नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। मध्य प्रदेश एक नवंबर 2026 को अपने गठन के 70 वर्ष पूरे कर रहा है। इन सात दशकों में ग्वालियर ने रियासतकालीन शहर से आधुनिक शैक्षणिक, न्यायिक, चिकित्सा और परिवहन केंद्र बनने तक का सफर तय किया है। एक नवंबर 1956 को मध्य प्रदेश के गठन के बाद राजधानी भोपाल बनी, लेकिन ग्वालियर में पहले से मौजूद प्रशासनिक ढांचे और महत्वपूर्ण संस्थानों की वजह से शहर का महत्व बना रहा।
वर्ष 1961 की जनगणना की जिला पुस्तिका में भी ग्वालियर में आबकारी आयुक्त, परिवहन आयुक्त, भू-अभिलेख एवं बंदोबस्त आयुक्त तथा महालेखाकार जैसे महत्वपूर्ण कार्यालयों का उल्लेख मिलता है।
न्यायिक पहचान को मिली स्थायी मजबूती
ग्वालियर की न्यायिक पहचान मध्य प्रदेश के गठन से भी पुरानी है। रियासतकाल और मध्य भारत के दौर में भी यहां उच्च न्यायालय का अस्तित्व रहा। एक नवंबर 1956 को मध्य प्रदेश के गठन के साथ ग्वालियर में हाईकोर्ट की अस्थायी खंडपीठ स्थापित हुई। इसके बाद 28 नवंबर 1968 को राष्ट्रपति की अधिसूचना से इसे स्थायी खंडपीठ का दर्जा मिला। शहर के सिटी सेंटर में नए हाईकोर्ट भवन की आधारशिला 12 फरवरी 1994 को रखी गई। लगभग 12.2 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति से बने इस भवन का उद्घाटन नौ जनवरी 1999 को हुआ। दस कोर्ट रूम वाले इस भवन ने न्यायिक कामकाज के लिए आधुनिक आधारभूत ढांचा उपलब्ध कराया।
1964 में विश्वविद्यालय की स्थापना से बढ़े शैक्षणिक अवसर
उच्च शिक्षा के विस्तार में जीवाजी विश्वविद्यालय की स्थापना महत्वपूर्ण पड़ाव रही। विश्वविद्यालय की स्थापना 23 मई 1964 को मध्य प्रदेश सरकार के अध्यादेश के माध्यम से हुई। तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने 11 दिसंबर 1964 को इसके परिसर की आधारशिला रखी।
विश्वविद्यालय के लिए नौलखा परेड मैदान क्षेत्र में 225 एकड़ से अधिक भूमि का उल्लेख आधिकारिक विवरण में मिलता है। शुरुआत में इसका शैक्षणिक क्षेत्राधिकार ग्वालियर-चंबल अंचल के छह जिलों तक फैला था।
इसके पहले अगस्त 1957 में लक्ष्मीबाई कॉलेज ऑफ फिजिकल एजुकेशन की स्थापना हुई, जो आगे चलकर लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान बना। वर्ष 1973 में इसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में नया स्वरूप मिला और 21 सितंबर 1995 को डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त हुआ। इससे ग्वालियर को शारीरिक शिक्षा, खेल प्रशिक्षण और शोध के क्षेत्र में राष्ट्रीय पहचान मिली।
चिकित्सा सेवाओं में अंचल का प्रमुख केंद्र
जयारोग्य अस्पताल समूह लंबे समय से ग्वालियर-चंबल क्षेत्र की चिकित्सा जरूरतों का प्रमुख केंद्र रहा है। सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और कैंसर उपचार सहित विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार से गंभीर बीमारियों के इलाज के विकल्प बढ़े हैं। सरकारी चिकित्सा संस्थानों के साथ निजी अस्पतालों और जांच केंद्रों की बढ़ती संख्या ने भी शहर की स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा विस्तृत किया। हालांकि, मरीजों की बढ़ती संख्या, चिकित्सकों की उपलब्धता और ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ सेवाएं पहुंचाना अब भी बड़ी चुनौती है।
