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दतिया से कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह को हाई कोर्ट का नोटिस, चुनाव शपथ-पत्र में आपराधिक मामले छिपाने का आरोप

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि जुलाई 2026 में हुए विधानसभा उपचुनाव के दौरान दाखिल शपथ पत्र में कुछ आपराधिक प्रकरणों का विवरण नहीं दिया गया।

By Vikram Singh TomarEdited By: Rajdil Shivhare
Publish Date: Fri, 16 Oct 2026 07:57:22 PM (IST)Updated Date: Fri, 16 Oct 2026 07:57:50 PM (IST)
दतिया से कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह को हाई कोर्ट का नोटिस, चुनाव शपथ-पत्र में आपराधिक मामले छिपाने का आरोप

HighLights

  1. उपचुनाव शपथ-पत्र पर उठे सवाल
  2. 1991 के आपराधिक मामले का उल्लेख
  3. 1 दिसंबर को होगी अगली सुनवाई

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। दतिया सीट से कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह के निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका पर शुक्रवार को हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में सुनवाई हुई। जस्टिस अमित सेठ की पीठ ने विधायक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि जुलाई 2026 में हुए विधानसभा उपचुनाव के दौरान दाखिल शपथ पत्र में कुछ आपराधिक प्रकरणों का विवरण नहीं दिया गया।

22 लोगों के नाम होने का दावा

भाजपा नेता एवं अधिवक्ता दीपक बेलपत्री ने निर्वाचन को चुनौती देते हुए याचिका प्रस्तुत की है। इसमें वर्ष 1991 के दो कथित आपराधिक मामलों का उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ता के अनुसार, तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद दतिया में हुए विरोध प्रदर्शन और चक्काजाम के दौरान प्राथमिकी दर्ज हुई थी। इसमें करीब 22 लोगों के नाम होने का दावा है, जिनमें घनश्याम सिंह का नाम भी शामिल बताया गया है। याचिका में कहा गया है कि प्रकरण में चालान पेश होने के बावजूद इसकी जानकारी उपचुनाव के शपथ-पत्र में नहीं दी गई।


बता दें कि विधायक के निर्वाचन को चुनौती देने वाला मामला पहले हाई कोर्ट की जबलपुर मुख्य पीठ में था, जिसे बाद में ग्वालियर खंडपीठ को स्थानांतरित कर दिया गया। अब यहां सुनवाई हो रही है। नोटिस पर विधायक की ओर से जवाब आने के बाद आगे की कार्रवाई होगी। अभी याचिका में लगाए गए आरोप साबित नहीं हुए हैं और निर्वाचन पर अंतिम फैसला होना बाकी है। मामले की सुनवाई अगली सुनवाई एक दिसंबर को होगी।

2020 के प्रकरण को लेकर भी सवाल

याचिका में वर्ष 2020 में दर्ज एक अन्य आपराधिक मामले का भी हवाला दिया गया है। आरोप है कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में दाखिल शपथ पत्र में इसका विवरण नहीं दिया गया था। दूसरी ओर उपचुनाव के दौरान विधायक ने दो लंबित आपराधिक मामलों की जानकारी दी थी। अब न्यायालय के समक्ष यह प्रश्न है कि जिन प्रकरणों का उल्लेख नहीं किए जाने का आरोप है, उनकी जानकारी देना नियमानुसार जरूरी था या नहीं।