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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 26, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Former Prime Minister Indira Gandhi: इंदिरा गांधी ने ग्वालियर में बांधी थी अपने भाई की कलाई पर राखी

Former Prime Minister Indira Gandhi: आपको मालूम है कि देश की प्रथम महिला प्रधानमंत्री रहीं इंदिरा गांधी के भाई ग्वालियर के रहने वाले थे, जिन्हें वो हर...और पढ़ें

By anil tomarEdited By: anil tomar
Publish Date: Sat, 26 Aug 2023 10:28:03 AM (IST)Updated Date: Sat, 26 Aug 2023 10:28:03 AM (IST)
Former Prime Minister Indira Gandhi: इंदिरा गांधी ने ग्वालियर में बांधी थी अपने भाई की कलाई पर राखी

HighLights

  1. आजाद हिन्द फौज के सिपाही और कांग्रेस के सेवादल के प्रदेश अध्यक्ष रहे ग्वालियर के पं. रामसेवक आजाद को बांधी थी इंदिरा गांधी ने राखी
  2. ग्वालियर में हुई सेवादल की बैठक में बांधी थी राखी
  3. 1965-66 से लगातार जब तक पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जीवित रहीं तब तक पं रामसेवक की कलाई पर रक्षासूत्र बाधती रहीं

ग्वालियर. नईदुनिया प्रतिनिधि। आपको मालूम है कि देश की प्रथम महिला प्रधानमंत्री रहीं इंदिरा गांधी के भाई ग्वालियर के रहने वाले थे, जिन्हें वो हर साल ग्वालियर आ कर राखी बांधा करती थी। जी हां, ऐसा ही है। हम बात कर रहे हैं आजाद हिन्द फौज के सिपाही और कांग्रेस के सेवादल के प्रदेश अध्यक्ष रहे ग्वालियर के पं. रामसेवक आजाद की। इन्हें इंदिरा गांधी ने अपना भाई माना था और 1965-66 से लगातार जब तक पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जीवित रहीं तब तक पं रामसेवक की कलाई पर रक्षासूत्र बाधती रहीं।

दरअसल इसकी शुरुआत तब हुई जब पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू का 1964 में निधन हो गया। इंदिरा सेवा दल में थीं और वह सक्रिय राजनीति का हिस्सा बनने जा रही थीं। उन्होंने सेवादल के कार्यकर्ताओं के साथ एक बैठक रखी थी, जिसमें शामिल होने के लिए वह ग्वालियर आई थी। यह वाक्या पं. रामसेवक आजाद के भांजे साहित्यकार एवं कवि डा़ भगवान स्वरूप शर्मा उर्फ चैतन्य नईदुनिया के साथ साझा किया। श्री चैतन्य का कहना है उस वक्त मेरी उम्र 8 से 10 साल रही होगी, जब इंदिरा पहली बार ग्वालियर आई थी।


बाड़े पर हुआ था आयोजन

श्री चैतन्य बताते हैं सेवादल के प्रदेश अध्यक्ष पं. रामसेवक आजाद का उस वक्त कांग्रेस में बड़ा कद था। केन्द्रीय नेता भी उनकी बात को नहीं टाल पाते थे। इसलिए इंदिरा ने अपनी राजनीति की शुरुआत ग्वालियर से की। पं. रामसेवक आजाद की कांग्रेस में काफी पकड़ थी। दूसरा सिंधिया घराने को वह अपने साथ जोड़कर चलना चाहती थी। इसलिए उन्होंने सेवादल के कार्यकर्ताओं की बैठक ग्वालियर में रखी। उस वक्त राखी का त्योहार था। बाड़े पर घंटाघर के सामने मंच लगाया गया था, वहां इंदिरा गांधी ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए सहयोग मांगा था। पं. रामसेवक आजाद ने इंदिरा को कार्यकर्ताओं की ओर से पूरा सहयोग देने का वचन दिया तो इंदिरा गांधी ने उसी वक्त पं. रामसेवक आजाद को यह कहते हुए कलाई पर राखी बांधी थी कि आज मुझे भाई मिल गया।

स्टेट काल में गांव की महिलाएं फौज को बांधती थी राखी

श्री चैतन्य का कहना है ग्वालियर में राखी का त्योहार बड़े उत्साह से मनाया जाता रहा है। मेरे दादा बताते थे, जब स्टेट काल में ग्वालियर के आसपास गांव बसे हुए थे। राखी के दिन गांव की महिलाएं राजा की फौज का राखी बांधने के लिए आती थीं। यह सेना के सिपाही उस वक्त बहनों को डाकू, बदमाशों से रक्षा का वचन देते थे। रक्षा बंधन पर गांव के समस्त पुरुषों को गांव की बहन बेटियां राखी बांधती थी और लोग पंक्ति में बैठकर राखी बंधवाते हैं। यहां पर पुरुष भी एक दूसरे को राखी बांधकर रक्षा का वचन देते थे। उस वक्त भेंट में अनाज दिया जाता था।

त्योहार पर होती थी प्रतियोगिताएं

84 वर्षीय साहित्यकार प्रकाश चन्द्र मिश्रा का कहना है शहर से लेकर गांव तक रक्षा बंधन के त्योहार पर प्रतियोगिताएं होती थी। आम के पेड़ पर झूले डल जाते थे। झूला कौन अधिक तेजी से झूल सकता है इसकी प्रतियोगिताएं होती थीं। इसके अलावा निशानेबाजी, तलवारबाजी, कुश्ती, कबड्डी, खो-खो आदि खेलों की प्रतियोगिताओं का आयोजन होता था। इसमें आसपास के गांव के लोग शामिल होते थे। प्रतियोगिताओं का दौर 1990 तक रहा फिर धीरे-धीरे बंद हो गया।