मदरसों में पढ़ाई और धर्म शिक्षा के नियमों पर उठे सवाल, बिना गाइडलाइन चल रहे छात्रावास; प्रशासन बेखबर
मदरसे का संचालक नियमों के अनुसार इस रूप में होना चाहिए कि बच्चों व बच्चियों को स्कूली शिक्षा के साथ अतिरिक्त एक दो पीरियड धार्मिक शिक्षा के भी लगाए जाएं।
Publish Date: Mon, 26 Oct 2026 07:51:27 AM (IST)Updated Date: Mon, 26 Oct 2026 07:51:48 AM (IST)
बोर्ड लगा मदरसा बहोड़ापुर तिराहा के पास और जहां गाड़ी खड़ी वह अपना घर कॉलोनी क्षेत्र में आता है। नईदुनियाHighLights
- अस्पष्ट नियम और अनियंत्रित संचालन
- गलियों और बस्तियों में बिना निगरानी चल रहे मदरसे
- मामले की जांच में जुटा प्रशासन और सीडब्ल्यूसी
वरुन शर्मा, नईदुनिया, ग्वालियर। एजी ऑफिस के पास स्थित दारूल कुरआन मदरसे में प्रताड़ना की कहानी सामने आने के बाद मदरसों की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। कोई छात्रावास की तरह बिना नियम कायदे के मदरसा चल रहा तो किसी को पता नहीं कि धर्म की शिक्षा के साथ स्कूली शिक्षा भी जरूरी तौर पर देना है। मदरसे का संचालक नियमों के अनुसार इस रूप में होना चाहिए कि बच्चों व बच्चियों को स्कूली शिक्षा के साथ अतिरिक्त एक दो पीरियड धार्मिक शिक्षा के भी लगाए जाएं।
मदरसो में पढ़ाई के पैटर्न स्पष्ट नहीं
नियम तो एक ओर इधर मदरसो में पढ़ाई के पैटर्न स्पष्ट नहीं हैं, कुछ मदरसों में जरूर स्कूल शिक्षा विभाग और मदरसा बोर्ड से रजिस्टर्ड कर शिक्षा दी जा रही है। दूसरी ओर खुद जिम्मेदार अधिकारियों को भी यह स्पष्ट नहीं है कि मदरसों को लेकर क्या नियम कायदे वर्तमान में हैं। दारूल कुरान मदरसे में बच्चियों को एक तरह से कैद जैसा करके पढ़ाई से रोक रखा था जिसके बाद अब दूसरे मदरसो की जांच भी जरुरी है। कुछ मदरसे दूसरी जगह शिफ्ट भी हो गए और उनका अता पता नहीं है। नईदुनिया ने मदरसों को लेकर मैदानी पड़ताल की जिसमें यह सामने आया।
मदरसों की स्थिति: क्या कैसा चल रहा
- बहोड़ापुर तिराहे के पास यहां अल जामिया इंटरनेशनल स्कूल का बोर्ड लगा भवन मिला। यहां नीचे स्थित दुकानदारों से पूछताछ में पता चला कि मदरसे का संचालन किया जाता है और कम संख्या में बच्चे हैं। मदरसे के पीछे ही एक स्कूल है जो मदरसा संचालक का ही है जहां धार्मिक शिक्षा लेने के बाद बच्चे स्कूल भेजे जाते हैं। यहां मुख्य द्वार बंद था।
- आनंद नगर रोड के पास अपना घर कालोनी क्षेत्र में एक स्कूल परिसर मिला जहां लोगों ने बताया कि यहां मदरसे का संचालन होता है। टीम में अंदर जाकर पड़ताल की तो एक युवक ने बताया कि बच्चे यहां पढ़ाई के लिए आते हैं। यहां छोटे छोटे बच्चे भी परिसर में घूम रहे थे।
घोसीपुरा स्थित फर्राशखाना में एक मदरसे के संचालन की जानकारी मिली जो छोटे से परिसर में चलना लोगों ने बताया। टीम जब मौके पर पहुंची तो पता चला कि यह मदरसा अब बंद कर दिया गया है। यह कहां शिफ्ट हुआ इसकी जानकारी आसपास के लोगों को नहीं थी। ऐसे भी मदरसे जहां छात्रावास चलाए जा रहे, इनको लेकर सवाल
