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कृषि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में बोले राज्यपाल मंगुभाई पटेल- 'डिग्री के साथ संस्कार मिले, तभी सार्थक है शिक्षा'

राजमाता विजायराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के 12 वें दीक्षांत समारोह में 666 विद्यार्थियों को उपाधि मिली। चार छात्रों को स्वर्ण पदक दिए गए। साथ ही त...और पढ़ें

By Anil TomarEdited By: Rajdil Shivhare
Publish Date: Thu, 15 Oct 2026 09:17:01 PM (IST)Updated Date: Thu, 15 Oct 2026 09:17:33 PM (IST)
कृषि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में बोले राज्यपाल मंगुभाई पटेल- 'डिग्री के साथ संस्कार मिले, तभी सार्थक है शिक्षा'
छात्र-छात्राएं शपथ ग्रहण करते हुए और समारोह संबोधित करते राज्यपाल मंगुभाई पटेल। नईदुनिया

HighLights

  1. 666 विद्यार्थियों को उपाधि और 4 को स्वर्ण पदक।
  2. शिक्षा में संस्कार, स्वास्थ्य और पारंपरिक भोजन जरूरी।
  3. लंबा भाषण, मंच संचालन में चूक और रंगोली सजावट।

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। शिक्षा तभी सार्थक होती है जब डिग्री संग छात्र संस्कारी हो। साथ ही उसकी शिक्षा का उपयोग उसके लिए तो हो ही, साथ ही समाज को भी लाभ मिले और समाज में बदलाव आए। यह बात प्रदेश के राज्यपाल व कुलाधिपति मंगुभाई पटेल ने राजमाता विजायराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के 12 वें दीक्षांत समारोह में छात्रों व मौजूद गणमान्य लोगों को संबोधित करते हुए कही।

दीक्षांत समारोह में 666 विद्यार्थियों को मिली उपाधि

राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि संस्कार, नैतिकता, संवेदनशीलता और समाज के प्रति समर्पण का भाव विकसित करना है। शोध और नवाचार की सार्थकता भी तभी है, जब उसका लाभ प्रयोगशालाओं और पुस्तकों से निकलकर खेतों तक पहुंचे और किसान से लेकर समाज के प्रत्येक व्यक्ति का जीवन बेहतर बनाए। समारोह को समारोह के विशिष्ट अतिथि भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय संगठन मंत्री दिनेश कुलकर्णी ने भी संबोधित किया। दीक्षांत समारोह में 666 विद्यार्थियों को उपाधि मिली। चार छात्रों को स्वर्ण पदक दिए गए। साथ ही तीन छात्रों को सरताज बहादुर सिन्हा स्मृति पुरस्कार दिए गए।


माता-पिता, गुरुजनों, समाज और देश का नाम रोशन करें

राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा संग संस्कार और नैतिकता न हों, तो डिग्री का महत्व अधूरा रह जाता है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वह अपने माता-पिता, गुरुजनों, समाज और देश का नाम रोशन करें। जीवन में किसी भी व्यक्ति से अच्छी बात सीखने और उसे अपनाने के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए। उन्होंने भारतीय खानपान और मोटे अनाज के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि हमें अपने पारंपरिक व पौष्टिक भोजन को प्राथमिकता देनी चाहिए।

मिलेट्स को भोजन में शामिल करना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। विद्यार्थियों को नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और संतुलित आहार अपनाने के लिए भी प्रेरित किया। कुलगुरु प्रो. अरविंद कुमार शुक्ल ने शरुआत में प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं अनुसंधान गतिविधियों की जानकारी दी।

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छात्रा को गोल्ड मेडल और उपाधि प्रदान करते राज्यपाल मंगुभाई पटेल। नईदुनिया

चार विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक

समारोह में उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए कृषि स्नातक वर्ग में कृषि महाविद्यालय, ग्वालियर के अभय शर्मा, उद्यानिकी स्नातक वर्ग में उद्यानिकी महाविद्यालय, मंदसौर के प्रत्यक्ष खटीक, कृषि स्नातकोत्तर वर्ग में कृषि महाविद्यालय, ग्वालियर की ऋद्धि भट्टाचार्य तथा पीएचडी वर्ग में कृषि महाविद्यालय, ग्वालियर की नम्रता द्विवेदी को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। इसके साथ ही सृष्टि बालासाहेब खांडेकर, प्राजिकता कटारे और सुजल कुमार दीक्षित को सरताज बहादुर सिन्हा स्मृति पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

नई प्रोसेसिंग यूनिट का लोकार्पण

राज्यपाल ने सीएआईई में स्थापित नवीन सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट का लोकार्पण किया। यह पहल कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और कृषि आधारित उद्यमिता को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

जब पर्ची भेजने के बाद भी विशिष्ट अतिथि ने नहीं रोका उद्बोधन

समारोह में विशिष्ट अतिथि दिनेश कुलकर्णी का उद्बोधन काफी लंबा हो गया। इससे राज्यपाल असहज महसूस हुए। उन्होंने कुलगुरु के माध्यम से विशिष्ट अतिथि के पास पर्ची भी भेजी और वक्तव्य को समाप्त करने का संदेश भी भिजवाया। लेकिन उन्होंने पर्ची पर ध्यान ही नहीं दिया और काफी देर तक बोलते रहे।

यह भी हुआ समारोह में

  • छात्र और छात्राओं ने दत्तोपंत ठेंगड़ी सभागार के प्रवेश द्वार से लेकर अंदर तक आकर्षक रंगोली सजाई हुई थी। इसके अलावा सजावट भी काफी अच्छी थी। साथ ही मंच को भी आकर्षक कलाकृतियों से सजाया गया था।
  • राज्यपाल के उद्बोधन विशिष्ट अतिथि से छोटा और सारगर्भित रहा। साथ ही बीच बीच में उनकी चुटकियां भी ली।
  • कुलसचिव मंच का संचालन कर रहे थे। लेकिन शुरुआत में ही उनकी फाइल में लगे पन्ने जिन्हें पढ़कर उन्हें बोलना था, वह बदल गए। ऐसे में वे माइक पर कुछ समय तक खड़े रहे। बाद में उनके सहयोगी ने फाइल ठीक की तब वे कार्यक्रम को आगे बढ़ा पाए।

एग्रोनामी में पीएचडी की है और वर्तमान में कंप्टीशन की तैयारी कर रही हूं। लेकिन मेरा उद्देश्य नाबार्ड का अफसर बनाना है। जिससे अपनी शिक्षा का उपयोग किसानों के हित में अधिक से अधिक कर सकूं। - रिद्धी भट्टाचार्य, पीएचडी छात्रा

अभी तक बीएससी कृषि आनर्स की है। मास्टर करना है। लेकिन साथ-साथ यूपीएससी की तैयारी भी कर रहा हूं। जिससे यूपीएससी क्रेक कर अफसर बनकर कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए काम कर सकें। - अभय शर्मा, बीएसएसी कृषि, छात्र