हरसी नहर में पानी, फिर भी सूखी D-4 माइनर; डबरा के 10 गांवों में धान की फसल पर संकट
सिंचाई न होने के कारण धान के खेतों की जमीन अब चटकने लगी है, जिससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं।
Publish Date: Fri, 02 Oct 2026 06:12:32 PM (IST)Updated Date: Fri, 02 Oct 2026 06:12:59 PM (IST)
माइनर में जमी सिल्ट व गंदगी और पानी के अभाव में धान के खेतों में चटकती मिटटी। सौजन्यHighLights
- सिल्ट न हटने से मुख्य नहर का पानी माइनर में ठप
- 5 हजार हेक्टेयर में चटक रही जमीन, फसल पर मंडराया संकट
- अधिकारियों की अनदेखी पर आंदोलन की तैयारी में किसान
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। डबरा क्षेत्र के करीब 10 गांवों की धान की फसल पानी के अभाव में सूखने की कगार पर है। ऐसा नहीं है कि क्षेत्र की फसलों की सिंचाई के लिए हरसी नहर में पानी न छोड़ा गया हो, लेकिन इन दस गांवों में पानी देने वाली डी-4 माइनर में पानी नहीं आ रहा है। माइनर में पानी न आने की वजह सिल्ट का जमना है। जिसे सिंचाई विभाग को साफ कराना था। लेकिन विभाग के अफसरों ने लापराही बरती और सफाई नहीं कराई।
इस वजह से लहलहाती धान की फसल पानी के अभाव में सूखने की कगार पर पहुंच गई हैं। सिंचाई न होने के कारण धान के खेतों की जमीन अब चटकने लगी है, जिससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं।
सफाई न होने से सिल्ट बनी गले की फांस
कछौटा गांव के किसान मुकेश राजपूत ने बताया कि जल संसाधन और सिंचाई विभाग की उदासीनता इस तबाही की मुख्य वजह है। नियम अनुसार हर साल रबी और खरीफ सीजन से पहले माइनर नहरों की तली में जमी गाद यानि सिल्ट और झाड़ियों की सफाई कराई जाती है, ताकि जल प्रवाह सुचारू बना रहे।
लेकिन इस बार विभागीय अधिकारियों ने कागजों पर ही खानापूर्ति कर दी और जमीनी स्तर पर माइनर नहरों की सफाई नहीं कराई। परिणाम स्वरूप डी-4 माइनर नहर में भारी मात्रा में सिल्ट जमी होने के कारण मुख्य नहर का पानी माइनर में प्रवेश ही नहीं कर पा रहा है।
मुख्य नहर चालू होने के बावजूद माइनर सूखी पड़ी है और खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है।
पांच हजार हेक्टेयर फसल पर संकट, चटक रही जमीन
जल संकट का असर बेहद व्यापक है। जलभराव न होने के कारण करीब 5000 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि में खड़ी धान की फसल तेजी से पीली पड़कर सूख रही है। धान की खेती के लिए खेतों में पानी का भरा रहना बेहद आवश्यक होता है, लेकिन पानी न मिलने से अब खेतों की मिट्टी सूखकर दरक गई है और जमीन में बड़ी-बड़ी दरारें नजर आने लगी हैं। प्रभावित होने वाले मुख्य गांवों में एराया, जुझारपुर, बड़ेरा, कछौआ, पीपरीपुरा, पीतपुरा, पूरी, बड़की सराय सहित आसपास के कई अन्य क्षेत्र शामिल हैं।
किसानों में आक्रोश
क्षेत्रीय किसानों का कहना है कि उन्होंने कई बार सिंचाई विभाग के चक्कर काटे और अधिकारियों को माइनर की बदहाली से अवगत कराया, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। पीड़ित किसानों का कहना है कि डी-4 माइनर की त्वरित सफाई कराकर अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंचाया गया, तो वे आंदोलन कर सकते हैं।
नोट: इस संबंध में सिंचाई विभाग के अनुविभगाीय अधिकारी दीपक शर्मा से उनके फोन पर कई बार बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने काल रिसीव नहीं की।