ग्वालियर JAH में 80 करोड़ की मशीनें पहुंचीं पर इलाज शुरू नहीं, डिब्बों में बंद लीनियर एक्सीलेटर और सीटी सिमुलेटर; मरीज परेशान
स्थिति यह है कि कैंसर के आधुनिक उपचार के लिए महत्वपूर्ण लीनियर एक्सीलेटर और सीटी सिमुलेटर मशीनें विभाग परिसर में पहुंचने के बाद भी पैक बंद रखी हैं और ...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 13 Sep 2026 06:57:52 PM (IST)Updated Date: Sun, 13 Sep 2026 06:58:32 PM (IST)
जेएएच के कैंसर विभाग में रखी मशीन । नईदुनियाHighLights
- डिब्बों में बंद पड़ी हैं 80 करोड़ की मशीनें
- डीन के निर्देश के बाद भी अटका काम
- इलाज के लिए बड़े शहरों की दौड़ मजबूर मरीज
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। जया आरोग्य अस्पताल (जेएएच) के कैंसर विभाग में अत्याधुनिक इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचने वाले मरीजों का इंतजार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। 80 करोड़ रुपये लागत की अत्याधुनिक मशीनें दो माह पहले ही अस्पताल पहुंच चुकी हैं, लेकिन मरीजों के लिए इनका उपयोग शुरू नहीं हो सका है। स्थिति यह है कि कैंसर के आधुनिक उपचार के लिए महत्वपूर्ण लीनियर एक्सीलेटर और सीटी सिमुलेटर मशीनें विभाग परिसर में पहुंचने के बाद भी पैक बंद रखी हैं और उनका इंस्टालेशन शुरू तक नहीं हुआ है।
ग्वालियर-चंबल संभाग के अलावा उत्तर प्रदेश और राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों से बड़ी संख्या में कैंसर मरीज इलाज के लिए जेएएच पहुंचते हैं। इन मरीजों को उम्मीद थी कि नई मशीनों के शुरू होने के बाद अत्याधुनिक जांच और रेडिएशन उपचार की सुविधा ग्वालियर में ही मिल सकेगी, लेकिन मशीनें पहुंचने के बावजूद सुविधा शुरू नहीं होने से उनका इंतजार लगातार लंबा होता जा रहा है।
मशीनें पहुंचीं, लेकिन सुविधा अब भी कागजों से बाहर नहीं
कैंसर विभाग में पैट सीटी, लीनियर एक्सीलेटर और सीटी सिमुलेटर सहित अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की जानी हैं। फिलहाल केवल पीपीपी माडल (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) के तहत पैट सीटी मशीन स्थापित की जा सकी है। दूसरी ओर कैंसर के रेडिएशन उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले लीनियर एक्सीलेटर और इलाज की सटीक योजना तैयार करने वाली सीटी सिमुलेटर मशीन का इंस्टालेशन अब तक शुरू नहीं हो पाया है। मशीनों को स्थापित करने की जिम्मेदारी निजी कंपनी की है लेकिन उसने काम बंद कर रखा है।
डीन के निर्देश के बाद भी नहीं बढ़ी रफ्तार
जीआरएमसी के डीन डॉ. आरकेएस धाकड़ कैंसर विभाग का निरीक्षण कर संबंधित अधिकारियों और एजेंसी को तय समय सीमा में काम पूरा करने के निर्देश दे चुके हैं। इसके बावजूद मशीनों के इंस्टालेशन की रफ्तार नहीं बढ़ सकी है। निरीक्षण और निर्देशों के बाद भी काम शुरू नहीं होना व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।
इलाज के लिए बड़े शहरों का रुख
जेएएच में अत्याधुनिक सुविधाएं शुरू नहीं होने से गंभीर मरीजों को जांच और आधुनिक रेडिएशन उपचार के लिए दिल्ली, भोपाल, इंदौर सहित अन्य बड़े शहरों का रुख करना पड़ रहा है। इससे मरीजों और उनके स्वजन पर इलाज के साथ यात्रा और रहने का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।