
दीपक सविता, ग्वालियर। आंकड़े चौकानें वाले हैं लेकिन हैं सौ फीसदी सच । शहर की सड़कों से पकड़कर लाया गया गौवंश नगर निगम की लालटिपारा गौशाला में दम तोड़ रहा है। महज 113 दिन में 1475 सांड और गाय मर चुके हैं। यह हम नहीं कह रहे बल्कि गौशाला में गौवंश की आवक जावक के लिए संधारित किये जा रहे रजिस्टर के आंकड़े हैं।
पड़ताल की तो पता चला कि मरने वालों में सबसे अधिक तादाद शहर से पकड़कर लाए जा रहे नए सांड और गायों की है। अफसरों का दावा है कि गौशाला में गायों के खाने-पीने के लिए नगर निगम हर साल पांच करोड़ रुपए खर्च करती है। बावजूद इसके इतनी बड़ी संख्या में मर रहे गौवंश कहीं न कहीं गड़बड़ी की ओर इशारा करती है।
नगर निगम की लालटिपारा गौशाला में वर्तमान में 6000 की संख्या में गौवंश है। इनमें शहर से पकड़कर लाए गए 2800 सांड व 3200 गाय हैं। इनके साथ कई बछिया और बछड़े भी गौशाला में हैं। हालांकि गौवंश की मौत की वजह जानने के लिए डॉक्टरों ने पूर्व में कुछ सांड और गायों का पोस्टमार्टम किया था।
जिसमें उनके पेट से 4 से 5 किलो पॉलीथिन निकली थी जो इनकी मौत की वजह बनी। दवाईयों और इलाज के लिए पशु चिकित्सालय भी नगर निगम की लालटिपारा गौशाला में तत्कालीन संभागीय आयुक्त एसएन रूपला ने मेला ग्राउण्ड से शिफ्ट करा दिया था। लेकिन फिलहाल हर दिन हो रहीं दर्जनों मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा है।
पॉलीथीन के कारण आता है गैस का अटैक
पहले हम भी नहीं समझ पा रहे थे कि गौशाला में इतनी संख्या में गौवंश के मरने का कारण क्या है। इसका कारण जानने के लिए पशु चिकित्सक और नगर निगम के डॉक्टरों की एक कमेटी ने गाय का पोस्टमार्टम किया तो गायों के पेट से 4 से 5 किलो पॉलीथीन निकली थी । इस पॉलीथीन ने गाय के आंतों के अंदर एक सख्त बॉल का रूप ले लिया था जिसने गायों का हाजमा बिगाड़ा दिया साथ ही यह पॉलीथीन की बॉल आंतों के पास स्थित गैस की नली को जाम कर देती है जिसके कारण गाय गोबर नहीं कर पाती और ना ही उसकी गैस पास होती है। ऐसे में गैस के अटैक के कारण उसकी मौत हो जाती है।
डॉ. उपेन्द्र, पशु चिकित्सक. नगर निगम
यह है माहवार मौत का आंकड़ा
अगस्त 2017 - 25 से 31 तक 106
सितम्बर 2017 411
अक्टूबर 2017 345
नवम्बर 2017 394
दिसम्बर 1 से 15 तक 219
नगर निगम और गौशाला प्रबंधन का दावा
हर माह इतना मिलता है खाने को
गौशाला में गायों के लिए प्रतिमाह 3600 क्विंटल भूसा, लूसर 1200 क्विंटल और बाजरा और गेंहू का दलिया 1500 प्रतिमाह दिया जाता है।
माह में लगभग 20 दिन आते है गौसेवक
नगर निगम की लालटिपारा गौशाला में प्रतिमाह 20 परिवार गौसेवा के लिए आते हैं। यह लोग बीमार गायों को अपनी समृद्वि के अनुसार गौभोग लगाते हैं जिसमें हरी सब्जी, गुड़, दलिया, आदि गायों को खिलाया जाता है।
नहीं मिलता नकद दान
नगर निगम की लालटिपारा गौशाला को नकद दान नहीं मिल पाता है, हालांकि नकद दान के लिए नगर निगम ने पंजाब नेशनल बैंक में 0328000100409258 नम्बर से खाता खोला हुआ है। इस खाते में दानदाता अपनी रकम गौशाला को दान कर सकते है।
इनका कहना है
गायों की गौशाला में बेहतर देखभाल हो रही है, लेकिन पॉलीथीन को जब तक पूरी तरह से प्रतिबंधित नहीं किया जाएगा तब तक गायों को बचाना मुश्किल है। साथ ही हम संतजन आमजनों से हमेशा कहते हैं कि वह अपने घर में एक गाय जरूर पाले और उसका दूध जरूर पीये इससे वह स्वस्थ रहेगा और गौमाता की भी रक्षा हो सकेगी।
अच्छुतानंद महाराज, प्रबंधक गौशाला
गौशाला सहित सड़कों पर गायों की मौत से मन दुखी होता है। गौशाला में गायों के लिए बेहतर प्रबंधन किया गया है, साथ ही हम प्रयास कर रहे हैं कि शहर में पॉलीथीन पूरी तरह से प्रतिबंधित की जाए । इसके लिए हमने कपड़े के थैले बनवाने भी प्रारंभ कर दिए हैं।
विवेक शेजवलकर महापौर