पराली जलाने पर कलेक्टर सख्त: कृषि विभाग को अब हर रोज देनी होगी कार्रवाई की रिपोर्ट, भितरवार में हार्वेस्टर पर लगा जुर्माना
कृषि विभाग को निर्देश दिए हैं कि गांवों में लगातार निगरानी की जाए और पराली जलाने से रोका जाए। साथ ही पराली जलाने वाले किसानों पर कार्रवाइयां की जाए। इन सभी कार्रवाइयों की रोजाना रिपोर्ट उन्हें दी जाए।
Publish Date: Mon, 26 Oct 2026 12:01:27 PM (IST)Updated Date: Mon, 26 Oct 2026 12:01:54 PM (IST)
प्रतीकात्मक चित्र।HighLights
- कलेक्टर को रोजाना सौंपनी होगी रिपोर्ट
- बिना एसएमएस सिस्टम चल रहे हार्वेस्टर पर कार्रवाई
- पिछले साल दर्ज हुई थीं कई एफआईआर
नईदुनिया प्रतिनिधि,ग्वालियर। ग्वालियर व श्योपुर जिले पिछले दो साल में पराली जलाने के मामले में काफी बदनाम रहे हैं। पराली जलाने के मामले में देश भर में टाप टेन जिलों में अव्वल रहे हैं। हालांकि इस बार 15 सितंबर से लेकर 24 अक्टूबर तक जिले में पराली जलाने मामले में नौ घटनाएं हुई हैं। चूंकि इस बार धान की रोपाई देरी से हुई हैं इसलिए इस बार कटाई भी देरी से हो रही है। इसलिए अभी घटनाएं कम हैं। इसलिए कलेक्टर ने न केवल पराली जलाने से किसानों को रोकने के लिए शनिवार को अनुभाग स्तर पर एसडीएम के नेतृत्व में समितियां बनाई हैं।
साथ ही कृषि विभाग को निर्देश दिए हैं कि गांवों में लगातार निगरानी की जाए और पराली जलाने से रोका जाए। साथ ही पराली जलाने वाले किसानों पर कार्रवाइयां की जाए। इन सभी कार्रवाइयों की रोजाना रिपोर्ट उन्हें दी जाए। इसके साथ ही शनिवार को भितरवार में बिना स्ट्रा मैनेजमेंट धान काट रहे हार्वेस्टर मालिक पर प्रशासन ने जुर्माना लगाने की कार्रवाइयां की है।
आज से देनी होगी प्रतिनिधि रिपोर्ट
कृषि विभाग को सोमवार से रोजाना रिपोर्ट प्रशासन को देनी होगा। रिपोर्ट लिए उप संचालक कृषि को जिम्मेदार बनाया गया है। उप संचालक जिले विभिन्न क्षेत्रों में फील्ड में निगरानी करने वाले कर्मचारियों से रिपोर्ट लेंगे। कर्मचारियों को रोजाना बताना होगा कि उन्होंने कितने किसानों को पराली जलाने से रोका, समझाया और जलाने वाले कितने किसानों पर कार्रवाइयां की। सभी जगह की एक एकजाई रिपोर्ट कलेक्टर को दी जाएगी।
पराली जलाने वाले किसानों की पहचान और कार्रवाइयां भी नहीं
15 सितंबर से लेकर 24 अक्टूबर तक जिले में पराली जलाने की नौ घटनाएं हुई हैं। लेकिन अभी तक विभाग व उसके कर्मचारी पराली जलाने वाले किसानों की न तो पहचान कर पाए हैं और न ही अभी तक किसानों पर कार्रवाइयां ही हुई हैं।
सीजन की पहली कार्रवाई भितरवार में
पराली जलाने से रोकने लिए इस सीजन में पहली कार्रवाई भितरवार में एक हार्वेस्टर संचालक पर की गई है। भितरवार गांव खेड़ा टांका में हरदयाल सिंह अपने हार्वेस्टर में बिना स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम लगाए ही धान की कटाई कर रहे थे। मौके पर उन पर कार्रवाई की गई और उन पर 2500 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। हालांकि पराली जलाने को लेकर प्रशासन प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करने के आदेश हैं। पराली जलाने व बिना एसएमएस हार्वेस्टर से कटाई करने वाले संचालक पर धारा 163 के तहत कार्रवाई होनी है। हालांकि पिछले साल जिले में पराली जलाने वाले करीब सौ किसानों पर 100000 लाख रुपये का जुर्माना हुआ था और 12 किसानों पर एफआइआर भी दर्ज की गई थी।
क्या होता है एसएमएस सिस्टम
प्रशासन निर्देश मुताबिक कोई भी हार्वेस्टर बिना एसएमएस यानि स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम धान की कटाई नहीं कर सकता। एसएमएस सिस्टम धान को काटने दौरान ही पराली को भूसे में बदलकर खेत में बिखेर देता है। चूंकि एसएमएस सिस्टम महंगा आता है। इसलिए हार्वेस्टर संचालक इसे नहीं लगवाते हैं। लेकिन कृषि विभाग ने इस बार एसएमएस सिस्टम को लगाने पर अनुदान देने की घोषणा की है।
शनिवार को निर्देश मिलने बाद जिले के सभी मैदानी कर्मचारियों को अपने अपने क्षेत्रों में पराली जलाने से रोकने के लिए किसानों को समझाने, उन्हें रोकने व जलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही रोजाना शाम को कार्रवाइयों की जानकारी जिला स्तर पर देने को कहा गया है। जिससे कलेक्टर को रोजाना पराली जलाने से रोकने के लिए की गई कार्रवाइयों की रिपोर्ट भेजी जा सके। - भानु प्रकाश शर्मा, उप संचालक कृषि