ग्वालियर कोर्ट स्मैक तस्करी की झूठी कहानी गढ़ने पर पुलिस पर भड़का, DGP को दिए जांच के आदेश
ग्वालियर में 101 ग्राम स्मैक जब्ती मामले में पुलिस की थ्योरी फर्जी साबित होने पर कोर्ट ने दोनों आरोपियों को बरी कर दिया। गवाही पलटने और लापरवाही पर नि...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 14 Oct 2026 07:54:41 AM (IST)Updated Date: Wed, 14 Oct 2026 08:01:42 AM (IST)
ग्वालियर कोर्ट पुलिस पर भड़का। (फाइल फोटो)HighLights
- स्मैक तस्करी मामले में पुलिस की थ्योरी झूठी साबित हुई।
- कोर्ट ने सबूतों के अभाव में दोनों आरोपियों को बरी किया।
- निरीक्षक विवेचक जीएस धाकड़ के गवाही पलटने पर कोर्ट नाराज।
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर: 101 ग्राम स्मैक तस्करी के मामले में पुलिस की थ्योरी झूठी सामने आने पर कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। विशेष कोर्ट ने इस मामले में दोनों आरोपितों को बरी करते हुए रिकार्ड पर निरीक्षक विवेचक जीएस धाकड़ के बयान पलटने पर नाराजगी जताते हुए निरीक्षक की विभागीय जांच के आदेश डीजीपी मप्र को दिए हैं।
कोर्ट ने अपने फैसले में सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि निरीक्षक जीएस. धाकड़ द्वारा रिकॉर्ड के विपरीत कथन दिए गए हैं, जो उनकी घोर लापरवाही और उदासीनता का प्रतीक है। उन्होंने किस मकसद से प्रेरित होकर न्यायालय के समक्ष गलत तथ्य प्रस्तुत किए और अभियोजन के मामले को कमजोर करने का प्रयास किया, इसकी जांच अत्यंत आवश्यक है।
अदालत ने फैसले की कॉपी और गवाही के दस्तावेज डीजीपी भोपाल को भेजकर आरोपित पुलिस अधिकारी के खिलाफ तत्काल आवश्यक विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
क्या था मामला
- अभियोजन (पुलिस) की कहानी के मुताबिक, 15 मई 2023 को झांसीरोड थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी व निरीक्षक शैलेन्द्र भार्गव एक अन्य मामले की जांच के लिए सिंधिया कन्या विद्यालय गेट नंबर-2 के पास गए थे।
- वहां संदिग्ध रूप से घूम रहे श्याम किशोर शर्मा निवासी भिंड, हाल महलगांव को रोककर तलाशी ली गई, जिसके पास मौजूद काले बैग से 101 ग्राम स्मैक बरामद होने का दावा किया गया था। पूछताछ में श्याम किशोर के कथन के आधार पर पुलिस ने दूसरे आरोपी राहुल नागर निवासी भिंड को भी इस साजिश में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया था।
यहां निरीक्षक फंसे
दस्तावेजों के मुताबिक स्मैक की सैंपलिंग (धारा 52-ए की कार्यवाही) न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष हुई थी, लेकिन कोर्ट में गवाही के दौरान इंस्पेक्टर जीएस धाकड़ ने बयान दिया कि यह कार्यवाही कलेक्ट्रेट में तहसीलदार के सामने हुई थी।
पुलिस पर यह गंभीर सवाल
- पुलिस की जब्ती रिपोर्ट और गवाहों के अनुसार, घटनास्थल पर स्मैक "टुकड़ों के रूप में" बरामद हुई थी, लेकिन जब सैंपल लैब (स्नस्रु) भेजा गया तो वहां वह "पाउडर" के रूप में पाया गया. कोर्ट में पेशी के दौरान वह फिर से "टुकड़ों" में तब्दील हो गया. कोर्ट ने इसे वैज्ञानिक रूप से असंभव बताते हुए कहा कि इससे यह गंभीर संदेह पैदा होता है कि जो माल जप्त हुआ था, क्या वही लैब भेजा गया था?
एक्ट की धारा 50 के तहत आरोपी की तलाशी किसी मजिस्ट्रेट या राजपत्रित अधिकारी की मौजूदगी में होनी चाहिए। पुलिस ने नोटिस में आरोपी को यह कानूनी विकल्प देने के बजाय "वरिष्ठ पुलिस अधिकारी" के समक्ष तलाशी का गलत विकल्प दिया, जो नियमों के खिलाफ है।
जप्त की गई स्मैक को कोर्ट की कार्यवाही (धारा 52-ए) के लिए मालखाने से कब बाहर निकाला गया और कब वापस रखा गया, इसकी कोई प्रविष्टि रजिस्टर में दर्ज नहीं थी।
राहुल नागर को केवल दूसरे आरोपी के बयान पर पकड़ा गया था, उनके बीच कोई कॉल डिटेल या बातचीत का लिंक पुलिस कोर्ट में साबित नहीं कर पाई