'बोले सो निहाल' के जयकारों से गूंजा ग्वालियर किला, अमृतसर की शबद चौकी ने की दुर्ग की परिक्रमा; शनिवार को सजेगा बड़ा दीवान
ऐतिहासिक दुर्ग से शहर की सड़कों तक गूंजते शबद और जयकारों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
Publish Date: Fri, 09 Oct 2026 07:13:02 PM (IST)Updated Date: Fri, 09 Oct 2026 07:13:40 PM (IST)
अमृतसर से आई नगर कीर्तन यात्रा ने सुबह किले की परिक्रमा लगाई। नईदुनियाHighLights
- अमृतसर से आई शबद चौकी ने की परिक्रमा
- सिख इतिहास का महत्वपूर्ण केंद्र है दाता बंदी छोड़
- शनिवार को उमड़ेगी संगत, सजेगा बड़ा दीवान
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। ग्वालियर दुर्ग पर शुक्रवार को ‘वाहे गुरु जी का खालसा, वाहे गुरु जी की फतेह’ और ‘बोले सो निहाल, सत श्री अकाल’ के जयकारे गूंज उठे। दाता बंदी छोड़ दिवस के तीन दिवसीय आयोजन के दूसरे दिन गुरुवार को अमृतसर से पैदल आई शबद चौकी यात्रा ने गुरुद्वारा दाता बंदी छोड़ में मत्था टेकने के बाद पहले दुर्ग के परकोटे की परिक्रमा की।
इसके बाद संगत उरवाई गेट से नगर कीर्तन के रूप में किले की बाहरी परिक्रमा पर निकली। ऐतिहासिक दुर्ग से शहर की सड़कों तक गूंजते शबद और जयकारों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
इन मार्गों से गुजरी यात्रा
शबद चौकी यात्रा ने दुर्ग के परकोटे की परिक्रमा पूरी करने के बाद उरवाई गेट से बाहरी परिक्रमा शुरू की। नगर कीर्तन कोटेश्वर, घासमंडी, किलागेट, सेवानगर, खेड़ापति कालोनी, मरीमाता और फूलबाग चौराहे से होते हुए फूलबाग गुरुद्वारे पहुंचा। यहां संगत ने कुछ समय विश्राम और जलपान किया। गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी ने अमृतसर से आई सिख संगत का अभिवादन कर सम्मान किया। इसके बाद यात्रा महल गेट, शिंदे की छावनी और रामदास घाटी होते हुए शब्द प्रताप आश्रम के रास्ते वापस दुर्ग स्थित गुरुद्वारे पहुंची।
गुरु हरगोबिंद साहिब की स्मृति से जुड़ा है गुरुद्वारा
ग्वालियर दुर्ग स्थित गुरुद्वारा दाता बंदी छोड़ सिख इतिहास का महत्वपूर्ण केंद्र है। सिख परंपरा के अनुसार, छठे गुरु श्रीगुरु हरगोबिंद साहिब को ग्वालियर दुर्ग में बंदी बनाकर रखा गया था। उनकी रिहाई के साथ 52 राजाओं की मुक्ति का प्रसंग जुड़ा है। इसी कारण गुरु साहिब को ‘दाता बंदी छोड़’ के नाम से स्मरण किया जाता है। यह प्रसंग स्वतंत्रता, मानवता और परोपकार का संदेश देता है।
दाता बंदी छोड़ दिवस पर देशभर से श्रद्धालु गुरुद्वारे में मत्था टेकने पहुंचते हैं। अमृतसर से आने वाली शबद चौकी यात्रा और दुर्ग की परिक्रमा इस आयोजन की प्रमुख परंपराएं हैं। कथा वाचक ने संगत को गुरु हरगोबिंद साहिब के जीवन प्रसंगों और परिक्रमा के धार्मिक महत्व की जानकारी दी।
शनिवार को उमड़ेगी संगत, सजेगा बड़ा दीवान
आयोजन के अंतिम दिन शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या पर अखंड पाठ के भोग के बाद गुरुद्वारे में बड़ा दीवान सजेगा। आयोजकों के अनुसार, एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। संगत के लिए गुरुद्वारे में लंगर की व्यवस्था की गई है, वहीं स्थानीय सिख संगत ने विभिन्न स्थानों पर प्रसाद वितरण के स्टाल लगाए हैं।
दाता बंदी छोड़ दिवस का आयोजन पद्मश्री बाबा सेवा सिंह और लक्खा सिंह के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। दुर्ग की परिक्रमा और नगर कीर्तन के माध्यम से संगत गुरु साहिब की स्मृति को नमन करने के साथ सेवा, समानता और मानवता के संदेश को आगे बढ़ा रही है।