ग्वालियर में फेयरप्ले-1 ऑनलाइन सट्टा गिरोह का भंडाफोड़, कमरे से चल रहा था कॉल सेंटर; 60 करोड़ का लेनदेन, 5 गिरफ्तार
गिरोह के सरगना उदय चौहान और संजय रावत अन्य लोगों के दस्तावेजों पर सिम जारी करवाकर और कमीशन पर बैंक खाते खरीदकर ठगी की रकम ट्रांसफर करवाते थे।
Publish Date: Fri, 02 Oct 2026 09:09:30 PM (IST)Updated Date: Fri, 02 Oct 2026 09:10:33 PM (IST)
आरोपियों से बरामद सामान। सौजन्य पुलिसHighLights
- दुबई, कंबोडिया और श्रीलंका से जुड़े थे सट्टेबाजी के तार
- शुरुआत में जीत का लालच देकर लाखों रुपये ऐंठता था गिरोह
- फर्जी सिम और म्यूल खातों से यूएसडीटी के जरिए विदेश भेजी रकम
नईदुनिया प्रतिनिधि,ग्वालियर। ग्वालियर पुलिस की साइबर क्राइम विंग और क्राइम ब्रांच की टीम ने शहर में चल रहे अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन बैटिंग और साइबर फ्रॉड के एक बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने गिरवाई क्षेत्र के सांवरिया धाम स्थित एक ठिकाने पर छापा मारकर पांच आरोपियों को पकड़ा है।
यह लोग फेयरप्ले-1 डाट काम वेबसाट के जरिए ऑनलाइन सट्टेबाजी और ठगी का नेटवर्क ऑपरेट कर रहे थे। एक कमरे में बैठकर हर दिन करीब 10 लाख रुपये की ठगी कर रहे थे। इनके पास से सालभर में करीब 60 करोड़ रुपये के लेनदेन का हिसाब मिला है।
दुबई, कंबोडिया और श्रीलंका से जुड़े तार
इस गिरोह के तार दुबई, कंबोडिया और श्रीलंका तक जुड़ गए हैं। वेबसाइट आपरेट यहीं से होती थी। इन्हें इसकी लिंक दी गई थी। इसके लिए ही ऑनलाइन बैटिंग होती थी। इसके जरिए लोगों को ठगा जाता था। लिंक वहीं से मिलती थी, फिर ठगी का पैसा अपना कमीशन निकालकर आगे विदेश ही भेज देते थे।
पहले जिताते थे, रकम बढ़ाते ही हराना शुरू
यह लोग ऑनलाइन बैटिंग कराते थे। अलग-अलग श्रेणी के ऑनलाइन गेम खिलाते थे। इसमें शुरुआत में पैसा जमा कर जो प्वाइंट मिलते थे, उसमें जिताते थे। पैसा भी लोगों के खाते में वापस भेज देते थे। जैसे ही लोगों को पैसा मिलता तो लालच बढ़ता था। इसके बाद रकम जैसे ही अधिक लगाई जाती थी तो हराना शुरू कर देते थे। पहले की रकम गंवाने के बाद लोग और पैसा लगाते थे। एक-एक व्यक्ति से लाखों रुपये की ठगी करते थे।
फर्जी सिम, मोबाइल का इस्तेमाल, सारा पैसा म्यूल खातों के जरिए सरगना तक पहुंचता था
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि यह लोग फर्जी सिम और किराए के (म्यूल) बैंक खातों के जरिए हर महीने लगभग पांच से छह करोड़ रुपये का लेनदेन करते था। इस हिसाब से सालभर में करीब 60 करोड़ का अवैध ट्रांजैक्शन किया जा रहा था। गिरोह के सरगना उदय चौहान और संजय रावत अन्य लोगों के दस्तावेजों पर सिम जारी करवाकर और कमीशन पर बैंक खाते खरीदकर ठगी की रकम ट्रांसफर करवाते थे। देशभर म्यूल खातों के नेटवर्क का इस्तेमाल होता था। उदय चौहान अपना कमीशन लेने के बाद म्यूल खातों के जरिए ही यूएसडीटी से क्रिप्टो ट्रेडिंग कर पैसा विदेश भेज देता था।
20 हजार सैलरी पर रखे गए बेरोजगार
पुलिस की गिरफ्त में आए राजा रायकवार (झांसी), नीलेश रावत (दतिया), पंकज पाल और रानू रावत (शिवपुरी को तनख्वाह पर रखा गया था। इन्होंने बताया कि उन्हें इस काम के लिए 20 हजार रुपये प्रति माह तनख्वाह दी जाती थी। आरोपित उदय चौहान करीब तीन महीने पहले अपनी पत्नी के साथ दिल्ली शिफ्ट हो गया था और वहीं से एटीएम के जरिए ठगी व सट्टे का पैसा निकालता था। पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार कर लिया है। दिल्ली जाने के बाद दूसरा मुख्य आरोपित संजय रावत ग्वालियर के इस कमरे पर आकर सारा काम देखता था, संजय अभी फरार है।
यह सामान बरामद
- डिजिटल डिवाइस: एक लैपटाप, 2 टैबलेट, 19 मोबाइल फोन
- बैंक दस्तावेज: 17 एटीएम कार्ड, चार पासबुक, नौ चेकबुक
- 38 फर्जी सिम कार्ड और हिसाब-किताब का रजिस्टर
वाट्सएप पर मिलती थी बैंक खातों की जानकारी
आरोपियों ने बताया कि वाट्सएप पर बैंक खातों की जानकारी मिलती थी। बैंक खाते दो से तीन दिन बाद बंद कर दिए जाते थे। कई राज्यों से यह बैंक खाते साइबर ठगी की वारदात में भी इस्तेमाल हुए हैं।
ऑनलाइन बैटिंग और साइबर फ्रॉड के अंतरराष्ट्रीय गिरोह का राजफाश हुआ है। विदेश तक इनका नेटवर्क फैला था। पांच आरोपी पकड़े गए हैं। अभी इनसे पूछताछ जारी है। - धर्मवीर सिंह, एसएसपी