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भारत में हड्डी रोगों के इलाज के लिए स्थानीय जरूरतों पर रिसर्च जरूरी, विदेशी मॉडल पर्याप्त नहीं: ब्रिटेन के विशेषज्ञों की सलाह

भारत और ब्रिटेन में बीमारियों की प्रकृति अलग है, इसलिए दोनों देशों में उपचार की चुनौतियां भी अलग-अलग हैं। ऐसे में भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप शोध और...और पढ़ें

By Anoop BhargavEdited By: Rajdil Shivhare
Publish Date: Fri, 09 Oct 2026 07:16:24 PM (IST)Updated Date: Fri, 09 Oct 2026 07:17:12 PM (IST)
भारत में हड्डी रोगों के इलाज के लिए स्थानीय जरूरतों पर रिसर्च जरूरी, विदेशी मॉडल पर्याप्त नहीं: ब्रिटेन के विशेषज्ञों की सलाह
डॉ. सुनील गर्ग और डॉ. रोहित महेश्वरी।

HighLights

  1. भारत और यूके में बीमारियों का स्वरूप अलग
  2. ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ सेवाएं बढ़ाने पर जोर
  3. शोल्डर रिप्लेसमेंट सुविधाओं के विस्तार की जरूरत

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। हड्डी और जोड़ रोगों के बेहतर उपचार के लिए केवल आधुनिक तकनीक अपनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि भारत में बीमारियों के स्वरूप, मरीजों की जरूरतों और यहां की स्वास्थ्य व्यवस्था को ध्यान में रखकर रिसर्च और प्रशिक्षण विकसित करना भी जरूरी है। भारत और ब्रिटेन में बीमारियों की प्रकृति अलग है, इसलिए दोनों देशों में उपचार की चुनौतियां भी अलग-अलग हैं।

ऐसे में भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप शोध और चिकित्सकीय प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। यह बात ब्रिटेन से आए डॉ. रोहित महेश्वरी ने जीआरएमसी में आयोजित मध्यप्रदेश आर्थोपेडिक एसोसिएशन की 44वीं वार्षिक कान्फ्रेंस के दौरान नईदुनिया से चर्चा में कही।


अलग-अलग देशों में बीमारियों से जुड़ी चुनौतियां एक जैसी नहीं होतीं

डॉ. महेश्वरी के अनुसार, अलग-अलग देशों में मरीजों की जरूरतें और बीमारियों से जुड़ी चुनौतियां एक जैसी नहीं होतीं। इसलिए उपचार की तकनीकों के साथ शोध और प्रशिक्षण की दिशा भी स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप होनी चाहिए, ताकि मरीजों को बेहतर परिणाम मिल सकें।

गांवों में विशेषज्ञों की कमी दूर करना भी बड़ी चुनौती

ब्रिटेन से आए शोल्डर सर्जन डॉ. सुनील गर्ग ने कहा कि भारत में हड्डी और जोड़ रोगों के उपचार की बड़ी जरूरत ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। कंधे और हड्डियों की समस्याओं से जूझ रहे मरीजों को समय पर विशेषज्ञ परामर्श और उपचार मिलना चाहिए। सुविधाओं की कमी के कारण मरीजों को बड़े शहरों तक पहुंचने के लिए मजबूर नहीं होना पड़े, इसके लिए ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना जरूरी है। हालांकि भारत में स्वास्थ्य सुविधाएं पहले से काफी बेहतर हुई हैं।

कंधे का जोड़ खराब होने पर रिप्लेसमेंट से मिल सकती है राहत

डॉ. गर्ग ने बताया कि कंधे के जोड़ के गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त होने पर सर्जरी के जरिए उसके खराब हिस्सों को कृत्रिम प्रत्यारोपण से बदला जा सकता है। शोल्डर रिप्लेसमेंट की मदद से उपयुक्त मरीजों में दर्द कम करने और हाथ की गतिविधियों में सुधार लाने में मदद मिल सकती है। हालांकि सर्जरी का निर्णय मरीज की स्थिति और जोड़ को हुए नुकसान के आधार पर लिया जाता है। भारत में इस तरह की सर्जरी से जुड़ी सुविधाओं और विशेषज्ञ सेवाओं का विस्तार करने की जरूरत है, ताकि जरूरतमंद मरीजों को समय पर उपचार मिल सके।