ग्वालियर/जबलपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। हाथरस कांड में पीड़ित परिवार के घर दो दिन रहने वाली जबलपुर की डॉ. राजकुमारी बंसल का भीम आर्मी से जुड़ाव सामने आया है। ग्वालियर भीम आर्मी के पदाधिकारियों ने स्वीकारा कि डॉ. बंसल संगठन से जुड़ी हुई हैं। उनके फेसबुक पोस्ट पर भड़काऊ संदेशों से यह जाहिर है कि वे इस विचारधारा की समर्थक हैं। 3 अक्टूबर को डाले गए एक पोस्ट में तो उन्होंने यहां तक लिखा है कि अफसोस है कि हाथरस की बेटी हिंदू है, दफनाया गया होता तो पोस्टमार्टम हो पाता। यह पोस्ट 3 अक्टूबर का है। हाथरस कांड से विवादों में आने के बाद इनका पोस्ट भी चर्चा में आ गया है। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर डॉ. बंसल से लगातार संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन वह फोन और मैसेज का कोई जवाब नहीं दे रही हैं। डॉ. बंसल मूलतः ग्वालियर के पंचशील नगर की रहने वाली हैं। जनवरी 2020 में आखिरी बार वह ग्वालियर आई थीं।

डॉक्टर के फेसबुक अकाउंट से...

- 3 अक्टूबर शाम 6.29 बजे डॉ. राजकुमारी बंसल ने अपने फेसबुक अकाउंट से एक और पोस्ट किया है, जिसमें न्यूज चैनल की ब्रेकिंग न्यूज में यूपी के मुख्यमंत्री का बयान दिख रहा है, जिसमें वह कह रहे हैं कि ठाकुरों का खून गर्म है, ठाकुरों से गलतियां हो जाती हैं। इस पर डॉ. राजकुमारी बंसल ने लिखा- 'जाति का अहंकार अपनी जाति में ही सीमित रखो, वरना तुम्हारे गर्म खून पर हमारा सदियों का खौलता खून भारी पड़ जाएगा...।' जबकि पड़ताल के बाद पाया गया था कि उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का वह बयान फर्जी था।

- 9 अक्टूबर रात 9.40 बजे एक पोस्ट बसपा संस्थापक कांशीराम के परिनिर्वाण दिवस पर विनम्र श्रद्धांजलि पर की है। जिसमें कहा है कि 'आत्मनिर्भर बनिए आपकी आने वाली पीढ़ियां गुलामी की कगार पर आ चुकी हैं। अपने जिंदा होने का सबूत दीजिए। निकलो बाहर मकानों से, जंग लड़ो बेईमानों से।'

डॉ. राजकुमारी बंसल भीम आर्मी का सीधा कोई ताल्लुक नहीं है, लेकिन वे हमसे जुड़ी हुई हैं। हमारी बहन हैं। मैं व्यक्तिगत रूप से परिचित हूं। यदि प्रशासन या पुलिस कोई कार्रवाई करता हैं तो हम उनके साथ खड़े होंगे। - आजाद प्रीतम सिंह, जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष, भीम आर्मी, ग्वालियर

डिंडौरी में उपस्थिति दर्ज करवाने के बाद ड्यूटी से गायब रही डॉ. राजकुमारी

मेडिकल प्रशासन से विधिवत अनुमति लिए बगैर जबलपुर से हाथरस जाने वालीं डॉ. राजकुमारी बंसल के खिलाफ मध्य प्रदेश के डिंडौरी में भी कार्रवाई हो चुकी है। डॉ. राजकुमारी 2013 में डिंडौरी जिला अस्पताल में बतौर चिकित्सा पदाधिकारी पदस्थ हुई थीं। वहां वह छह सितंबर 2013 से ही वे बिना किसी सूचना व अनुमति के ड्यूटी से गायब रहीं। विभाग द्वारा कई बार पत्राचार के बावजूद जवाब नहीं देने पर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की गई थी। हालांकि वर्ष 2014 में डॉ. राजकुमारी ने त्यागपत्र दे दिया था।

डॉ. राजकुमारी ने जिला अस्पताल, जबलपुर में भी करीब चार माह सेवाएं दी थीं। उसके बाद फोरेंसिक मेडिसिन में स्नातकोत्तर की पढ़ाई के लिए उन्होंने मेडिकल कॉलेज, इंदौर में दाखिला ले लिया था। फिर एक निजी महाविद्यालय में नौकरी की और उसके बाद मेडिकल कॉलेज, जबलपुर के फार्मोकोलॉजी विभाग में डेमॉन्स्ट्रेटर पद पर सेवाएं शुरू कीं। यहां भी बगैर बताए हाथरस चली गईं। हालांकि मेडिकल डीन डॉ. प्रदीप कसार का कहना है कि इससे पहले उनके खिलाफ ऐसी शिकायत सामने नहीं आई है।

Posted By: Prashant Pandey

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