदान में पवित्र शमी पौधे का पूजन किया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा की रस्में पूरी हुईं।

इसके बाद सिंधिया ने तलवार से शमी के पौधे को स्पर्श किया तो वहां मौजूद लोगों में पत्तियां लेने की होड़ लग गई। सोने के प्रतीक के रूप में शमी की पत्तियां लेने के लिए लोग पौधे की ओर दौड़े। दो से तीन मिनट में पौधे पर एक भी पत्ती नहीं बची। रस्म पूरी होने के बाद लोगों ने पत्तियां एक-दूसरे को बांटी और विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं।


पूजन के दौरान राजसी वेशभूषा में थे सिंधिया-महानआर्यमन

पूजन के दौरान ज्योतिरादित्य सिंधिया और महानआर्यमन राजसी वेशभूषा में थे। सिंधिया रियासत से जुड़े सरदार परिवारों के मुखिया भी पारंपरिक मराठी पोशाक और पगड़ी पहनकर पहुंचे। शमी पूजन से पहले सिंधिया पुत्र के साथ राजसी पोशाक में देवघर पहुंचे और पूजा-अर्चना की। इसके बाद अम्मा महाराज की छत्री और कुलदेवी मांढरे की माता मंदिर में परंपरा के अनुसार पूजा कर आशीर्वाद लिया।

naidunia_imageकुलदेवी मांढरे की माता मंदिर में पूजा करते सिंधिया। नईदुनिया

देवघर से मांढरे की माता मंदिर पहुंचे सिंधिया

शमी पूजन से पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया गोरखी स्थित सिंधिया देवघर गए। वहां पूजा-अर्चना के बाद वे अम्मा महाराज की छत्री पहुंचे और भगवान चक्रधर सहित अन्य मंदिरों में दर्शन किए। उन्होंने अपनी दादी राजमाता विजयाराजे सिंधिया, पिता और पूर्व केंद्रीय मंत्री माधवराव सिंधिया व माता माधवी राजे सिंधिया को श्रद्धासुमन अर्पित किए। इसके बाद कुलदेवी मांढरे की माता मंदिर में पूजा कर दशहरा मैदान में शमी पूजन की परंपरा निभाई।

महल में राजपरिवार के प्रतीक चिह्नों का पूजन

विजयादशमी पर सिंधिया ने गोरखी स्थित देवघर में पूजा के साथ जयविलास पैलेस में राजपरिवार के प्रतीक चिह्नों का भी पूजन किया। शमी पूजन के बाद उन्होंने शहरवासियों को पर्व की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह त्योहार अच्छाई और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

कांग्रेसी भी पहुंचे शमी पूजन में

इस अवसर पर प्रदेश के उद्यानिकी मंत्री नारायण सिंह कुशवाह, अपेक्स बैंक अध्यक्ष महेंद्र सिंह यादव, भाजपा महानगर अध्यक्ष जय प्रकाश राजौरिया, पूर्व विधायक रमेश अग्रवाल सहित भाजपा कार्यकर्ता मौजूद थे। शमी पूजन में कांग्रेसी भी पहुंचे। शाम को सिंधिया राजघराने की परंपरा के अनुसार महल में शाही दरबार सजा। सिंधिया ने सरदार परिवारों और नगर के प्रबुद्धजनों से भेंट की। उन्होंने शमी की पत्तियां देकर लोगों को विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं।

इस आयोजन में परंपरा, आस्था और राजपरिवार की विरासत की झलक दिखी। पूजन कार्यक्रम में शामिल होने के लिए सिंधिया हेरिटेज कार से पहुंचे। कार पर सिंधिया स्टेट नंबर तीन अंकित था, जो रियासत काल की स्मृति को ताजा कर रहा था। उस दौर में राजपरिवार का मुखिया हाथी पर लगे चांदी के ओहदे पर बैठकर पूजन के लिए जाता था।