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मुरार अस्पताल में टाइप-वन डायबिटीज से जूझ रहे बच्चों को मुफ्त इंसुलिन, स्पेशल ग्रुप से रखी जा रही नजर

मधुमेह क्लीनिक की खास बात यह है कि मरीजों को केवल अस्पताल में उपचार देकर नहीं छोड़ा जा रहा, बल्कि नियमित फालोअप के जरिए उनकी स्थिति की जानकारी भी ली ज...और पढ़ें

By Anoop BhargavEdited By: Rajdil Shivhare
Publish Date: Fri, 16 Oct 2026 09:25:09 PM (IST)Updated Date: Fri, 16 Oct 2026 09:25:35 PM (IST)
मुरार अस्पताल में टाइप-वन डायबिटीज से जूझ रहे बच्चों को मुफ्त इंसुलिन, स्पेशल ग्रुप से रखी जा रही नजर
बच्चे  को  किट  देते  चिकित्सक और बच्चे  की  ऊंचाई  मापता  स्वास्थ्य कर्मी  । नईदुनिया

HighLights

  1. मधुमेह क्लीनिक में 12 मरीज पंजीकृत
  2. ग्लूकोमीटर से इंसुलिन तक निश्शुल्क सुविधा
  3. फालोअप ग्रुप से नियमित फीडबैक व्यवस्था

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। टाइप-वन डायबिटीज से पीड़ित बच्चों के लिए नियमित उपचार के साथ ब्लड शुगर की निगरानी और समय पर इंसुलिन लेना बेहद जरूरी है। इसे ध्यान में रखते हुए जिला अस्पताल मुरार में हर शुक्रवार संचालित होने वाली मधुमेह क्लीनिक में बच्चों को उपचार के साथ बीमारी को नियंत्रित रखने के लिए जरूरी संसाधन निश्शुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं। क्लीनिक में अब तक टाइप-वन डायबिटीज के 12 मरीज पंजीकृत हुए हैं। इनमें 10 से 15 वर्ष की उम्र के सात बच्चे और 20 से 30 वर्ष के पांच मरीज शामिल हैं।

क्लीनिक की कई बाते हैं खास

क्लीनिक की खास बात यह है कि मरीजों को केवल अस्पताल में उपचार देकर नहीं छोड़ा जा रहा, बल्कि नियमित फालोअप के जरिए उनकी स्थिति की जानकारी भी ली जा रही है। बच्चों को फोन कर दोबारा बुलाया जाता है, इसके अलावा एक फालोअप ग्रुप बनाया गया है, जिसके माध्यम से समय-समय पर उनका फीडबैक लिया जाता है। इससे उपचार की निरंतरता बनाए रखने और मरीजों को जरूरी मार्गदर्शन देने में मदद मिलती है।


ग्लूकोमीटर से इंसुलिन तक निश्शुल्क सुविधा

टाइप-वन डायबिटीज में शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता। ऐसे में मरीज को नियमित इंसुलिन की आवश्यकता होती है। साथ ही ब्लड शुगर की निगरानी भी जरूरी होती है। मुरार जिला अस्पताल की क्लीनिक में पंजीकृत मरीजों को ग्लूकोमीटर, ब्लड शुगर मानिटरिंग चार्ट, इंसुलिन इंजेक्शन और सिरिंज निश्शुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इन सुविधाओं से परिवारों को बीमारी के नियमित प्रबंधन में सहायता मिलती है।

नियमित देखभाल से नियंत्रित रह सकती है बीमारी

टाइप-वन डायबिटीज लंबे समय तक देखभाल की मांग करती है। इंसुलिन का नियमित उपयोग, ब्लड शुगर की निगरानी, संतुलित आहार और चिकित्सकीय सलाह का पालन इसके प्रबंधन के जरूरी हिस्से हैं। बच्चों के मामले में अभिभावकों को भी बीमारी की समझ होना आवश्यक है, ताकि वे जरूरत के समय सही कदम उठा सकें। मुरार जिला अस्पताल के आरएमओ डॉक्टर जेपीएन शर्मा का कहना है कि मधुमेह क्लीनिक में निश्शुल्क संसाधन उपलब्ध कराने और फालोअप की व्यवस्था से मरीजों को नियमित देखभाल से जोड़े रखने का प्रयास किया जा रहा है।