ग्वालियर में 27 लाख के घोटाले में PWD के सब इंजीनियर को 5 साल की जेल, एक लाख का जुर्माना
कोर्ट ने आरोपी कारावास के साथ-साथ एक लाख दो हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
Publish Date: Tue, 03 Nov 2026 12:40:21 PM (IST)Updated Date: Tue, 03 Nov 2026 12:40:48 PM (IST)
HighLights
- फर्जी बिल और माप पुस्तिकाएं
- हाई कोर्ट और कोर्ट की टिप्पणी
- 1999-2000 का है मामला
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। जिला न्यायालय के विशेष न्यायाधीश साबिर अहमद खान ने भ्रष्टाचार के एक गंभीर मामले में कड़ा फैसला सुनाया है।
लोक निर्माण विभाग उपसंभाग डबरा के तत्कालीन उपयंत्री माधौ सिंह कुशवाह को शासन के साथ धोखाधड़ी करने, फर्जी माप पुस्तिकाएं तैयार करने और ठेकेदारों के साथ मिलकर लगभग 27 लाख रुपये का अवैध लाभ पहुंचाने के मामले में दोषी करार दिया गया है। अदालत ने आरोपी को विभिन्न धाराओं के तहत पांच साल तक के सश्रम कारावास और कुल एक लाख दो हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
यह पूरा मामला
वित्तीय वर्ष 1999-2000 का है, जब डबरा उपसंभाग में विभिन्न सड़कों (जैसे हरसी-भितरवार मार्ग, चितौली-रानीघाटी मार्ग, चीनौर-करैहिया मार्ग, मस्तूरा मार्ग आदि) के निर्माण, मुरम डालने, गड्ढों की भराई और विशेष मरम्मत के कार्य स्वीकृत हुए थे।
जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि उपयंत्री माधौ सिंह कुशवाह ने मैदानी स्तर पर बिना कोई कार्य कराए ही कागजों में फर्जी माप दर्ज कर दिए।
इसके आधार पर झूठे और फर्जी बिल तैयार किए गए और उन्हें आगे पास कर दिया गया, जिससे शासन को 27 लाख रुपये की भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ी और ठेकेदारों को अवैध भुगतान हुआ।
कोर्ट ने कहा- भ्रष्टाचार समाज के लिए गंभीर समस्या
विचारण के दौरान बचाव पक्ष की ओर से कई तर्क दिए गए और जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए, जिन्हें अदालत ने साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर खारिज कर दिया। न्यायालय ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि आधुनिक युग में लोक सेवकों द्वारा भ्रष्टाचार में संलिप्त होना एक गंभीर समस्या है, जिससे आम नागरिक प्रभावित होता है। ऐसे कृत्यों को हतोत्साहित करने और रोकने के लिए दोषियों को कड़ा दंड दिया जाना आवश्यक है।