ग्वालियर में ऐसे भी मदरसे हैं जहां छात्रावासों का संचालन किया जा रहा है, यह किस नियम के तहत बच्चों को मदरसे में रख रहे हैं यह किसी को स्पष्ट नहीं है। कुछ मदरसा संचालकों के अनुसार छात्रावास का सिस्टम उनकी जानकारी में है वे स्कूली शिक्षा व धार्मिक शिक्षा दे रहे हैं और बच्चों के स्कूलों में एडमिशन भी हैं। कंपू सहित अलग अलग क्षेत्रों में छात्रावास वाले मदरसे अभी भी संचालित बताए जा रहे हैं।
राडार पर मदरसे, स्कूल शिक्षा और महिला बाल विकास विभाग करेंगे पड़ताल
अब शहर में संचालित मदरसों की जांच पड़ताल की जाएगी। यहां क्या स्थिति है यह पता किया जाएगा। कौन-कौन से मदरसे छात्रावास चला रहे और कौन बिना सुविधाओं के बच्चों को शिक्षा दे रहे इन सभी बिंदुओं को लेकर पड़ताल की जाएगी।
ज्यादातर मदरसे बस्तियों में इसलिए कुछ पता नहीं चलता
शहर में मदरसो में ज्यादातर गरीब वर्ग के लोगों के बच्चे पढ़ते हैं, और यह मदरसे छोटी जगहों पर गलियों व पिछड़े इलाकों में ज्यादा होते हैं। यही कारण है कि सिस्टम की निगरानी ही नहीं रहती और अंदर चलने वाली गतिविधियों को लेकर पता नहीं चलता है। इसी तरह एजी आफिस के पास स्थित दारूल कुरान मदरसा चल रहा था जो ग्वालियर का सबसे पुराना मदरसा बताया गया।
जांच: सीडब्ल्यूसी, आयोग और विभाग कर रहे जांच
इस मामले में बाल कल्याण समिति से अंजू भदौरिया, मनीषा शर्मा, संतोष शर्मा, रश्मि त्रिपाठी जांच कर रही हैं। आयोग की अध्यक्ष निवेदिता शर्मा के साथ महिला एवं बाल विकास विभाग और स्कूल शिक्षा विभाग जांच कर रहा है। रविवार को बाल कल्याण समिति के सदस्य भी बालिका गृह पहुंचे।
बालिका गृह: यहां खेलकूद रहीं बच्चियां
दारूल कुरआन मदरसे से जेएएच के मां कैला देवी बालिका गृह में लाई गई बच्चियों के चेहरे पर थोड़ी मुस्कान आई है। बच्चियां यहां खेलकूद रहीं हैं और उनके चेहरे पर अब चिंता नहीं है। यहां बच्चियों का पूरा ख्याल रखा जा रहा है।
मदरसे को सील किया गया है पंचनामा तैयार कर उनसे मान्यता, दस्तावेज व संस्था के कागज मांगे गए हैं। वे अपना पक्ष प्रशासन के समक्ष स्पष्ट करें जिसके बाद आगामी प्रक्रिया होगी। - अतुल सिंह, एसडीएम, ग्वालियर सिटी
बाल कल्याण समिति इस मामले में जांच कर निर्णय लेगी। इस मामले में सत्यापन करने के बाद ही बच्चियों व बच्चों को अभिभावकों के सुपुर्द किया जाएगा। बच्चियों के साथ मारपीट के मामले में समिति की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस कार्रवाई करेगी। - उपासना राय, जिला कार्यक्रम अधिकारी
मदरसों में छात्रावास संचालन व गैर संचालन को लेकर पढ़ाई की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। मदरसों में स्कूली शिक्षा की पढ़ाई व धार्मिक शिक्षा दिए जाने का प्रविधान है, इन मामलों को दिखवाया जा रहा है। - स्वीटी मंगल, जिला शिक्षा अधिकारी