
Gwalior News: ग्वालियर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। राजस्थान के बीकानेर के रहने वाले रणजीत सिंह यादव दिल्ली में शिक्षक और छात्रों के सम्मेलन में भाग लेकर दक्षिण एक्सप्रेस लौट रहे थे। ट्रेन के आगरा पहुंचते ही उनकी तबियत बिगड़ने लगी। उन्हें घबराहट होने लगी। पास में ही छात्रों की सीट थी। इन लोगों ने टीटीइ को ढूंढा लेकिन वह नहीं मिला। मुरैना में तबियत और अधिक बिगड़ गई। उनके सीने में दर्द हो रहा था। इस दौरान उनके साथ सफर कर रहे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के महामंत्री हिमांशु श्रोतिय, कार्यकर्ता साक्षी बौहरे, शुभ शर्मा ने एंबुलेंस को सूचना दी। ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर रणजीत सिंह यादव को लेकर छात्र नीचे उतरे। यहां कोई मदद के लिए नहीं आया। एंबुलेंस भी नहीं पहुंच पाई, इसके चलते छात्र बाहर की तरफ भागे। पोर्च में हाइकोर्ट जज संजीव एस कालगांवकर की कार खड़ी थी। ड्राइवर से छात्रों ने अस्पताल चलने को कहा, लेकिन वह नहीं माना। इस पर छात्रों ने उससे चाबी छीन ली। उसे धक्का देकर बाहर किया और खुद कार में रणजीत सिंह यादव को डालकर अस्पताल ले गए। यहां डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। फिर शव को पुलिस ने पोस्टमार्टम हाउस भिजवाया।
कुलपति को अस्पताल लेकर पहुंचे छात्रों के पीछे पुलिस भी पहुंच गई। इसके बाद हंगामा शुरू हुआ। यहां छात्रों ने चाबी और कार लौटाने से इनकार कर दिया। इन लोगों का कहना था- अगर एंबुलेंस समय पर आ जाती तो जान बच सकती थी। पहले छात्रों पर एफआइआर नहीं हो रही थी। बाद में जब चाबी और कार लौटाने को लेकर हंगामा किया तो जीआरपी के सिपाही राकेश सेंगर की ओर से शिकायत की गई। पुलिस अधिकारियों का कहना है- अगर यह लोग हंगामा न करते और कार लौटा देते तो एफआइआर दर्ज नहीं होती।
ट्रेन से सफर करने के दौरान किसी यात्री की तबियत बिगड़ने पर उसे तत्काल चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से रेलवे स्टेशन पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई एंबुलेंस पिछले पांच दिनों से स्टेशन पर नजर ही नहीं आ रही थी। ऐसा पहली बार नहीं है। पूर्व में कई बार ऐसी स्थिति बनने पर स्टेशन डायरेक्टर लालाराम सोलंकी ने एडीएम और सीएमएचओ को पत्र लिखकर इस स्थिति से अवगत कराया था। रविवार और सोमवार की दरमियानी रात भी यही स्थिति रही, जिसके चलते समय से एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने से दक्षिण एक्सप्रेस से दिल्ली से झांसी के बीच यात्रा कर रहे निजी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रणजीत सिंह को उनके साथ आए छात्र हाईकोर्ट जज की गाड़ी छीनकर इलाज के लिए ले गए।
जब भी ट्रेन में किसी यात्री की तबियत ज्यादा खराब होती है और रेलवे को सूचना मिलती है, तो उसे ट्रेन से उतारकर स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस से इलाज के लिए अस्पताल भेजा जाता है। यदि एंबुलेंस मौके पर खड़ी नहीं हो रही है, तो प्रशासनिक अधिकारियों से चर्चा कर यह सुनिश्चित कराया जाएगा कि एंबुलेंस वहां मौजूद रहे। -
मनोज कुमार सिंह, जनसंपर्क अधिकारी रेल मंडल झांसी।
यह मामला गंभीर है। एंबुलेंस नहीं पहुंची है, तो न पहुंचने के कारणों का पता लगाया जाएगा जिससे सख्त एक्शन लिया जा सके। वरिष्ठ अधिकारियों को भी मामले से अवगत कराया जाएगा।
- इंद्रपाल निवारिया, नोडल अधिकारी 108 एंबुलेंस।