2024 में नए एयरपोर्ट टर्मिनल से हवाई संपर्क को गति
परिवहन के क्षेत्र में ग्वालियर की भौगोलिक स्थिति हमेशा महत्वपूर्ण रही है। रेल नेटवर्क के जरिए शहर देश के अनेक प्रमुख शहरों से जुड़ा है, जबकि राष्ट्रीय राजमार्गों ने दिल्ली, आगरा, झांसी और आसपास के जिलों तक सड़क संपर्क मजबूत किया है। हवाई संपर्क के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण बदलाव आया। ग्वालियर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन और नए एप्रन का निर्माण 426.22 करोड़ रुपये की लागत से किया गया। आठ अगस्त 2024 को नए टर्मिनल ने परिचालन शुरू किया। इससे यात्रियों के लिए आधुनिक हवाई अड्डा सुविधाओं का विस्तार हुआ।
विकास के साथ बढ़ीं शहरी चुनौतियां
सात दशकों में ग्वालियर का विस्तार पुराने लश्कर और महाराज बाड़ा क्षेत्र से आगे बढ़कर सिटी सेंटर, विश्वविद्यालय क्षेत्र और नई आवासीय कॉलोनियों तक हुआ। औद्योगिक विकास में मालनपुर जैसे आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। शहर में फ्लाईओवर, रेलवे ओवरब्रिज, पेयजल, सीवरेज और सड़क सुधार की परियोजनाओं ने बुनियादी सुविधाओं को विस्तार दिया है।
हालांकि, विकास की इस यात्रा में यातायात जाम, पार्किंग, प्रदूषण, जल निकासी और पर्याप्त रोजगार के अवसरों की चुनौती बनी हुई है। अब जरूरत इस बात की है कि ऐतिहासिक और संस्थागत उपलब्धियों को बेहतर नागरिक सुविधाओं, निवेश और रोजगार में बदला जाए। तभी ग्वालियर अगले दशक में अंचल के साथ प्रदेश के अग्रणी शहरों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकेगा।
भिंड: उद्योग और कनेक्टिविटी का विस्तार
मालनपुर में गोदरेज, मोंडलेज और अन्य कंपनियों की स्थापना से औद्योगिक विकास को गति मिली। भिंड-इटावा रेल सेवा, चंबल पर पुलों और नदी क्षेत्रों में सड़क संपर्क के विस्तार से आवागमन आसान हुआ। गौरी सरोवर का सौंदर्यीकरण और वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियां भी नई पहचान बनीं।
दतिया: शिक्षा और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा
मेडिकल कॉलेज, पॉलीटेक्निक और पशु चिकित्सा व फिशरीज कॉलेज की स्थापना से शिक्षा के अवसर बढ़े। राजघाट परियोजना से सिंचाई सुविधाओं का विस्तार हुआ। एयरपोर्ट, सीवर प्रोजेक्ट, अमृत जल योजना और पीतांबरा पीठ क्षेत्र के विकास ने शहर की सुविधाएं बढ़ाईं।
शिवपुरी: हाईवे और जल परियोजनाओं से विकास
आगरा-मुंबई और झांसी-कोटा मार्गों के विकास से कनेक्टिविटी मजबूत हुई। मड़िखेड़ा और मोहिनी सागर बांध सहित जल संरचनाओं से पेयजल और सिंचाई को सहारा मिला। औद्योगिक व प्रस्तावित ऊर्जा परियोजनाओं से रोजगार की संभावनाएं बढ़ी हैं।
मुरैना: रेल, उद्योग और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार
ब्राडगेज रेल नेटवर्क और चंबल पर पुलों से आवागमन आसान हुआ। जिला अस्पताल की क्षमता 300 से बढ़ाकर 600 बिस्तर की गई। बानमोर सहित औद्योगिक क्षेत्रों में गतिविधियां बढ़ीं। चंबल वाटर प्रोजेक्ट और नए शैक्षणिक संस्थान विकास की नई संभावनाएं लेकर आए हैं।