
Gwalior Bad Roads News: बलबीर सिंह, ग्वालियर नईदुनिया। शहर की सड़कों के साथ अजीब स्थिति बन गई है। नगर निगम व पीडब्ल्यूडी सड़कों को लेकर आमने-सामने हैं। सड़कों की एक दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। हाई कोर्ट में पीडब्ल्यूडी ने शपथ पत्र पेश कर कहा है कि उनकी शहर में सड़कें नहीं है। यह सड़कें नगर निगम की हैं। जबकि नगर निगम का कहना है कि सड़कें पीडबब्ल्यूडी की हैं। उनकी सड़कों की हालत ठीक है, जो सड़कें खराब हैं, वह सड़कें पीडब्ल्यूडी की हैं। इस मामले में अब हाई कोर्ट में सुनवाई है।
अभिषेक परमार ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सिद्धार्थ सिजोरिया ने तर्क दिया है कि 2016 में एक संशाेधन किया गया था। इस संशाेधन के अनुसार रोड सेफ्टी का आडिट कराया जाना चाहिए। यदि सड़क से किसी को दिक्कत है तो उसके लिए एक एप बनाना जरूरी है। नगर निगम ने सड़कों काे लेकर दिए जवाब में बताया कि पूर्व विधानसभा क्षेत्र में 16.22 करोड़ रुपये खर्च कर सड़कों का निर्माण किया है। कुछ सड़कों के सुधार के लिए टेंडर जारी कर दिए हैं। ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में 5 सड़कों पर 2.18 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। ग्वालियर विधानसभा क्षेत्र में 13 सड़कों पर 15.52 करोड़ रुपये खर्च होंगे। पीडब्ल्यूडी की खस्ताहाल सड़कों पर नगर निगम काम नहीं करा सकती है। पीडब्ल्यूडी ने भी जवाब दे दिया है कि शहर में उनकी सड़कें नहीं हैं। दोनों विभाग सड़कों को लेकर आमने-सामने हैं, लेकिन सड़क के गड्ढ़ाें से जनता परेशान हैं। अब हाई कोर्ट में दोनों के हलफनामे पर सुनवाई होनी है।