चार किलोमीटर दूर स्कूल जाना पड़ा बच्चों को भारी, मप्र हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से दो दिन में मांगा जवाब
स्कूल शिफ्ट करने के फैसले से जुड़े सभी दस्तावेज पेश करने के निर्देश, पूछा-क्या आरटीई के प्रविधानों पर विचार किया गया?
Publish Date: Tue, 13 Oct 2026 03:40:23 PM (IST)Updated Date: Tue, 13 Oct 2026 04:07:11 PM (IST)
HighLights
- आरटीई के प्रावधानों पर सवाल
- सरकार से मांगे गए दस्तावेज
- 16 अक्टूबर को अगली सुनवाई
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। स्कूल दूर स्थानांतरित किए जाने के कारण चार किमी की दूरी तय कर पढ़ाई के लिए जाने वाले छोटे बच्चों के भविष्य को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने गंभीर रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की पीठ ने राज्य सरकार को अतिरिक्त जवाब दाखिल करने के लिए दो दिन का समय दिया है। साथ ही स्कूल को शिफ्ट करने से संबंधित सभी दस्तावेज न्यायालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
मामले की अगली सुनवाई 16 अक्टूबर को
न्यायालय ने सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि स्कूल स्थानांतरित करने का निर्णय लेते समय शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के प्रविधानों पर विचार किया गया था या नहीं। मामले की अगली सुनवाई 16 अक्टूबर को होगी। यह मामला रसल जाटव की ओर से दायर याचिका से संबंधित है। सोमवार को सुनवाई के दौरान शासन की ओर से अधिवक्ता ने बताया कि पहले अतिरिक्त जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा गया था, लेकिन प्रत्येक निर्णय के पीछे संबंधित दस्तावेज और नीतिगत आधार होने के कारण पूरा रिकार्ड न्यायालय के सामने रखने के लिए दो दिन का समय दिया जाए।
स्कूल शिफ्ट करने से संबंधित सभी रिकार्ड किए जाएं प्रस्तुत
न्यायालय ने बच्चों को पढ़ाई के लिए चार किमी तक की दूरी तय करनी पड़ने की स्थिति को ध्यान में रखते हुए सरकार को दो दिन का समय दिया। पीठ ने निर्देश दिया कि स्कूल शिफ्ट करने से संबंधित सभी रिकार्ड प्रस्तुत किए जाएं। साथ ही यह भी बताया जाए कि निर्णय लेते समय शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रविधानों पर ध्यान दिया गया था या नहीं।
गौरतलब है कि पिछली सुनवाई में भी हाई कोर्ट ने सरकार से प्राथमिक स्कूलों के जर्जर भवनों और उनकी मरम्मत नहीं कराने के संबंध में जवाब मांगा था। याचिकाकर्ता की ओर से अधिनियम के उन प्रविधानों का हवाला दिया गया था, जिनमें प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों के लिए एक किमी और कक्षा छठवीं से आठवीं तक के विद्यार्थियों के लिए तीन किमी की पैदल दूरी के भीतर स्कूल उपलब्ध कराने की व्यवस्था है।