
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने आइटीबीपी के दिवंगत उपनिरीक्षक गजाधर की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी और बेटे के बीच चल रहे पेंशन व ग्रेच्युटी विवाद में आदेश दिया है। न्यायमूर्ति मिलिंद रमेश फड़के ने पत्नी अनीता देवी को मृत्यु ग्रेच्युटी की 50 प्रतिशत राशि देने के आदेश को निरस्त करते हुए विभाग को मूल सेवा अभिलेख के आधार पर नामांकन की वैधता जांचने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने यह प्रक्रिया आठ सप्ताह में पूरी करने को कहा है।
गजाधर आइटीबीपी के दूरसंचार विभाग में उपनिरीक्षक के पद पर कार्यरत थे। 4 जुलाई 2021 को ड्यूटी ज्वाइन करने जाते समय सड़क दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई थी। उनकी पत्नी अनीता देवी ने ग्रेच्युटी, जीपीएफ, सीपीएफ और पारिवारिक पेंशन जारी करने की मांग की थी। रिकॉर्ड में अनीता देवी को नामांकित किया गया था।
इसी बीच गजाधर की पहली पत्नी से बेटे होने का दावा करने वाले मुकेश सिंह ने सेवानिवृत्ति लाभ में हिस्सा मांगा। विभाग ने 9.96-9.96 लाख रुपये की ग्रेच्युटी अनीता देवी और मुकेश सिंह को देने की अनुमति दी थी। इसे अनीता देवी ने हाई कोर्ट में चुनौती दी।
कोर्ट ने कहा कि वैध और प्रभावी नामांकन होने पर मृत्यु ग्रेच्युटी के भुगतान के लिए सीसीएस पेंशन नियमों के नियम 50, 51 और 53 का पालन जरूरी है। हालांकि केवल नामांकन से किसी व्यक्ति का अंतिम स्वामित्व तय नहीं होता।
पारिवारिक पेंशन के मामले में कोर्ट ने कहा कि इसका अधिकार नामांकन से नहीं, बल्कि नियम 54 में निर्धारित पात्रता से तय होता है। मुकेश सिंह की वैवाहिक स्थिति समेत उनकी पात्रता की जांच के निर्देश दिए गए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने पक्षकारों के अंतिम उत्तराधिकार अधिकार तय नहीं किए हैं। संबंधित व्यक्ति अपने अधिकार के लिए सक्षम मंच पर दावा कर सकते हैं।
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