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जज ने थानाप्रभारी से पूछा, 'बिना जांच और कोर्ट की अनुमति के ED-CBI भी दर्ज नहीं करा सकती FIR, तो आपने कैसे दर्ज की'

जिला न्यायालय ग्वालियर में बुधवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम नंबर 108 अधिवक्ताओं से खचाखच भर गया। कई वकील बाहर खड़े होकर मामले को सुनते रहे। मामला थ...और पढ़ें

By Anil TomarEdited By: manoj dubey
Publish Date: Thu, 26 Mar 2026 11:40:37 AM (IST)Updated Date: Thu, 26 Mar 2026 01:08:37 PM (IST)
जज ने थानाप्रभारी से पूछा, 'बिना जांच और कोर्ट की अनुमति के ED-CBI भी दर्ज नहीं करा सकती FIR, तो आपने कैसे दर्ज की'
Photo credit: AI Image

HighLights

  1. आरोन के बन्हेरी गांव में अपराध के फर्जीवाड़ा का मामला
  2. कोर्ट में एसपी को पेश होने का जारी किया आदेश
  3. कानून की किताब रखकर पूछे तीन सवाल, नहीं मिला जवाब

नईदुनिया प्रतिनिधि,ग्वालियर। जिला न्यायालय ग्वालियर में बुधवार को एक मामला बेहद चर्चा में रहा, जहां सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम नंबर 108 अधिवक्ताओं से खचाखच भर गया। वहीं कई वकील बाहर खड़े होकर इस मामले को सुनते रहे। मामला था आरोन के बन्हेरी गांव में अपराध के फर्जीवाड़ा का।

इस मामले की सुनवाई के दौरान षष्टम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायधीश विवेक कुमार ने कड़ा रुख अपनाते हुए ग्वालियर पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह यादव को समन जारी कर सुबह 10 बजे कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए थे। हालांकि एसपी कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए, लेकिन निरीक्षक व अन्य पुलिसकर्मी जरूर पहुंचे।


...तो आपमें इतनी ताकत कहां से आई

जैसे ही पुलिसकर्मी कोर्ट पहुंचे, न्यायाधीश ने सख्त लहजे में सवाल किया, आपने बिना पूरी जांच किए और मजिस्ट्रेट की अनुमति लिए बिना फरियादियों पर एफआइआर कैसे दर्ज कर दी? ईडी और सीबीआई भी बिना जांच और अनुमति के एफआइआर दर्ज नहीं कर सकतीं तो आपमें इतनी ताकत कहां से आई।

गुरुवार सुबह 11 बजे कोर्ट में पेश हों एसपी

न्यायधीश ने यह भी पूछा कि क्या इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों से कोई लिखित अनुमति ली गई थी, लेकिन पुलिसकर्मी इस पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। जब कोर्ट ने निरीक्षक से एसपी की अनुपस्थिति का कारण पूछा तो बताया गया कि वे किसी काम से बाहर हैं।

इस पर न्यायालय ने निर्देश दिया कि यदि वे शाम चार बजे तक आ सकते हैं तो उपस्थित हों, अन्यथा लिखित सूचना दें और गुरुवार सुबह 11 बजे कोर्ट में पेश हों।

कानून की किताब रखकर पूछे तीन सवाल, जवाब नहीं दे पाए

सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने कानून की किताब सामने रखकर पुलिसकर्मियों से तीन अहम सवाल पूछे, जिनका जवाब वे नहीं दे सके।

यह है वो सवाल...

  • 1-क्या मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना किसी फरियादी को जेल भेजा जा सकता है? अगर ऐसा कोई कानून है तो बताइए।
  • 2-यदि मामला झूठा पाया गया, तो उसके खिलाफ क्या अलग से कोई कार्रवाई की गई?
  • 3-एफआइआर दर्ज करने से पहले क्या आपने एसपी से लिखित में अनुमति ली थी क्या?

कोर्ट में हाजिर नहीं हुए एसपी

न्यायालय द्वारा भेजे गए समन को एसपी के स्टेनो ने पहले लेने से इन्कार कर दिया, जिसके बाद समन लिखित रूप से भेजा गया। समन के अनुसार एसपी को सुबह 10 बजे उपस्थित होना था, लेकिन वे नहीं आए।

इसके बाद उन्हें दोपहर 2:30 बजे और फिर शाम चार बजे का समय दिया गया, लेकिन वे तब भी कोर्ट में पेश नहीं हुए। अब उन्हें गुरुवार सुबह 11 बजे उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।

यह भी पढ़ें- जज पर भरोसा नहीं, वकील की मांग पर ग्वालियर कोर्ट ने केस दूसरी अदालत में किया ट्रांसफर

ऐसे सभी मामलों की होगी जांच

न्यायालय ने निरीक्षक से स्पष्ट कहा कि ग्वालियर में इस तरह दर्ज हुए सभी मामलों की फाइलें खोली जाएंगी और उनकी जांच की जाएगी। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि ग्वालियर और तेजपुर को छोड़कर पूरे प्रदेश में ऐसे मामले सामने नहीं आए हैं।

बुधवार को जिला न्यायालय में एक मामले में ग्वालियर पुलिस अधीक्षक को हाजिर होना था, लेकिन किसी कारणवश वे नहीं आ पाए। अब उन्हें गुरुवार सुबह 11 बजे फिर से न्यायालय में बुलाया गया है।

-घनश्याम मंगल अपर लोक अभियोजक।