MP में वाहन ऑटो ट्रांसफर व्यवस्था पर बवाल: बिना जांच बदल रहा मालिकाना हक, अपराध में लिप्त गाड़ियों का भी हुआ अप्रूवल
ग्वालियर सहित अन्य जगह ऐसे मामले सामने आए हैं। एक मामला ऐसा भी कि अपराध में लिप्त वाहन का ऑटो ट्रांसफर कर दिया गया।
Publish Date: Thu, 01 Oct 2026 05:31:29 PM (IST)Updated Date: Thu, 01 Oct 2026 05:32:10 PM (IST)
HighLights
- बिना आरटीओ जांच के ट्रांसफर
- अपराध और बाहर ट्रांसफर की चूक
- एनआईसी और सरकार आमने-सामने
नईदुनिया प्रतिनिधि,ग्वालियर। वाहन पोर्टल पर वाहनों का ऑटो ट्रांसफर अप्रूवल शुरू होने के बाद वाहनों के कार्ड पर रजिस्टर्ड अथॉरिटी के रूप में संबंधित जिले के आरटीओ का पद लिखा आ रहा है। ऐसा तब हो रहा है जब वाहन के ऑटो ट्रांसफर अप्रूवल की फाइल आरटीओ के पास आ ही नहीं रही है। ऐसी स्थिति में सवाल यह कि जब आरटीओ अप्रूव ही नहीं कर रहे हैं तो अथॉरिटी वह कैसे हुए और वे जिम्मेदारी नहीं लेंगे। इसको लेकर जिलों के आरटीओ अधिकारियों के बीच असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।
ग्वालियर सहित अन्य जगह ऐसे मामले सामने आए हैं। एक मामला ऐसा भी कि अपराध में लिप्त वाहन का ऑटो ट्रांसफर कर दिया गया।
इस कारण मप्र सरकार ने किया है विरोध
बता दें कि वाहन- 4.0 पोर्टल पर बिना अधिकारियों की जांच के गाड़ी ट्रांसफर की व्यवस्था का मप्र सरकार ने विरोध किया है। परिवहन विभाग ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय और एनआईसी को पत्र लिखकर ऑटो अप्रूवल बंद कर पुरानी व्यवस्था बहाल करने को कहा है।
विभाग ने केंद्र को अतिरिक्त टैक्स वसूली की जानकारी भी भेजी जो कि वर्तमान व्यवस्था में संभव नहीं हो सकती है। इसके अलावा जिम्मेदारी एनआईसी की ही हो, इसको लेकर पुरजोर आवाज उठाई है। मोटर व्हीकल एक्ट में आरटीओ, एआरटीओ व डीटीओ को दस्तावेज जांचने का अधिकार है।
ऑटो अप्रूवल में यह जांच शामिल नहीं है। हादसे, पुलिस जांच व कोर्ट केस में वाहनों के प्रमाणित दस्तावेज मांगे जाते हैं यह बिना जांच सत्यापित करना मुश्किल है। परिवहन विभाग के के मुताबिक ऑटो अप्रूव से ट्रांसफर हुई गाड़ियों में लक्जरी वाहन भी शामिल हैं, जिनमें टैक्स लाखों रुपए तक हो सकता है।
प्रदेश में ऑटो ट्रांसफर होना है बाहर भी हो रहीं
ऑटो अप्रूवल व्यवस्था में प्रदेश की गाड़ी प्रदेश मे ही ट्रांसफर होंगी लेकिन अब यह भी उदाहरण आने लगे कि प्रदेश का वाहन बाहर आटो ट्रांसफर हो गया। ऐसा ही एक मामला ग्वालियर परिवहन कार्यालय में आया जिसमें दिनेश सिंह का दो पहिया वाहन एटा उप्र के लिए ट्रांसफर हो गया। इसमें रजिस्टर्ड अथॉरिटी ग्वालियर आरटीओ आ रहा है जबकि यह फाइल यहां आई ही नहीं।
एनआईसी स्तर पर चूक फिर जिम्मा किसका
इस पूरी प्रक्रिया मे यह तय नहीं किया गया है कि जिम्मेदारी किसकी होगी। एनआईसी के स्तर पर पूरी आटो ट्रांसफर की प्रक्रिया है तो जांच व वेरीफिकेशन का जिम्मा भी एनआईसी का ही होगा, ऐसा परिवहन विभाग के अधिकारियों की राय है। एनआईसी के सिस्टम में जांच व वेरीफिकेशन के क्या मापदंड हैं यह भी अभी तक सामने नहीं है। ऑटो अप्रूव की मंशा आधार ऑथेंटिकेशन से फेसलेस सेवा देकर वाहन मालिकों के आरटीओ के चक्कर और मैनुअल अप्रूवल कम करने की है। ट्रांसफर आसान और तेज होना था, लेकिन फिलहाल सामने आई परेशानियों के मामलों में फीस, दस्तावेज, टैक्स और वाहन वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही मालिकाना हक बदल गया।
वाहनों के आटो ट्रांसफर की व्यवस्था में अब आरटीाओ कार्यालय में फाइल नहीं आती है, आटो मोड में हो रहा है। कुछ वाहनों के मामले में समस्या आई है। - विक्रमजीत सिंह कंग, आरटीओ, ग्वालियर
एनआईसी के प्रभारी का नहीं उठा फोन
- इस मामले में नईदुनिया ने परिवहन मुख्यालय में स्थित एनआईसी के ग्वालियर प्रभारी नवीन पर्रिकर को मोबाइल पर संपर्क किया लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।