बिजली नेटवर्क विस्तार पर लगा ब्रेक: कच्चे माल और गैस संकट से विद्युत उपकरणों की किल्लत, एमपी ट्रांसको ने CEA को लिखा पत्र
इस विलंब से जहां एक ओर बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार में बाधा उत्पन्न हो रही है, वहीं परियोजनाओं का समय और लाग...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 12 Oct 2026 10:06:12 PM (IST)Updated Date: Mon, 12 Oct 2026 10:07:17 PM (IST)
ट्रांसमिशन लाइन में लगे उपकरण । नईदुनियाHighLights
- युद्ध के असर से आपूर्ति बाधित
- ट्रांसफार्मर के लिए 2 साल का इंतजार
- लागत और प्रोजेक्ट अवधि में भारी बढ़ोतरी
अनूप भार्गव, नईदुनिया, ग्वालियर। पश्चिम एशिया युद्ध का प्रभाव भले ही कम होता दिख रहा है, लेकिन गैस और कच्चे माल की आपूर्ति बाधित होने से विद्युत उपकरणों के निर्माण में बाधा उत्पन्न हो रही है। हालात यह हैं कि जिन बड़े पावर ट्रांसफार्मरों की आपूर्ति पहले आठ से 12 महीने में हो जाती थी, उनके लिए अब 18 से 24 महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है। कुछ विशेष इंसुलेटरों की डिलीवरी अवधि भी बढ़कर 18 से 20 महीने हो गई है।
इस विलंब से जहां एक ओर बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार में बाधा उत्पन्न हो रही है, वहीं परियोजनाओं का समय और लागत भी बढ़ रही है।
सालिड-कोर, डिस्क और हालो इंसुलेटर जैसे उपकरण 400 केवी, 220 केवी और 132 केवी के सबस्टेशनों सहित उच्च क्षमता वाले पारेषण नेटवर्क के लिए जरूरी हैं। लेकिन, उत्पादन प्रभावित होने से ट्रांसफार्मर और इंसुलेटर की उपलब्धता आवश्यकता के अनुरूप न होने से सबस्टेशनों के निर्माण, क्षमता विस्तार और नेटवर्क मजबूत करने के कार्य प्रभावित हो रहे हैं। केवल मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर में बिजली अवसंरचना के तेजी से विस्तार के कारण इस समय उपकरणों की मांग बढ़ी हुई है।
कच्चे माल और कलपुर्जों की कमी ने भी बढ़ाई मुश्किल
इंसुलेटर निर्माताओं को पोर्सिलेन के लिए जरूरी कच्चा माल जुटाने में भी कठिनाई हो रही है। वहीं, पावर ट्रांसफार्मर निर्माण में इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रिकल स्टील, तांबे के कंडक्टर, हाई-वोल्टेज बुशिंग, इंसुलेशन सामग्री और आन-लोड टैप चेंजर जैसे कलपुर्जों की उपलब्धता पर दबाव है। तांबा, एल्युमीनियम, इलेक्ट्रिकल स्टील और अन्य जरूरी सामग्रियों की बढ़ती कीमतों से उत्पादन लागत भी बढ़ी है।
एमपी ट्रांसको ने सीईए के सामने उठाया मामला
उपकरणों की सीमित उपलब्धता, बढ़ती कीमत और परियोजनाओं की लागत पर पड़ रहे असर को लेकर मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) को पत्र लिखा है। इसमें सालिड-कोर, डिस्क और हालो इंसुलेटरों की उपलब्धता तथा कीमतों से जुड़ी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है। उपकरणों की कमी के कारण परियोजनाओं के क्रियान्वयन में एक से डेढ़ साल तक की देरी हुई है। स्वीकृत परियोजना व्यय बढ़ने के बाद अतिरिक्त लागत की प्रतिपूर्ति का मुद्दा भी सामने आया है।
बिजली पारेषण से जुड़े अधिकांश उपकरणों का निर्माण देश में ही होता है। इसके बावजूद इनकी उपलब्धता पर दबाव बना हुआ है। इसकी प्रमुख वजह देशभर में बिजली अवसंरचना का तेजी से विस्तार होना है, जिससे उपकरणों की मांग और उत्पादन क्षमता के बीच अंतर बढ़ गया है। - सुनील तिवारी, प्रबंध निदेशक, एमपी ट्रांसको।
पश्चिम एशिया में युद्ध के चलते गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है। इससे उपकरणों के निर्माण और उपलब्धता पर असर पड़ा है। उपकरण समय पर नहीं मिलने के कारण प्रदेश में ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार से जुड़ी परियोजनाओं का काम भी प्रभावित हो रहा है। -शशिकांत ओझा, जनसंपर्क अधिकारी, एमपी ट्रांसको।