ग्वालियर में फर्जी दस्तावेज से बने 31 बांग्लादेशियों के पासपोर्ट निरस्त, 66 आरोपी फरार
जांच एजेंसियों के अनुसार, इनमें से अधिकांश आरोपी देश छोड़कर विदेश भाग चुके हैं।
Publish Date: Sat, 07 Nov 2026 08:07:34 AM (IST)Updated Date: Sat, 07 Nov 2026 08:10:44 AM (IST)
HighLights
- सिमरिया गांव और बौद्ध मठों के पते पर फर्जीवाड़ा
- मास्टरमाइंड रियाल चौधरी समेत 6 आरोपी गिरफ्तार
- नागपुर कनेक्शन की जांच, 66 फरार आरोपियों की तलाश
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। मध्य प्रदेश में फर्जी दस्तावेज के आधार पर भारतीय पासपोर्ट हासिल करने वाले बांग्लादेशी नागरिकों पर कार्रवाई तेज हो गई है। एसटीएफ की जांच रिपोर्ट के आधार पर पासपोर्ट विभाग ने 70 पासपोर्ट में से 31 निरस्त कर दिए हैं।
इनमें 17 पासपोर्ट ग्वालियर जिले के डबरा क्षेत्र के सिमरिया गांव के पते पर बनाए गए थे। शेष पासपोर्ट भी निरस्त करने की प्रक्रिया जारी है।
जांच में पाया अधिकांश आरोपी देश छोड़कर फरार
इस मामले में 66 आरोपियों के अब भी फरार होने की जानकारी सामने आई है। एसटीएफ की जांच में पता चला है कि आरोपियों ने नाम और पहचान बदलकर भारतीय नागरिक होने के फर्जी दस्तावेज तैयार किए और उनके आधार पर पासपोर्ट बनवाए। जांच एजेंसियों के अनुसार, इनमें से अधिकांश आरोपी देश छोड़कर विदेश भाग चुके हैं।
बौद्ध मठों के पते से बनवाए थे पासपोर्ट
इस नेटवर्क ने बांग्लादेशी नागरिकों के पासपोर्ट बौद्ध मठों के पते से बनवाए थे। मामले के मास्टरमाइंड रियाल चौधरी उर्फ मित्यानंद भिक्षु और उसके तीन बांग्लादेशी साथियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। स्थानीय स्तर पर मदद करने वाले गुलाबराय गौतम, गयाप्रसाद गौतम और भोपाल पासपोर्ट सेवा केंद्र के एजेंट नसीम अख्तर को भी गिरफ्तार किया गया है।
एसटीएफ के मुताबिक, पूछताछ में फरार आरोपियों के इंडोनेशिया, मलेशिया, म्यांमार और चीन जैसे देशों में छिपे होने की जानकारी मिली है।
नागपुर के फर्जी पासपोर्ट गिरोह से भी जुड़ीं कड़ियां
मध्य प्रदेश के अलावा महाराष्ट्र के नागपुर में भी फर्जी दस्तावेज के आधार पर पासपोर्ट बनवाने का मामला सामने आया था। एसटीएफ अब ग्वालियर-डबरा और नागपुर के मामलों के बीच संभावित संबंधों की जांच कर रही है।
बाकी पासपोर्ट भी निरस्त किए जाएंगे। निरस्त पासपोर्ट के इस्तेमाल पर इमिग्रेशन सिस्टम के जरिए संबंधित व्यक्ति की पहचान की जा सकेगी। नागपुर में सामने आए इसी तरह के मामले के आरोपियों और उनके काम करने के तरीके की जानकारी भी वहां की पुलिस से मांगी गई है। -राहुल लोढ़ा, डीआईजी, एसटीएफ