नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। प्रकृति ने हमें हवा, पानी और भोजन के रूप में बहुत कुछ दिया है, लेकिन हमने कभी यह सोचने की जरूरत नहीं समझी कि बदले में उसे क्या लौटाया। अब प्रकृति से केवल लेने का नहीं, उसे लौटाने का भी समय है।
यह बात पद्मभूषण डॉक्टर अनिल प्रकाश जोशी ने शनिवार को आईटीएम विश्वविद्यालय में प्रकृतिपथ साइकिल यात्रा के 37वें दिन आयोजित स्वागत समारोह को संबोधित करते हुए कही।
पिछले 10 से 15 वर्षों में पर्यावरण में बड़े बदलाव देखने को मिले
उन्होंने कहा कि प्रकृति और मौसम का चक्र तेजी से बदल रहा है। पिछले 10 से 15 वर्षों में पर्यावरण में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। इसका असर मानव जीवन, स्वास्थ्य और प्राकृतिक संसाधनों पर पड़ रहा है। प्रकृतिपथ साइकिल यात्रा का उद्देश्य केवल दूरी तय करना नहीं, बल्कि समाज को प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। डा. जोशी ने कहा कि समुद्रों में 400 से अधिक मृत क्षेत्र बन चुके हैं। नदियां प्रदूषित हो रही हैं, हवा जहरीली होती जा रही है और देश के कई हिस्से जल संकट से जूझ रहे हैं।
रासायनिक उर्वरकों के बढ़ते इस्तेमाल का स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि धन के बल पर भी शुद्ध हवा, पानी और मिट्टी नहीं खरीदी जा सकती। इसलिए पर्यावरण संरक्षण मानव जीवन और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा सवाल है।
आने वाली पीढ़ियों के लिए कैसा पर्यावरण छोड़कर जा रहे हैं...
उन्होंने विद्यार्थियों और शिक्षकों से अपने ज्ञान, शोध और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का उपयोग प्रकृति के हित में करने का आह्वान किया। दीपावली का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हमें केवल घरों का अंधकार दूर करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह भी सोचना चाहिए कि आने वाली पीढ़ियों के लिए कैसा पर्यावरण छोड़कर जा रहे हैं। 72 वर्ष की उम्र में प्रतिदिन 70 से 80 किलोमीटर साइकिल चलाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने प्रकृति को प्रत्यक्ष ईश्वर बताया।
पूर्व विद्यार्थी भी विश्वविद्यालय की पहचान
कार्यक्रम में कुलपति प्रो. योगेश उपाध्याय ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल उसके स्वामी का नहीं, बल्कि उससे जुड़े प्रत्येक विद्यार्थी, शिक्षक और पूर्व विद्यार्थी का होता है। पूर्व विद्यार्थी संस्थान की महत्वपूर्ण पूंजी हैं। उनके अनुभव और विशेषज्ञता से विश्वविद्यालय के शैक्षणिक विकास तथा वर्तमान विद्यार्थियों के मार्गदर्शन में मदद मिल सकती है। उन्होंने पूर्व विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी के लिए पूर्व विद्यार्थी मंडल और विभिन्न समितियों के गठन का प्रस्ताव रखा। उन्होंने विश्वविद्यालय की बहुविषयक शिक्षा, शोध, नवाचार, आधुनिक प्रयोगशालाओं और हरित परिसर की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल उपाधि देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में सामाजिक जिम्मेदारी और रचनात्मकता विकसित करना भी है।
कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना और दीप प्रज्ज्वलन से हुई। डॉ. के जीवन और पर्यावरण संरक्षण के कार्यों पर आधारित वृत्तचित्र दिखाया गया। इस दौरान डीन एकेडमिक्स प्रो. डॉ. रंजीत सिंह तोमर, डीन स्टूडेंट वेलफेयर डॉ. तृप्ति पाठक, डीन स्कूल आफ साइंस डॉ. मनीष शर्मा सहित शिक्षक, विद्यार्थी और पूर्व विद्यार्थी मौजूद रहे। अंत में कुलपति ने डॉक्टर जोशी का अभिनंदन किया तथा कुलसचिव डॉक्टर ओमवीर सिंह ने स्मृति-चिह्न भेंट किया।
प्रकृति के संरक्षण में ही विश्व का भविष्य सुरक्षित है
पर्यावरण विद् और हरिकत कार्यकर्ता और हिमालाय पर्यावरण अध्ययन और संरक्षण संगठन हेस्कों के संस्थापक पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने प्रकृति पथ साइकिल यात्रा के नगर प्रवेश पर नईदुनिया से चर्चा करते हुए कहा कि प्रकृति के संरक्षण में ही विश्व का भविष्य सुरक्षित है। उनका मूल उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ प्रकृति के गोद में बसने वाले लोगों के लिए आर्थिक उन्नति के द्वार खोलने का है।