ग्वालियर में GIS सर्वे पर उठे सवाल, संपत्तियों का क्षेत्रफल बढ़ाकर थमाए जा रहे नोटिस; 15 दिन में मांगे दावे-आपत्ति
ऐसे में संपत्ति स्वामियों के लिए नया सिरदर्द पैदा हो गया। वहीं इस नई व्यवस्था से निगम के संपत्तिकर अमले के ऊपर भी कार्रवाई की तलवार लटक गई है। सर्वे टीम द्वारा तैयार पोर्टल में कोई फिल्टर भी नहीं है।
Publish Date: Sat, 24 Oct 2026 10:23:40 PM (IST)Updated Date: Sat, 24 Oct 2026 10:24:03 PM (IST)
HighLights
- गलत नपाई से बढ़ा सिरदर्द
- 4.32 करोड़ में मिला ठेका
- निगम का डबल चेकिंग तर्क
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। शहर में आधुनिक तरीके से संपत्तियों की नपाई कर सही टैक्स की गणना के लिए शुरू किया गया जियोग्राफिक इंफार्मेशन सिस्टम (GIS) सर्वे सिर्फ दिखावा साबित हो रहा है। सर्वे के नाम पर की टीम सटीक गणना करने के बजाय ज्यादातर संपत्तियों का क्षेत्रफल बढ़ाकर टैक्स की गणना कर रही है। इसके बाद संपत्ति स्वामियों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं कि यदि गणना में कोई दावे-आपत्ति हों, तो 15 दिन के अंदर समस्त दस्तावेजों के साथ क्षेत्रीय कार्यालय पर संपर्क कर लें।
संपत्ति स्वामियों के लिए नया सिरदर्द
ऐसे में संपत्ति स्वामियों के लिए नया सिरदर्द पैदा हो गया। वहीं इस नई व्यवस्था से निगम के संपत्तिकर अमले के ऊपर भी कार्रवाई की तलवार लटक गई है। सर्वे टीम द्वारा तैयार पोर्टल में कोई फिल्टर भी नहीं है। निगम का अमला ध्यान न रखे, तो आसानी से किसी भी नई संपत्ति की आइडी तैयार हो जा रही है। हालांकि अभी संपत्तिकर अमले ने ऐसी नई आईडी को अप्रूव करना शुरू नहीं किया है।
हैदराबाद की सैट्रिक कंपनी को मिला है जिम्मा
शहर में लगभग चार करोड़ 32 लाख रुपये की लागत से सभी संपत्तियों का GIS सर्वे का जिम्मा हैदराबाद की सैट्रिक कंपनी को सौंपा गया है। कंपनी के कर्मचारी पिछले दो वर्ष से सर्वे कर रहे हैं। शुरू में सर्वे ठीक चला, लेकिन अब खानापूर्ति जैसी स्थिति बन रही है। कंपनी के कर्मचारी सिर्फ संपत्ति के बाहर से फोटो खींचकर जीपीएस लोकेशन के आधार पर संपत्तियों के क्षेत्रफल का पता कर सत्यापन कर रहे हैं। इसमें भी संपत्तियों का क्षेत्रफल बढ़ाकर दर्ज किया जा रहा है। लोगों को इसके लिए नोटिस दिए जा रहे हैं।
ऐसे में सवाल पैदा हो रहा है कि क्षेत्रीय कार्यालयों के माध्यम से नोटिस जारी कर सभी संपत्तियों के दस्तावेज मंगाकर देखे जा सकते थे तो सर्वे की कवायद क्यों की गई। सर्वे कंपनी को 4.32 करोड़ रुपये का भुगतान क्यों किया जा रहा है।
55 वार्डों में हुआ है सर्वे
नगर निगम सीमा में वर्तमान में 66 वार्ड हैं। इनमें 60 वार्ड शहरी क्षेत्र हैं और छह ग्रामीण क्षेत्र के हैं। वर्तमान में 55 वार्डों में सर्वे का काम पूरा हो चुका है। दावा किया जा रहा है कि इन वार्डों की हर संपत्ति को जीआइएस सर्वे के आधार पर दर्ज कर लिया गया है। बाकी 11 वार्डों में अभी सर्वे होना शेष है, जिसमें लगभग छह से आठ महीने का समय और लगेगा। वहां भी इसी तरह की प्रक्रिया की जाएगी। सर्वे के बाद लोगों को नोटिस देकर दावे-आपत्ति मंगाए जाएंगे।
अधिकारियों का तर्क-हम डबल चेक कर रहे हैं
इस मामले में नगर निगम के अधिकारियों का तर्क है कि सर्वे में कंपनी ने संपत्ति की नाप सही दर्ज की है या नहीं, उसके लिए हमने डबल चेकिंग की व्यवस्था की है। इस डबल चेकिंग में लोगों को नोटिस जारी कर उनसे दस्तावेज मंगाए जा रहे हैं। दस्तावेज देने की स्थिति में क्षेत्रफल को कम कर दिया जाएगा। हालांकि अधिकारियों का दावा है कि सर्वे तकनीक आधारित है, बावजूद इसके सर्वे में गड़बड़ियां सामने आने की स्थिति में नोटिस देने की प्रक्रिया की जा रही है।
जीआईएस सर्वे टेक्नोलॉजी आधारित है। हम संपत्तियों का असल क्षेत्रफल निकालकर संपत्तिकर वसूलना चाहते हैं। जिन संपत्तियों के अधिक क्षेत्रफल आने की शिकायतें हैं, उन्हें नोटिस देकर दावे-आपत्ति मंगाए जा रहे हैं ताकि सुधार किया जा सके। - मुनीष सिंह सिकरवार, अपर आयुक्त नगर निगम