
- पत्नी की अपील पर हाई कोर्ट ने दिया फैसला
ग्वालियर. नईदुनिया प्रतिनिधि। हाई कोर्ट की युगल पीठ ने कुटुंब न्यायालय भिंड के आदेश को खारिज करते हुए पत्नी के तलाक को मान्य कर दिया। कोर्ट ने कहा कि 10 साल से पति-पत्नी अलग-अलग रह रहे हैं। उनके बीच न तो प्रेम है और न ही कोई स्नेह बचा है। न ही कोई ऐसा कारण दिख रहा है कि जिससे उनका विवाह पुनर्जीवित हो सकता हो। ऐसी परिस्थिति में उनके बीच विवाह को शून्य घोषित किया जाता है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पति-पत्नी के बीच उत्पन्न परिस्थितियों को देखते हुए यह आदेश दिया जाता है। हांलाकि पत्नी ने स्थायी भरण पोषण राशि की मांग नहीं की। इसके चलते कोर्ट ने भरण पोषण राशि का आदेश नहीं दिया। यह अपील पत्नी ने कुटुंब न्यायालय के निर्णय के खिलाफ प्रस्तुत की थी। जिसमें फेमिली कोर्ट ने उनके तलाके के लिए प्रस्तुत किए गए आवेदन को खारिज कर दिया था।
अपीलार्थी का विवाह 22 नवंबर 2008 को हुआ था। दो साल बाद ही दोनों अलग-अलग रहने लगे। दोनों के अधिवक्ताओं का कहना था कि इस मामले में सुलह की संभावनाएं नहीं हैं। वहीं अपीलार्थी के अधिवक्ता का कहना था कि पति के शत्रुतापूर्ण और खराब व्यवहार के चलते उसने तलाक लेने का निर्णय लिया है। उनका यह भी कहना था कि उसकी गर्भावस्था के दौरान न केवल पति ने बल्कि परिवार के सदस्यों ने उसके साथ गलत व्यवहार किया था। इस कारण से उसे मानसिक पीड़ा हुई। अपीलार्थी के अधिवक्ता का कहना था कि जब अपीलार्थी पहली बार गर्भवती हुई थी तब उसके पति ने उसका गर्भपात करा दिया था। दूसरी बार उसने एक बच्चे को जन्म दिया, लेकिन दो माह बाद ही उसका निधन हो गया। इतना ही नहीं उसके माता-पिता से दहेज भी मांगा जाता रहा है। अपीलार्थी ने कहा कि उसके पति ने दूसरा विवाह भी कर लिया है, इसके फोटोग्राफ भी प्रस्तुत किए गए। कोर्ट ने दूसरे विवाह के फोटो रिकार्ड पर लेते हुए कहा कि सुलह की संभावना नहीं दिख रही है। इसके बाद कोर्ट ने तलाक को मान्य कर दिया। पत्नी की अपील 2015 से हाई कोर्ट में लंबित थी।