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ग्वालियर में अवैध कालोनियों की रजिस्ट्री का 'खेल' जारी, सर्विस प्रोवाइडर ₹30,000 में खुलेआम कर रहे सौदे

ग्वालियर में अवैध कालोनियों की रजिस्ट्री पर प्रशासन की रोक बेअसर नजर आ रही है।

By Varun SharmaEdited By: Akash Sharma
Publish Date: Tue, 31 Mar 2026 08:08:28 AM (IST)Updated Date: Tue, 31 Mar 2026 08:08:28 AM (IST)
ग्वालियर में अवैध कालोनियों की रजिस्ट्री का 'खेल' जारी, सर्विस प्रोवाइडर ₹30,000 में खुलेआम कर रहे सौदे
ग्वालियर में अवैध कालोनियों में रजिस्ट्री पर प्रशासन की रोक बेअसर।

HighLights

  1. नईदुनिया की पड़ताल में सिंडीकेट का खुलासा हुआ
  2. अधिकारियों तक पैसा पहुंचने का दावा किया गया
  3. रोजाना 500 से ज्यादा रजिस्ट्री में अवैध भी शामिल

वरुण शर्मा, नईदुनिया ग्वालियर: शहर में अवैध कालोनियों की रजिस्ट्री पर जिला प्रशासन के सख्त निर्देशों का असर फिलहाल दिखाई नहीं दे रहा है। नईदुनिया की पड़ताल में यह सामने आया है कि सर्विस प्रोवाइडर खुलेआम अतिरिक्त रकम लेकर अवैध कालोनियों में रजिस्ट्री कराने को तैयार हैं। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि प्रशासन की रोक जमीनी स्तर पर प्रभावी नहीं हो पा रही है।

जांच में खुला खेल

नईदुनिया टीम ने ग्राहक बनकर शहर के विभिन्न सर्विस प्रोवाइडरों से संपर्क किया। जब पुरानी छावनी और बड़ागांव क्षेत्र की अवैध कालोनियों में रजिस्ट्री कराने की बात की गई, तो अधिकांश प्रोवाइडर बिना हिचक इसके लिए तैयार हो गए। इससे यह स्पष्ट हुआ कि अवैध रजिस्ट्री का काम संगठित तरीके से जारी है।


30 से 35 हजार रुपये की मांग

सर्विस प्रोवाइडर सलमान खान से हुई बातचीत में उसने साफ कहा कि कलेक्टर की रोक के चलते अब रजिस्ट्री के लिए 30 से 35 हजार रुपये अतिरिक्त लगते हैं। उसने यह भी दावा किया कि यह पैसा अधिकारियों तक पहुंचता है।

उसने कहा कि खसरा भेजने के बाद वह अगले ही दिन रजिस्ट्री करवा सकता है। इस बातचीत से यह संकेत मिलता है कि अवैध रजिस्ट्री का पूरा नेटवर्क सक्रिय है।

अन्य प्रोवाइडरों ने भी दिखाई सहमति

नईदुनिया टीम ने दो अन्य सर्विस प्रोवाइडरों से भी संपर्क किया। ‘अग्रवाल ई-रजिस्ट्री’ नाम से काम करने वाले प्रोवाइडर ने दस्तावेज भेजने को कहा और अंदर बात करने की बात कही। वहीं महेश नाम के प्रोवाइडर ने भी कागजात दिखाने की बात कहते हुए रजिस्ट्री कराने का भरोसा दिलाया।

हालांकि, उसने यह भी कहा कि 31 मार्च तक भीड़ और स्लॉट की समस्या है, इसलिए एक अप्रैल के बाद रजिस्ट्री करना बेहतर रहेगा।

सब रजिस्ट्रार का जवाब

सब रजिस्ट्रार केएन वर्मा से संपर्क करने पर उन्होंने कच्ची कालोनी की रजिस्ट्री पर रोक होने की बात कही, लेकिन साथ ही ऑफिस आने को भी कहा। उन्होंने स्पष्ट रूप से यह नहीं कहा कि रजिस्ट्री पूरी तरह संभव नहीं है, जिससे स्थिति पर और संदेह गहराता है।

प्रशासन के निर्देश बेअसर

जिला प्रशासन ने अवैध कालोनियों में रजिस्ट्री रोकने के लिए स्पष्ट निर्देश दिए थे कि यदि ऐसी रजिस्ट्री होती है तो जिला पंजीयक, उप पंजीयक और संबंधित सर्विस प्रोवाइडर जिम्मेदार होंगे। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर इन आदेशों का पालन होता नजर नहीं आ रहा है।

रोजाना सैकड़ों रजिस्ट्री

जानकारी के अनुसार, शहर में प्रतिदिन 500 से अधिक रजिस्ट्री हो रही हैं। इसी भीड़ का फायदा उठाकर अवैध कालोनियों की रजिस्ट्री भी धड़ल्ले से की जा रही है।

वित्तीय वर्ष के अंतिम दिनों में रजिस्ट्री की संख्या और बढ़ जाती है, जिससे इस तरह के मामलों को छिपाना आसान हो जाता है।

नई गाइडलाइन से पहले बढ़ी सक्रियता

एक अप्रैल से नई गाइडलाइन लागू होने जा रही है, जिसमें औसतन 20 प्रतिशत तक वृद्धि की संभावना है। इससे पहले अधिक से अधिक रजिस्ट्री कराने की होड़ लगी हुई है। यही कारण है कि अवैध कालोनियों में भी रजिस्ट्री का काम तेजी से किया जा रहा है।

अवैध कालोनियां जिनके सर्वे नंबर खसरे के कालम नंबर 12 में दर्ज हैं, उनकी रजिस्ट्री नहीं किए जाने के निर्देश सभी उप पंजीयकों सहित सर्विस प्रोवाइडरों को दिए गए हैं। इसके बाद भी सर्विस प्रोवाइडर इस तरह निर्देश के विपरीत काम करने की बात कह रहे तों कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

-अशोक शर्मा, जिला पंजीयक, ग्वालियर।