प्रियंक शर्मा, नईदुनिया, ग्वालियर। मध्यप्रदेश में नेशनल हाईवे और एक्सप्रेस-वे की स्ट्रीट लाइटों की निगरानी अब पेट्रोलिंग वाहनों के भरोसे नहीं रहेगी। किसी हाईवे की लाइट खराब होते ही इसकी सूचना कंट्रोल रूम तक पहुंच जाएगी। इतना ही नहीं, लाइटों को रिमोट से बंद और चालू भी किया जा सकेगा।
नेशनल हाइवे अथारिटी ऑफ इंडिया (NHAI) प्रदेश में केंद्रीय नियंत्रण एवं निगरानी प्रणाली (CCMS) लागू करने जा रहा है। ग्वालियर, भोपाल, इंदौर, जबलपुर, छतरपुर, छिंदवाड़ा, हरदा, खंडवा, रीवा, रतलाम, सागर, उज्जैन और विदिशा सहित शहरों से गुजरने वाले नेशनल हाईवे में यह व्यवस्था लागू की जाएगी।
इसके लिए एनएचएआई के भोपाल स्थित रीजनल कार्यालय ने टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। चयनित एजेंसी को सिस्टम स्थापित करने के साथ पांच साल तक इसके रखरखाव की जिम्मेदारी भी दी जाएगी।
मैप पर दिखेगी बंद लाइट की लोकेशन
अभी हाईवे की स्ट्रीट लाइटें सूर्योदय और सूर्यास्त के आधार पर चालू-बंद होती हैं। लाइट खराब होने का पता अक्सर पेट्रोलिंग के दौरान चलता है। सीसीएमएस लागू होने के बाद हर लाइट की स्थिति रियल टाइम में कंट्रोल रूम से देखी जा सकेगी। प्रत्येक कॉरिडोर की लाइटों को कंट्रोल बॉक्स से जोड़ा जाएगा।
जैसे ही कोई लाइट बंद होगी, सिस्टम उसकी सूचना लोकेशन के साथ कंट्रोल रूम तक भेज देगा। मैप पर संबंधित लाइट की स्थिति दिखाई देगी। डेटा भेजने के लिए 5जी नेटवर्क का उपयोग किया जाएगा।
वोल्टेज से बिजली खपत तक की निगरानी
सिस्टम केवल लाइट खराब होने की सूचना ही नहीं देगा, बल्कि बिजली व्यवस्था पर भी नजर रखेगा। सीसीएमएस फीडर पैनल में थ्री-फेज ऊर्जा मीटर लगाया जाएगा। इससे वोल्टेज, करंट, पावर फैक्टर और बिजली की खपत का रिकॉर्ड रखा जा सकेगा।
बिजली सप्लाई बाधित होने, वोल्टेज या करंट में गड़बड़ी और फीडर ट्रिप होने जैसी तकनीकी समस्याओं का भी तत्काल पता चलेगा। यानी एक ही सिस्टम से लाइटिंग व्यवस्था और उसकी बिजली आपूर्ति दोनों की निगरानी होगी।
नेटवर्क गया तो भी लाइटें नहीं होंगी बंद
सीसीएमएस की सबसे अहम व्यवस्था यह होगी कि नेटवर्क या संचार व्यवस्था में खराबी आने पर भी स्ट्रीट लाइटों का संचालन जारी रहेगा। इसके लिए स्वतंत्र हार्डवेयर टाइमर का प्रविधान किया गया है। पावर फेलियर की स्थिति में रियल टाइम क्लाक और इवेंट लाग का बैकअप भी रहेगा।
एनएचएआई मुख्यालय से होगी निगरानी
सिस्टम को सुरक्षित माध्यम से एनएचएआई के केंद्रीय सर्वर से जोड़ा जाएगा। इससे मुख्यालय से प्रदेश के अलग-अलग हाईवे कॉरिडोर की लाइटों की निगरानी, रिपोर्टिंग और डेटा मैनेजमेंट किया जा सकेगा। सिस्टम में हैकिंग डिटेक्शन, सेल्फ-हीलिंग मैकेनिज्म और फेल-सेफ ऑपरेशन जैसी साइबर सिक्योरिटी व्यवस्थाएं भी रहेंगी।
स्ट्रीट लाइटिंग या संचार व्यवस्था में खराबी आने पर चयनित एजेंसी को अधिकतम 48 घंटे में सिस्टम बहाल करना होगा।
प्रदेश के हाईवे और एक्सप्रेस-वे की स्ट्रीट लाइटों को सीसीएमएस सिस्टम से जोड़ने की प्रक्रिया की जा रही है। इसके लिए टेंडर जारी किए गए हैं। सीसीएमएस से जुड़ने के बाद प्रत्येक स्ट्रीट लाइट की रियल टाइम निगरानी हो सकेगी।
- अजय कुमार स्वामी, जनरल मैनेजर, एनएचएआई भोपाल