Digital version of constitution: ग्वालियर.नईदुनिया प्रतिनिधि। महाराज बाड़ा स्थित केंद्रीय पुस्तकालय में रखी भारत के संविधान की मूल प्रति को अब डिजिटली पढ़ा जा सकता है। इसे स्मार्ट सिटी ने डिजिटलाइज किया है और पुस्तकालय में लगी बड़ी टच स्क्रीन के माध्यम से एक-एक पेज को पलटकर पढ़ा जा सकता है। अब ये डिजिटल वर्जन लोगों को खासा पसंद आ रहा है। बुधवार को गणतंत्र दिवस से एक दिन पहले 462 लोगों ने इस मूल प्रति को पढ़ा।

इस साल देश अपना 74 वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है। 26 जनवरी 1950 को ही भारतीय संविधान को लागू किया गया था। 29 अगस्त 1947 को संविधान की ड्राफ्टिंग कमेटी का गठन हुआ। 26 नवंबर 1949 को पूर्ण रूप से संविधान तैयार हुआ और 26 जनवरी 1950 को इसे देश में लागू किया गया। संविधान की इस मूल प्रति को 31 मार्च 1956 को ग्वालियर लाया गया था। इसके आवरण पृष्ठ पर स्वर्ण अक्षर अंकित हैं। प्रति में कुल 231 पेज हैं। इतना ही नहीं, संविधान सभा के 285 सदस्यों के मूल हस्ताक्षर भी इस प्रति में मौजूद हैं। केंद्रीय पुस्तकालय में रखी संविधान की मूल प्रति को साल में सिर्फ तीन बार देखने को मिलती है, जिसमें 25 जनवरी, 14 अगस्त और 26 नवंबर यानी संविधान दिवस के दिन ही मूल प्रति को आम जनता के लिए एक शो केस में रखा जाता है। लाइब्रेरी में इसके डिजिटल संस्करण को दिखाने के लिए एक अलग से गैलरी बनाई गई है। केंद्रीय पुस्तकालय में रखी संविधान की मूल प्रति कई मायने में खास है। इसके कवर पेज पर स्वर्ण अक्षर से भारतीय संविधान अंकित है। प्रति के कुल 231 पेज हैं जिनमें संविधान के अनुच्छेद 344 से लेकर 351 तक का उल्लेख है। संविधान सभा के 286 सदस्यों के मूल हस्ताक्षर भी इस प्रति में मौजूद हैं। इनमें बाबा साहब भीमराव अंबेडकर से लेकर डाक्टर राजेंद्र प्रसाद, जवाहरलाल नेहरू और फिरोज गांधी तक के हस्ताक्षर शामिल हैं।

Posted By: anil tomar

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close