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अब ग्वालियर-चंबल अंचल के किसानों को सरसों में होगा पिछले साल की तुलना में 413 रुपये का फायदा

सरसों के उत्पादन में देश में दूसरे स्थान पर रहने वाले अंचल के किसानों के लिए सरसों की फसल पैदा करना और अधिक फायदेमंद होगा।

By Anil TomarEdited By: manoj dubey
Publish Date: Wed, 30 Sep 2026 08:40:12 PM (IST)Updated Date: Wed, 30 Sep 2026 08:43:12 PM (IST)
अब ग्वालियर-चंबल अंचल के किसानों को सरसों में होगा पिछले साल की तुलना में 413 रुपये का फायदा

HighLights

  1. अब 6,613 रुपये प्रति क्विंटल सरसों के दाम मिलेंगे
  2. समर्थन मूल्य से काफी अधिक पर बिकी है सरसों
  3. मौसम ठीक रहा तो ही होगा सरसों का अच्छा उत्पादन

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। ग्वालियर चंबल को पीले सोने यानी सरसों की खान कहा जाता है। सरसों के उत्पादन में देश में दूसरे स्थान पर रहने वाले अंचल के किसानों के लिए सरसों की फसल पैदा करना और अधिक फायदेमंद होगा, क्योंकि केंद्र सरकार ने सरसों के समर्थन मूल्य में 413 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की है।

यहां बता दें कि अंचल में सबसे अधिक सरसों मुरैना व भिंड में होती है। इसके बाद ग्वालियर है। ग्वालियर जिले में इस बार 60 हजार हेक्टेयर में बोई गई है। जबकि मुरैना व भिंड जिलों में दो से लेकर तीन लाख हेक्टेयर तक सरसों की बुवाई की गई है।


अब 6,613 रुपये प्रति क्विंटल सरसों के दाम मिलेंगे

अभी तक सरसों छह हजार 200 रुपये प्रति क्विंटल सरकारी समर्थन मूल्य था, वहीं अब 6,613 रुपये प्रति क्विंटल सरसों के दाम मिलेंगे। हालांकि केंद्र सरकार ने अन्य फसलों के लिए भी समर्थन मूल्य घोषित किए हैं।

समर्थन मूल्य से काफी अधिक पर बिकी है सरसों

2026-27 के लिए सरसों का समर्थन मूल्य छह हजार 200 रुपये प्रति क्विंटल था, लेकिन अंचल की मंडियों में सरसों छह हजार 800 से सात हजार रुपये प्रति क्विंटल भाव रहा यानी किसानों को एमएसपी से अधिक दाम मिले।बेशक सरकार ने 2027-28 के लिए समर्थन मूल्य को बढ़ाकर छह हजार 600 रुपये कर दिया है, लेकिन सरसों से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि सरसों के भाव एमएसपी से अधिक ही रहेंगे।

मौसम ठीक रहा तो ही होगा सरसों का अच्छा उत्पादन

कृषि विशेषज्ञ डॉ. शैलेंद्र सिंह कुशवाह का कहना है कि अभी तक सरसों की बुवाई के लिए मौसम अच्छा है, लेकिन यदि आगामी दिनों में तापमान बढ़ता है तो बुवाई पर असर पड़ सकता है। इसके साथ ही सरसों के भाव उत्पादन पर निर्भर करेंगे।

यदि इस साल अच्छा उत्पादन होगा तो बाजार भाव में कुछ कमी आ सकती है। लेकिन यदि मौसम व प्राकृतिक वजहों से उत्पादन प्रभावित हुआ तो भाव अधिक ही रहेंगे।

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