"चौराहों पर तैनात पुलिस को ओवरलोड वाहन क्यों नहीं दिखते?" स्कूली वाहनों पर ग्वालियर हाई कोर्ट की फटकार
हाई कोर्ट ने इन रिपोर्टों को भी अगली सुनवाई तक प्रस्तुत कराने के निर्देश दिए हैं।
Publish Date: Thu, 05 Nov 2026 08:58:07 AM (IST)Updated Date: Thu, 05 Nov 2026 08:58:33 AM (IST)
HighLights
- बच्चों को भूसे की तरह भरने पर कोर्ट नाराज
- 2019 के बाद कार्रवाई न होने पर उठाए सवाल
- 14 दिसंबर को RTO और SP को दोबारा होना होगा पेश
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। स्कूली बच्चों को क्षमता से अधिक संख्या में बैठाकर ले जाने वाले ऑटो रिक्शा के मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने बुधवार को पुलिस और परिवहन विभाग के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई।
न्यायमूर्ति अमित सेठ की पीठ ने अधिकारियों से सवाल किया कि जब हम और आप सभी के बच्चे स्कूल जाते हैं तो क्या आपको दिखाई नहीं देता कि बच्चों को भूसे की तरह वाहनों में भरकर ले जाया जाता है। हर चौराहे पर पुलिस मौजूद रहती है, फिर पुलिस को ओवरलोड स्कूली वाहन नजर क्यों नहीं आते?
व्यवस्था को और सख्त बनाने के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया
अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी विक्रमजीत सिंह कंग और ग्वालियर के प्रभारी पुलिस अधीक्षक श्रुतकीर्ति सोमवंशी न्यायालय में उपस्थित हुए। अधिकारियों की ओर से बताया गया कि ओवरलोडिंग रोकने और नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। व्यवस्था को और सख्त बनाने के लिए अतिरिक्त समय भी मांगा गया। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने अधिकारियों से कहा कि अनुपालन रिपोर्ट तो कागजों में अच्छी तरह तैयार कर दी जाती है, लेकिन हाई कोर्ट के आदेश का असर धरातल पर भी दिखाई देना चाहिए, जो नजर नहीं आ रहा है।
2019 के बाद कार्रवाई नहीं होने पर उठाए सवाल
याचिकाकर्ता अवधेश सिंह भदौरिया ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित होकर अधिकारियों की स्थिति रिपोर्ट पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि 14 अक्टूबर 2026 को हाई कोर्ट का आदेश आने के बाद ही अधिकारी सक्रिय हुए हैं। इस पर कोर्ट ने रिकार्ड का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2019 के बाद कोई कार्रवाई नहीं की गई।
यह न्यायालय की अवमानना का मामला है। हाई कोर्ट ने निर्देश दिए कि आगामी 14 दिसंबर को अगली सुनवाई के दौरान ओवरलोड आटो रोकने के लिए तैयार कार्ययोजना प्रस्तुत की जाए। साथ ही वर्ष 2019 से अब तक की गई कार्रवाई के दस्तावेज और शपथ पत्र भी पेश किए जाएं।
न्यायालय ने यह भी पाया कि वर्ष 2012 में पारित आदेश के पालन में इस खंडपीठ के क्षेत्राधिकार वाले जिलों के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेटों से रिपोर्ट मांगी गई थी, लेकिन वे रिकार्ड पर उपलब्ध नहीं हैं। कोर्ट ने इन रिपोर्टों को भी अगली सुनवाई तक प्रस्तुत कराने के निर्देश दिए हैं।