
विशेषज्ञों के अनुसार दैनिक उपयोग की कई वस्तुएं पेट्रोकेमिकल उत्पादों से बनती हैं। युद्ध के चलते इन कच्चे माल की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ गई है। इसका सीधा असर बाजार में मिलने वाली वस्तुओं की कीमतों पर पड़ रहा है।
ड्राइक्लीनिंग और कपड़ों की धुलाई में इस्तेमाल होने वाले केमिकल्स पेट्रोकेमिकल्स से तैयार होते हैं। एक ब्रांडेड लांड्री संचालक राहुल जैन के मुताबिक इन केमिकल्स की कीमतें दोगुनी से ज्यादा हो चुकी हैं। साथ ही ये आसानी से उपलब्ध भी नहीं हो रहे हैं।
उन्होंने बताया कि कपड़ों की पैकिंग में उपयोग होने वाली पॉलिथीन की कीमत भी तीन से चार गुना तक बढ़ गई है। बढ़ती लागत के कारण लांड्री सेवाओं के चार्ज में करीब 10 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करनी पड़ी है, हालांकि इसके बावजूद नुकसान की स्थिति बनी हुई है। आने वाले समय में दरें और बढ़ सकती हैं।
पानी की बोतलें प्लास्टिक के दानों से बनती हैं, जिनकी कीमतों में भारी उछाल आया है। पहले जो प्लास्टिक दाना 100 से 110 रुपये प्रति किलो बिकता था, वह अब 200 से 250 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है।
इस वजह से बोतल निर्माण लागत बढ़ गई है और बाजार में पानी की बोतलों के प्रिंट रेट में भी बढ़ोतरी हुई है। पहले जहां एक बोतल की कीमत 27 रुपये थी, वह अब 30 रुपये हो गई है।
हालांकि, फिलहाल ग्राहकों को पानी 20 रुपये प्रति लीटर ही मिल रहा है, क्योंकि दुकानदारों का मार्जिन कम हो गया है। चाय विक्रेता घनश्याम पाल का कहना है कि यदि कीमतें और बढ़ती हैं तो उन्हें भी दाम बढ़ाने पड़ेंगे।
बिस्किट, नमकीन, कुरकुरे जैसी कई खाद्य वस्तुएं पॉलिथीन पैकिंग में आती हैं। थाटीपुर के थोक व्यापारी सुनील गुप्ता के अनुसार अभी बाजार में जनवरी और फरवरी में बने उत्पाद ही आ रहे हैं, जिन पर पुरानी कीमतें लागू हैं।
लेकिन कंपनियों ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में इन उत्पादों की कीमतों में एक से पांच रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है। इसके अलावा खाद्य तेल, जो प्लास्टिक बोतलों और केन में पैक होता है, उसके दाम भी पांच से दस रुपये तक बढ़ गए हैं।
युद्ध का असर दवा उद्योग पर भी पड़ा है। दवाओं की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाली सामग्री भी पेट्रोलियम उत्पादों से बनती है। माधौगंज के दवा कारोबारी प्रतीक गुप्ता के मुताबिक नई पैकिंग में आने वाली दवाओं की कीमतों में दो से पांच प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी जा रही है।
कुल मिलाकर पेट्रोलियम उत्पादों की बढ़ती कीमतों ने दैनिक जीवन को महंगा बना दिया है। उत्पादन लागत बढ़ने और कच्चे माल की कमी के कारण बाजार में हर स्तर पर कीमतों में वृद्धि हो रही है, जिसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है।
पश्चिम एशिया के युद्ध का असर केवल एलपीजी पर नहीं है, बल्कि सभी उद्योग धंधों सहित खाने पीने वाली चीजों को प्रभावित किया है। आजकल सभी चीजें पैकिंग में आती है। पैकेजिंग सामग्री में पेट्रोकेमिकलों का उपयोग होता है या क्रूड से प्राप्त सामग्री से बनती हैं। युद्ध की वजह से ये वस्तुएं आ ही नहीं पा रही है। इससे इसका असर दैनिक उपयोग की चीजों पर पड़ेगा और ये महंगी हो सकती है।
-डॉ. प्रवीण अग्रवाल, अध्यक्ष, चैंबर आफ कामर्स।