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ग्वालियर की हाई-प्रोफाइल साइबर ठगी का मामला: 21 करोड़ से ज्यादा की चपत, अब तक आठ गिरफ्तारी; अपराधियों से रिकवरी हुई 'शून्य'

क्रिप्टो करेंसी में निवेश का झांसा देकर ग्वालियर निवासी चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक विजयवर्गीय से 21.05 करोड़ रुपये हड़पने वाले आठ आरोपियों को पुलिस गिरफ्...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Nitin Kumar
Publish Date: Tue, 22 Sep 2026 10:36:28 AM (IST)Updated Date: Tue, 22 Sep 2026 10:36:28 AM (IST)
ग्वालियर की हाई-प्रोफाइल साइबर ठगी का मामला: 21 करोड़ से ज्यादा की चपत, अब तक आठ गिरफ्तारी; अपराधियों से रिकवरी हुई 'शून्य'
हाई-प्रोफाइल साइबर अपराध का मामला, प्रतीकात्मक तस्वीर

HighLights

  1. हाई-प्रोफाइल मामले में आठ आरोपी गिरफ्तार
  2. ग्वालियर के CA को लगी 21 करोड़ की चपत
  3. गिरफ्तार अपराधियों से रिकवरी हुई 'शून्य'

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। राज्य की अब तक की सबसे बड़ी साइबर ठगी के मामले में पुलिस के हाथ तो कई आरोपियों तक पहुंच गए हैं, लेकिन आर्थिक तौर पर पीड़ित को राहत के नाम पर सिर्फ निराशा ही हाथ लगी है।

क्रिप्टो करेंसी में निवेश का झांसा देकर ग्वालियर निवासी चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक विजयवर्गीय से 21.05 करोड़ रुपये हड़पने वाले आठ आरोपियों को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है, मगर अपराधियों से ठगी गई रकम की रिकवरी शून्य बनी हुई है।

तीन राज्यों में दबिश, पर खाली हाथ पुलिस

राज्य साइबर पुलिस की टीम ने मामले की तहकीकात करते हुए मध्य प्रदेश सहित देश के तीन अलग-अलग राज्यों से कुल आठ आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया है। हालांकि, इस बड़ी कामयाबी के बावजूद गिरोह के खातों या नेटवर्क से नकद या अन्य माध्यमों से एक भी रुपये की जब्ती नहीं हो सकी है।


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सिर्फ फ्रीज हुई रकम से मिली आंशिक राहत

जांच के दौरान राज्य साइबर पुलिस की त्वरित कार्रवाई से करीब 4 करोड़ रुपये बैंक खातों में फ्रीज कराए जा सके थे। इसी फ्रीज की गई राशि में से कानूनी प्रक्रिया के बाद फरियादी के खाते में 25 लाख रुपये वापस आ सके हैं।

इसके अलावा पुलिस शातिर ठगों के पास से एक भी पैसा वसूलने में नाकाम रही है। करोड़ों रुपये की इस विशाल ठगी में क्रिप्टो करेंसी के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया था।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि साइबर अपराधी ठगी की रकम को तेजी से विभिन्न शेल कंपनियों और क्रिप्टो वॉलेट्स में ट्रांसफर कर देते हैं, जिससे रिकवरी बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाती है।

आरोपी तो जेल पहुँच गए हैं, लेकिन फरियादी की रकम का बड़ा हिस्सा अब भी साइबर अपराधियों की गिरफ्त में है।

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