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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 16, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Gwalior Dhrupad festival: रागों ने सर्द रात में बढ़ाई तपन

समापन का शुभारंभ दरभंगा घराने के डा. समित मलिक के ध्रुपद गायन से हुआ। डा. मलिक ध्रुपद गायक दरभंगा घराने के तेरहवीं पीढ़ी का नेत़त्‍वकरतेहैं।

By anil.tomarEdited By: anil.tomar
Publish Date: Tue, 16 Nov 2021 05:50:00 PM (IST)Updated Date: Tue, 16 Nov 2021 05:50:43 PM (IST)
Gwalior Dhrupad festival: रागों ने सर्द रात में बढ़ाई तपन

टाउनहाल में चल रहे धु्रपद समारोह के अंतिम दिन कलाकारों ने बांधा समा

Gwalior Dhrupad festival: ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र नागपुर संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार एवं राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय ग्वालियर के संयुक्त तत्वावधान में टाउनहाल में आयोजित तीन दिवसीय ध्रुपद समारोह का समापन सोमवार को हुआ।

अंतिम शाम की प्रस्तुतियां शुरू होने समारोह का शुभारंभ हाकी एसोसिएशन आफ इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट देवेंद्र प्रताप सिंह, संगीत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. साहित्य कुमार नाहर, पंजाबी साहित्य अकादमी की अध्यक्ष नीरूसिंह ज्ञानी, वरिष्ठ भाजपा नेता सतीष बोहरे, कार्य परिषद सदस्य चंद्रप्रताप सिकरवार, अतुल अधौलिया, संगीत विवि के कुलसचिव डा. कृष्ण कांत शर्मा, सहायक संचालक पाल बेतवार ने किया।


समझी दरंभगा घराने की गायकी: अंतिम शाम का शुभारंभ दरभंगा घराने के डा. समित मलिक के ध्रुपद गायन से हुआ। डा. समित मलिक ध्रुपद गायक दरभंगा घराने के तेरहवीं पीढ़ी का नेतृत्व करते हैं। गायन का आरंभ राग भूप कल्याण में आलाप के बाद चौताल में निबद्घ स्वामी हरिदास द्वारा रचित चार चरण के पद झूठी बात सांची कर दिखावत हौं हरिनागर से किया। समापन आपने राग दुर्गा में बैजू बावरा जी द्वारा रचित ताल सूलताल में निबद्घ चार चरण का पद तू आदि भवानी..से किया। उनके साथ पखावज पर जगत नारायण शर्मा और तानपुरा पर साकेत कुमार व गुलाब प्रजापति थे। इसी क्रम में दूसरी प्रस्तुती ग्वालियर धु्रपद केंद्र के धु्रपद गुरु व ध्रुपद गायक अभिजीत सुखदाने दी। इन्होंने राग बागेश्री में आलाप, मध्य लय आलाप, द्रुत लय आलाप, के बाद ताल चौताल में निबद्घ रचना सुनाई। समापन जलद सूलताल में निबद्घ रचना करतार तुम राज साज से किया। उनके साथ गायन में सहयोग शिष्य आदित्य शर्मा ने किया। पखावज पर संगत मध्यप्रदेश शिखर सम्मान से सम्मानित पंडित संजय आगले तथा तानपुरा पर योगिनी तांबे एवं तेजस भाटा ने की। कार्यक्रम की तृतीय प्रस्तुति में कर्नाटक की ज्योति हेगड़े ने रूद्र वीणा वादन प्रस्तुत किया। आपने राग चन्द्रकौंस में आलाप, जोड, झाला के बाद विलंबित गत ताल चौताल में प्रस्तुत की। इनके साथ पखावज पर पं संजय आगले व तानपुरा पर योगिनी थीं।

रात तक कुर्सियों पर जमे रहे संगीत रसिक, रागों का लिया आनंद

ध्रपुद समारोह में अंतिम प्रस्तुति ख्यात ध्रुपद गायक पं. उदय भवालकर ने दी। उन्होंने अपने गायन से रसिकों को झूमने के लिए विवश कर दिया है। उन्होंने राग नायकी कान्हडा में विलंबित मध्य एवं द्रुत लय में आलाप के पश्चात ताल धमार में निबद्घ धमार लाल लाड़ली खेले निकसे होरी..प्रस्तुत किया। समारोह का समापन पंडित भवालकर ने ताल सूलताल में निबद्घ ध्रुपद हरि को नाम सुमर.. से किया। आपके साथ पखावज पर पं. संजय आगले और तानपुरा पर सुदीप भदौरिया एवं तेजस भाटे ने थे। संचालन रंगकर्मी अशोक आनंद ने किया।