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ग्वालियर की गंगादास की बड़ी शाला में गूंजी 1857 की ऐतिहासिक तोप की गर्जना, संतों ने दिखाया हैरान करने वाला युद्ध कौशल

तोप की तेज गर्जना से पूरा परिसर गूंज उठा। धमाका इतना जोरदार था कि मौके पर मौजूद श्रद्धालु कुछ पल के लिए चौंक गए और उनके कानों में तेज आवाज गूंजती रही।

By Jogendra SenEdited By: Rajdil Shivhare
Publish Date: Tue, 20 Oct 2026 06:57:55 PM (IST)Updated Date: Tue, 20 Oct 2026 06:58:22 PM (IST)
ग्वालियर की गंगादास की बड़ी शाला में गूंजी 1857 की ऐतिहासिक तोप की गर्जना, संतों ने दिखाया हैरान करने वाला युद्ध कौशल
गंगादास की बड़ी शाला में शस्त्र पूजन के बाद ऐतिहासिक तोप चलाई गई। नईदुनिया

HighLights

  1. तोप की तेज गर्जना और शस्त्र पूजन
  2. नारियल और आलू पर लाठी के सटीक प्रहार
  3. हादसे के पीड़ितों को दी गई श्रद्धांजलि

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। ऐतिहासिक श्री गंगादास की बड़ी शाला में विजयदशमी पर मंगलवार को शौर्य, परंपरा और राष्ट्रभक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। पीठाधीश्वर रामसेवक दास महाराज के सानिध्य में विधि-विधान से शस्त्र पूजन किया गया। इस दौरान प्रथम स्वाधीनता संग्राम में अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध में इस्तेमाल किए गए संतों के परंपरागत हथियारों के साथ वर्ष 1857 की ऐतिहासिक तोप का भी पूजन कर उसे चलाया गया।

तोप की तेज गर्जना से पूरा परिसर गूंज उठा। धमाका इतना जोरदार था कि मौके पर मौजूद श्रद्धालु कुछ पल के लिए चौंक गए और उनके कानों में तेज आवाज गूंजती रही।

इन हथियारों का हुआ पूजन

शस्त्र पूजन के लिए शाला परिसर में बरछी, कृपाण, कटारी, तलवार और चिमटे सहित अनेक पारंपरिक हथियार सजाकर रखे गए थे। मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ इनका पूजन किया गया। इसके बाद संतों ने अपने पारंपरिक युद्ध कौशल का प्रदर्शन किया। हाथों में लाठियां थामे संतों की फुर्ती और प्रहारों की सटीकता ने वहां मौजूद लोगों का ध्यान खींचा। श्रद्धालु इस प्रदर्शन को उत्सुकता से देखते रहे।


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शस्त्र पूजन के बाद साधुओं ने शस्त्रों का प्रदर्शन किया। नईदुनिया

यह कौशल दिखाया

प्रदर्शन के दौरान एक संत के दोनों हाथों और सिर पर नारियल रखे गए। दूसरे संत ने लाठी से सटीक प्रहार कर तीनों नारियल फोड़ दिए। इसके बाद युद्ध कौशल का एक और दृश्य सामने आया। एक संत जमीन पर लेट गया और उसके दोनों पैरों, हाथों और सिर के नीचे छोटे आलू रखे गए। दूसरे संत ने लाठी से एक ही प्रहार में आलू काट दिए। संतों के संतुलन, एकाग्रता और प्रहार की सटीकता को देखकर उपस्थित लोग आश्चर्यचकित रह गए। इस अवसर पर समाजसेवी केशव पांडे सहित अन्य प्रबुद्धजन उपस्थित थे।

बड़ी संख्या में लोग रहे उपस्थित

कार्यक्रम में वरिष्ठ सेवादास, श्रीदास, रामदास, नरसिंहदास, उत्तमदास, गोपालदास, कन्हैयादास, अवधेशशरण, रामकिशनदास, अनिल शर्मा, शैलेश तिवारी और रेवतीरमन कटारे सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। शाला में आयोजित विजयादशमी समारोह के अंत में दो दिन पूर्व शीतला माता मंदिर के समीप हुए भीषण हादसे में काल-कवलित श्रद्धालुओं के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

उपस्थित संतों और श्रद्धालुओं ने दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए शोकाकुल परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।आचार्य मनीष दुबे और प्रदीप गोस्वामी ने विधि-विधान के साथ पूजन कराया।