जेयू में ‘नो-व्हीकल जोन’ बना ‘नो-कंट्रोल जोन’: अफसरों के वाहन अंदर, गेट पर घंटों फंसे रहे छात्र, अव्यवस्था से बिगड़े हालात
राजमाता चौराहे की ओर स्थित प्रवेश द्वार पर खड़ा हुआ। यहां सड़क पर ही वाहन खड़े किए जाने से यातायात प्रभावित हुआ यानी परिसर के भीतर वाहनों को रोकने के ...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 05 Oct 2026 10:10:59 PM (IST)Updated Date: Mon, 05 Oct 2026 10:11:26 PM (IST)
वाहन निकासी के दौरान बिगड़ी व्यवस्था। नईदुनियाHighLights
- नियम केवल आम छात्रों के लिए
- गेट पर फंसे रहे वाहन
- मुखिया घूमे ई-रिक्शा में
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। जीवाजी विश्वविद्यालय में सोमवार को लागू किया गया नो-व्हीकल जोन व्यवस्था सुधारने के बजाय अव्यवस्था का कारण बन गया। परिसर में वाहनों की आवाजाही रोकने के लिए बनाए गए नियम का असर सबसे ज्यादा छात्रों और आम लोगों पर दिखाई दिया, जबकि प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों और प्राध्यापकों के वाहनों को प्रवेश दिए जाने के आरोपों ने पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। गोविंदपुरी की ओर स्थित गेट पर वाहनों के प्रवेश और निकासी को लेकर स्थिति बिगड़ गई। गेट पर वाहन रोके जाने और उन्हें निकालने को लेकर विवाद की स्थिति बनी रही। कई वाहन काफी देर तक फंसे रहे।
इससे छात्रों के साथ परिसर में आने-जाने वाले लोगों को भी परेशानी उठानी पड़ी। सवाल यह है कि जब नो-व्हीकल जोन लागू करने की तैयारी पहले से थी तो प्रवेश और निकासी की व्यवस्था के लिए ठोस योजना क्यों नहीं बनाई गई?
नियम आम लोगों के लिए, साहबों के लिए रास्ता खुला
सबसे बड़ा सवाल राजमाता चौराहे की ओर स्थित प्रवेश द्वार पर खड़ा हुआ। यहां सड़क पर ही वाहन खड़े किए जाने से यातायात प्रभावित हुआ यानी परिसर के भीतर वाहनों को रोकने के नाम पर बाहर सड़क पर ही अव्यवस्था खड़ी कर दी गई। इससे भी गंभीर आरोप यह है कि नो-व्हीकल जोन लागू होने के बावजूद विश्वविद्यालय प्रबंधन के अधिकारियों और प्राध्यापकों के वाहनों को परिसर में प्रवेश दिया गया।
सुरक्षाकर्मियों का दावा है कि कुछ लोग दबाव बनाकर वाहनों को अंदर ले जाते हैं। यदि यह बात सही है तो सवाल सिर्फ नियम टूटने का नहीं, बल्कि नियम लागू कराने वाली व्यवस्था की क्षमता का है।
मुखिया ई-रिक्शा में, नीचे व्यवस्था बेपटरी
इस पूरी व्यवस्था के बीच विश्वविद्यालय के मुखिया परिसर में ई-रिक्शा से घूमते नजर आए। इसका फोटो भी सामने आया है। यह तस्वीर अपने आप में नो-व्हीकल जोन की पूरी कहानी कहती नजर आती है। यदि विश्वविद्यालय के मुखिया स्वयं परिसर में बिना निजी वाहन के घूम सकते हैं तो यही व्यवस्था अधिकारियों, शिक्षकों और अन्य लोगों के लिए समान रूप से लागू क्यों नहीं हो सकी? नो-व्हीकल जोन लागू करना अपने आप में समस्या का समाधान नहीं है।
इसके लिए स्पष्ट प्रवेश व्यवस्था, पार्किंग स्थल, वैकल्पिक परिवहन और सभी के लिए समान नियम जरूरी हैं। सोमवार की स्थिति ने यही सवाल खड़ा किया कि जेयू में नियम तो बना दिया गया, लेकिन उसे लागू करने की तैयारी कितनी थी?