विजय सिंह राठौर, ग्वालियर। नईदुनिया। पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता माधवराव सिंधिया की 30 सितंबर को 19वीं पुण्यतिथि है। सन् 2001 में हुए विमान हादसे में उनका निधन हुआ था। उन्होंने भले ही अपना राजनीतिक करियर जनसंघ से शुरू किया, लेकिन लंबा समय कांग्रेस में बिताया। माधवराव के निधन के बाद उनकी राजनीतिक विरासत उनके बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया ने संभाली।

वे करीब 19 साल तक कांग्रेस में रहे। केंद्र में मंत्री और संगठन के महत्वपूर्ण दायित्वों को संभाला, लेकिन अब वे भाजपा में आ गए हैं। ऐसे में इस साल जब वे पिता की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे तो क्या भाजपा भी आयोजन में शामिल होगी। बड़ी दुविधा कांगेस के सामने है। यदि वह माधवराव का पुण्यतिथि कार्यक्रम आयोजित नहीं करती तो असम्मान के आरोप लगेंगे। वहीं कार्यक्रम आयोजित करने पर ज्योतिरादित्य सिंधिया को बल मिलेगा।

जिला कांग्रेस हर साल माधवराव सिंधिया की पुण्यतिथि पर प्रभात फेरी निकालकर श्रद्धांजलि अर्पित करती आई है। इस साल इस कार्यक्रम को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र शर्मा का कहना है कि अभी 30 तारीख में बहुत दिन हैं। जहां तक आयोजन के स्वरूप का सवाल है तो यह हम बैठकर तय कर लेंगे । ऐसा माना जा रहा है कि कांग्रेस कार्यालय में ही माधवराव सिंधिया की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर इतिश्री कर लें।

वहीं भाजपा के जिलाध्यक्ष कमल माखीजानी का कहना है कि प्रदेश स्तर से कोई कार्यक्रम तय होगा तो जिला स्तर पर उसे मनाया जाएगा। फिलहाल वरिष्ठ नेतृत्व से कोई निर्देश नहीं मिले हैं।

यहां यह उल्लेखनीय है कि पिछले माह भाजपा के महासदस्यता अभियान में मंच पर माधवराव सिंधिया की तस्वीर भाजपा के पितृ पुस्र्ष पं दीनदयाल उपाध्याय, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पूर्व प्रधानमंत्री व भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी राजमाता विजयाराजे सिंधिया और कुशाभाऊ ठाकरे के समकक्ष रखी गई थी।

कांग्रेस के निशाने पर सिंधिया राजवंश, लक्ष्मीबाई के प्रति बढ़ी श्रद्धा

प्रदेश की कमल नाथ सरकार को गिराकर जब से ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भाजपा का दामन थामा है, तब से कांग्रेस उन पर ही नहीं पूरे सिंधिया राजवंश पर हमलावर है। अपने बयानों में कांग्रेस सिंधिया को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में ही नहीं बल्कि ऐतिहासिक संदर्भों में भी गद्दार बता रही है। इसका उदाहरण कांग्रेस के पिछले आयोजनों में मिलता है।

22 अगस्त को कांग्रेस ने सिंधिया के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था, तो अगले दिन पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह रानी लक्ष्मीबाई की समाधि पर पहली बाहर आए थे। इसी तरह पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने 18 सितंबर को अपने रोड शो का समापन लक्ष्मीबाई की समाधि पर श्रद्धांजलि देकर किया था। यही वजह है कि माधव राव सिंधिया की पुण्यतिथि पर आयोजन को लेकर कांग्रेस का स्थानीय नेतृत्व दुविधा में है।

इनका कहना है

दिवंगतों के प्रति हमें सम्मान की भावना रखना चाहिए। माधवराव जी हमारे वरिष्ठ नेता रहे हैं। सिंधिया जी की पुण्यतिथि पर आयोजन स्थानीय नेतृत्व तय करेगा।

केके मिश्रा, प्रदेश प्रवक्ता कांग्रेस

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