
Gwalior Baisli River News: ग्वालियर . नईदुनिया प्रतिनिधि। बैसली नदी को पुनर्जीवित करने के अभियान के अंतर्गत गर्मी में पानी की किल्लत झेलने वाले 75 गांवों के घरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग कराई जाएगी। इसके लिए बैसली नदी पुनर्जीवन अभियान के पदाधिकारियों ने डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करा ली है। इसके तहत बरसात के मौसम में 11.81 करोड़ लीटर पानी को संग्रहित कर गांवों के बोरवेल और ट्यूबवेल को रिचार्ज करने का काम किया जाएगा। ये वो गांव हैं, जो बैसली नदी के क्षेत्र में पड़ते हैं, लेकिन वाटर हार्वेस्टिंग की सुविधा न होने के कारण वर्षा जल यूं ही बहकर बर्बाद हो जाता है।
सफलता के बाद पूरे देश में लागू होगा प्रोजेक्ट
बैसली नदी को पुनर्जीवित करने के लिए केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत काम शुरू कराया है। ये प्रोजेक्ट सफल होने पर इसे देशभर में लागू किया जाएगा। नदी का जलग्रहण क्षेत्र 46 हजार हेक्टेयर है और इसमें बरसात के मौसम में 430 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) पानी बेकार बह जाता है। ऐसे में विशेष उपाय कर इस पानी को संग्रहित किया जाएगा, ताकि वर्षभर नदी के जल का उपयोग किया जा सके। वहीं नदी के किनारे व उप बेसिन में स्थित 45 पंचायतों के 75 गांवों में भू-जल स्तर बहुत तेजी से कम हो रहा है। पिछले कुछ वर्षों में यहां चार मीटर तक भू-जल स्तर गिरा है। इसको देखते हुए अब इन गांवों के घरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग के लिए वाटर हीरो पंकज तिवारी से डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार कराई गई है। इस रिपोर्ट के अनुसार प्रत्येक गांव में 20 हजार वर्गफीट क्षेत्रफल को कवर करते हुए वाटर हार्वेस्टिंग कराई जाएगी और इससे हर गांव में 15.75 लाख लीटर पानी की सालाना बचत हो सकेगी। इस प्रकार 75 गांवों में कुल 15 लाख वर्गफीट क्षेत्रफल में छतों को कवर करते हुए वाटर हार्वेस्टिंग कर 11 करोड़ 81 लाख 25 हजार लीटर पानी सालभर में बचाया जा सकेगा।
गांवों को होगा लाभ, बोरवेल होंगे रिचार्ज
बैसली नदी का उद्गम भदावना जल प्रपात से होता है, जो उटीला के जंगलों में स्थित पहाड़ों पर है। भदावना जल प्रपात एक पिकनिक स्पाट के साथ ही धार्मिक स्थल भी है। बैसली नदी गंगा बेसिन में सिंध नदी की सहायक है। पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न कारणों से इस नदी की स्थिति खराब हुई है। इसके उद्गम से गोहद बांध तक इस नदी का प्रवाह विलुप्त होता जा रहा है। नदी के जलग्रहण क्षेत्र में भूजल तेजी से कम हो रहा है। इसके किनारे व उप-बेसिन में स्थित 45 पंचायतें इस स्थिति के कारण समस्याओं का सामना कर रही हैं और गांवों में पानी का संकट गहराता जा रहा है। वाटर हार्वेस्टिंग होने से गांवों में बोरवेल और कुएं रिचार्ज हो सकेंगे।
किसानों को दिया मेड़बंदी का प्रशिक्षण
रविवार को इस अभियान के अंतर्गत मेड़बंदी के लिए कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन टिहोली देवस्थान में किया गया। यहां संत कृपाल सिंह मुख्य रूप से मौजूद थे, जबकि उद्यानिकी मंत्री भारत सिंह कुशवाह आनलाइन कार्यक्रम में जुड़े। इस दौरान 50 किसानों को विशेषज्ञों द्वारा नींबू के पौधे लगाने और उनकी देख रेख का प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद किसानों को नींबू के एक हजार पौधे भी वितरित किए गए, जिनके रखरखाव की जिम्मेदारी किसानों की ही होगी। अभियान के संयोजक मनीष राजपूत ने आयोजन के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। अभियान के अध्यक्ष व जलशक्ति मंत्रालय के पूर्व निदेशक गिर्राज गोयल ने बैसली नदी अभियान की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नदी के कृषि योग्य 20 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में आठ लाख वृक्ष मेड़ों पर लगाने की योजना है।
डीपीआर तैयार कराई है
बैसली नदी पुनर्जीवन अभियान के अंतर्गत 45 ग्राम पंचायतों के 75 गांवों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग कराने के लिए डीपीआर तैयार कराई है। वाटर हार्वेस्टिंग भी इस अभियान का महत्वपूर्ण घटक है। इसके अलावा किसानों को रविवार को मेड़बंदी का प्रशिक्षण भी दिया गया है।
गिर्राज गोयल, सेवानिवृत्त निदेशक जलशक्ति मंत्रालय एवं अध्यक्ष बैसली नदी अभियान
11 करोड़ लीटर से ज्यादा पानी बचेगा
बैसली नदी के आसपास पड़ने वाले 75 गांवों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग कराने के लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार कराई गई है। प्रत्येक गांव में 20 हजार वर्गफीट क्षेत्रफल में छतों पर वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था की जाएगी। इससे सालभर में 11 करोड़ लीटर से अधिक पानी को बचाकर भू-जल स्तर में बढ़ोतरी की जाएगी।
पंकज तिवारी, वाटर हीरो