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साइबर ठगों के निशाने पर 95 फीसदी पढ़े-लिखे लोग, डिजिटल अरेस्ट में डॉक्टर, इंजीनियर और रिटायर्ड अफसर गंवा रहे करोड़ों रुपये

ग्वालियर में डिजिटल अरेस्ट के अधिकांश शिकार उच्च शिक्षित लोग बने हैं। कानून के डर का फायदा उठाकर साइबर ठग करोड़ों रुपये की ठगी कर रहे हैं।

By amit mishraEdited By: Anurag Mishra
Publish Date: Fri, 26 Jun 2026 10:01:03 AM (IST)Updated Date: Fri, 26 Jun 2026 10:01:03 AM (IST)
साइबर ठगों के निशाने पर 95 फीसदी पढ़े-लिखे लोग, डिजिटल अरेस्ट में डॉक्टर, इंजीनियर और रिटायर्ड अफसर गंवा रहे करोड़ों रुपये
साइबर ठगों के निशाने पर 95 फीसदी पढ़े-लिखे लोग। (एआई जनरेटेड)

HighLights

  1. डिजिटल अरेस्ट के 95 प्रतिशत पीड़ित उच्च शिक्षित लोग निकले।
  2. ठग सीबीआई, ईडी और पुलिस अधिकारी बनकर डराते हैं।
  3. कानून का डर साइबर अपराधियों का सबसे बड़ा हथियार बन रहा।

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। यदि आप सोचते हैं कि साइबर ठगी का शिकार सिर्फ कम पढ़े-लिखे या सीधे-साधे लोग होते हैं, तो आप भारी भूल कर रहे हैं। आंकड़े चौंकाने वाले और आंखें खोलने वाले हैं। पिछले कुछ महीनों में डिजिटल अरेस्ट के जितने भी मामले सामने आए हैं, उनमें से 95 प्रतिशत पीड़ित उच्च शिक्षित हैं। ठगे गए इन लोगों में नामचीन चिकित्सक, इंजीनियर, रिटायर्ड पुलिस-सेना के अधिकारी, प्रोफेसर और बुजुर्ग कारोबारी तक शामिल हैं।

पुलिस मुख्यालय ने साइबर अपराध की बढ़ती चुनौती से निपटने के लिए सेफ क्लिक अभियान की शुरुआत की है। लेकिन इस अभियान में पुलिस फिलहाल युवा वर्ग खासकर स्कूल-कॉलेज के छात्रों व कुछ निजी कार्यालयों में जाकर लोगों को जागरुक कर रही हैं।


जबकि इनसे ज्यादा जागरुक करने और सतत संवाद की जरूरत रिटायर्ड सरकारी अधिकारी-कर्मचारी, चिकित्सक व ऐसे पेशे से जुड़े लोगों से है, जिनके पास रिटायरमेंट फंड सहित अन्य रूप में बड़ी पूंजी होती है। यह ठगों के साफ्ट टारगेट हैं।

तकनीकी अज्ञानता नहीं, "डर" बनता है हथियार

  • साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक डिजिटल अरेस्ट जैसी घटनाओं की मुख्य वजह तकनीकी अज्ञानता नहीं, बल्कि कानून की सही जानकारी न होना और मन में बैठा "डर" है। साइबर अपराधी बेहद शातिर तरीके से खुद को सीबीआइ, ईडी, पुलिस, कस्टम विभाग या ट्राई का अधिकारी बताते हैं।

  • वे पीड़ितों को डराते हैं कि उनके नाम से कोई "अवैध पार्सल" (जिसमें ड्रग्स या हथियार हैं) पकड़ा गया है, या फिर उनके सिम कार्ड का इस्तेमाल किसी मनी लांड्रिंग या गैरकानूनी गतिविधि में हुआ है। इसके बाद शुरू होता है "डिजिटल अरेस्ट" का खेल। स्काइप या वाट्सएप वीडियो काल के जरिए पीड़ित को कई दिन, महीनों तक अपने इशारे पर उनसे जीवनभर की कमाई लूट लेते हैं।
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    केस-1

    पड़ाव स्थित खेड़ापति कॉलोनी में रहने वाले 74 वर्षीय रिटायर्ड रजिस्ट्रार बिहारीलाल गुप्ता को 16 नवंबर से 3 जनवरी 2026 तक डिजिटल अरेस्ट किया। मनी लॉड्रिंग केस में फंसे होने की धमकी देकर 1.12 करोड़ रुपये की ठगी कर ली।

    केस-2

    धाटीपुर स्थित रामकृष्ण मिशन आश्रम के सचिव स्वामी सुप्रदिप्तानंद को मनी लॉड्रिंग में फंसे होने की धमकी देकर फंसाया था। 2.52 करोड़ रुपये की ठगी कर ली।