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ग्वालियर के शिक्षानगर स्कूल में बना MP का पहला 'बाल गंगा प्रहरी कॉर्नर', विद्यार्थी समझेंगे गंगा-चंबल की जैव विविधता

Bal Ganga Prahari Gwalior: विद्यालय में स्थापित गंगा नॉलेज सेंटर को विद्यार्थियों के लिए आकर्षक और संवादात्मक बनाया गया है। यहां इंटरएक्टिव डिस्प्ले, ...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Rajdil Shivhare
Publish Date: Sun, 09 Aug 2026 03:24:58 PM (IST)Updated Date: Sun, 09 Aug 2026 03:25:44 PM (IST)
ग्वालियर के शिक्षानगर स्कूल में बना MP का पहला 'बाल गंगा प्रहरी कॉर्नर', विद्यार्थी समझेंगे गंगा-चंबल की जैव विविधता

HighLights

  1. देश का 41वां बाल गंगा प्रहरी कॉर्नर स्थापित
  2. इंटरएक्टिव डिस्प्ले से समझेंगे जलीय पारिस्थितिकी
  3. नदियों के पर्यावरण संरक्षण से जुड़ेंगे विद्यार्थी

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। गंगा और उसकी सहायक नदियों की जैव विविधता, जलीय पारिस्थितिकी और पर्यावरण संरक्षण के प्रति विद्यार्थियों में जागरूकता बढ़ाने की दिशा में ग्वालियर में महत्वपूर्ण पहल की गई है। शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, शिक्षानगर में मध्य प्रदेश का पहला और देश का 41वां बाल गंगा प्रहरी कॉर्नर स्थापित किया गया है। भारतीय वन्यजीव संस्थान और राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की टीम ने विद्यालय में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर इस कॉर्नर की शुरुआत की।

नदियों की दी गई जानकारी

विद्यालय के प्राचार्य एके दीक्षित और ईको क्लब प्रभारी सुरेंद्र यादव के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों को नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र और उनके संरक्षण की जरूरत के बारे में जानकारी दी गई। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल नदियों की स्वच्छता तक सीमित न रखते हुए उनकी जैव विविधता और जलीय जीवों के संरक्षण से जोड़ना रहा।


भारतीय वन्यजीव संस्थान की डॉक्टर रुचि बडोला के नेतृत्व और डॉक्टर संगीता अंगोम के मार्गदर्शन में टीम ने विद्यार्थियों के साथ संवादात्मक सत्र आयोजित किए। टीम में अश्मिका अग्रवाल, आरती चौहान, सिमरन अग्रवाल और अलंकृता शर्मा शामिल रहीं। विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को गंगा और चंबल नदी की समृद्ध जैव विविधता, मीठे पानी के पारिस्थितिकी तंत्र तथा जलीय जीवों के संरक्षण के महत्व की जानकारी दी।

इंटरएक्टिव डिस्प्ले से समझेंगे नदी का जीवन

विद्यालय में स्थापित गंगा नॉलेज सेंटर को विद्यार्थियों के लिए आकर्षक और संवादात्मक बनाया गया है। यहां इंटरएक्टिव डिस्प्ले, कटआउट्स और विभिन्न शैक्षणिक सामग्री के माध्यम से नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़ी जानकारी प्रदर्शित की गई है। विद्यार्थी इन माध्यमों से नदी में पाए जाने वाले जलीय जीवों, जैव विविधता और नदी के पर्यावरणीय महत्व को आसानी से समझ सकेंगे।

विशेषज्ञों ने बताया कि नदियां केवल पानी का स्रोत नहीं हैं, बल्कि उनके साथ पूरा पारिस्थितिकी तंत्र जुड़ा होता है। नदी की स्वच्छता, जलीय जीवों का संरक्षण और जैव विविधता का संतुलन एक-दूसरे से सीधे जुड़े हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को कम उम्र से ही नदी संरक्षण की गतिविधियों से जोड़ना भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है।

बाल गंगा प्रहरी कार्नर के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी स्थानीय नदियों, विशेषकर चंबल और उसकी जैव विविधता को समझने का अवसर मिलेगा। यह पहल उन्हें नदी संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनाने के साथ पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी के लिए भी प्रेरित करेगी।