ग्वालियर के पूर्व सीएमएचओ पर विभागीय जांच, स्वीकृत 227 पदों पर 387 कर्मचारी नियुक्त करने का आरोप
आरोप है कि स्वीकृत पदों से अधिक कर्मचारियों को काम पर रखकर शासन पर एक करोड़ 5 लाख 36 हजार 415 रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार डाला गया।
Publish Date: Sun, 01 Nov 2026 11:03:17 AM (IST)Updated Date: Sun, 01 Nov 2026 11:14:37 AM (IST)
HighLights
- शासन पर बढ़ा वित्तीय भार
- नियमों के उल्लंघन का आरोप
- 15 दिन के भीतर मांगा जवाब
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति और कार्यादेश जारी करने में स्वीकृत पदों की सीमा का पालन नहीं करने के मामले में पूर्व मुख्य चिकित्सा व स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.सचिन श्रीवास्तव के खिलाफ शासन स्तर पर विभागीय जांच शुरू की गई है। संचालनालय लोक स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा, भोपाल ने 29 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में आदेश जारी किया। आरोप है कि स्वीकृत पदों से अधिक कर्मचारियों को काम पर रखकर शासन पर एक करोड़ 5 लाख 36 हजार 415 रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार डाला गया।
231 अन्य सपोर्ट स्टाफ के कार्यादेश भी दिए
आरोप-पत्र के मुताबिक, जिले में आउटसोर्स के माध्यम से काम करने वाले मल्टी टास्क वर्कर के 227 पद स्वीकृत थे, जबकि 387 कर्मचारी कार्यरत पाए गए। यानी स्वीकृत संख्या से 160 अधिक कर्मचारी नियोजित किए गए। ग्वालियर सनशाइन लेबर सिक्योरिटी प्राईवेट लिमिटेड को 176 और शर्मा सर्विस सिक्योरिटी एजेंसी ग्वालियर को 124 कर्मचारियों के कार्यादेश जारी किए गए। इसके अलावा 231 अन्य सपोर्ट स्टाफ के कार्यादेश भी दिए गए। स्वीकृत संख्या से अधिक कर्मचारियों की नियुक्ति और भुगतान से शासन पर अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ा।
सिविल सेवा आचरण नियमों के उल्लंघन का आरोप
संचालनालय ने मामले को पदीय दायित्वों के निर्वहन में वित्तीय अनुशासन का अभाव माना है। आरोप-पत्र में इसे मध्य प्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम तीन के उपनियम (1) का उल्लंघन बताते हुए दंडात्मक कदाचार की श्रेणी में रखा गया है।
डॉ. श्रीवास्तव के खिलाफ मध्य प्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 14 के तहत जांच शुरू की गई है। उन्हें आरोपों पर पत्र मिलने के 15 दिन के भीतर लिखित जवाब देने को कहा गया है। समय पर जवाब नहीं मिलने पर नियमानुसार एकपक्षीय कार्रवाई होगी।