मदरसे में बच्चियों से क्रूरता की हदें पार... 500-500 उठक बैठक और उल्टा टांगते थे, नजमा-साबिर और अनस के आए नाम
शौचालय साफ करने के लिए कोई स्टाफ नहीं रखा गया यह काम पूरा बच्चियों के भरोसे था। चाहरदीवारी में बच्चियों का जीवन नरक जैसा था, खुद बच्चियों के बयानों में यह पूरी कहानियां दर्ज हुई हैं।
Publish Date: Sun, 25 Oct 2026 09:42:47 PM (IST)Updated Date: Sun, 25 Oct 2026 09:43:14 PM (IST)
बुर्का पहने हुए मदरसे में शुक्रवार को मिलीं बच्चियां। नईदुनियाHighLights
- बच्चियों को दिए जाते थे अमानवीय ताने
- बिना मान्यता चल रहा था अवैध मदरसा
- शुक्रवार को 26 बच्चों का हुआ था रेस्क्यू
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। जिस मदरसे में बच्चियों को आगे पढ़ने-बढ़ने की राह दिखाई जाना चाहिए थी, वहां बच्चियों को 500-500 उठक-बैठक की सजा दी जाती थी। सात साल की बच्ची को उल्टा तक लटकाया गया और प्रताड़ना की हद पार की गई।
बच्चों को इस्लाम की शिक्षा देने वाली नजमा बाजी और साबिर के नाम बच्चियों ने लिए हैं, नजमा बाजी एक ऐसा नाम है जिससे हर बच्ची प्रताड़ित सामने आई, उसकी दहशत इतनी कि बच्चियां उससे कांपती थीं और मुंह तक किसी और के सामने खोलने से डरतीं थीं।
बच्चियों को जानवर तक कहा जाता था
बच्चियों को कभी कभी जानवर भी कहा जाता था। अनस नाम का युवक अभद्र बोलता था। जब कोई बच्चियों के लिए खानपान या बिरयानी जैसे व्यंजन दे जाता था तो उसमें से एक दो चम्मच बच्चियों को दिया जाता था और शेष पूरा वहां के जिम्मेदार खुद खा जाते थे। नजमा बाजी बात-बात पर ताने मारती थी, बच्चियां जब इस्लामी शिक्षा को लेकर कुछ भूल जातीं थीं तो उन्हें ऐसा अहसास कराया जाता था जैसे कोई अपराध कर दिया हो। शौचालय साफ करने के लिए कोई स्टाफ नहीं रखा गया यह काम पूरा बच्चियों के भरोसे था। चाहरदीवारी में बच्चियों का जीवन नरक जैसा था, खुद बच्चियों के बयानों में यह पूरी कहानियां दर्ज हुई हैं।
शुक्रवार को मदरसे से 26 बच्चों का किया गया था रेस्क्यू
बता दें, कि बीते शुक्रवार को राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष निवेदिता शर्मा, बाल कल्याण समिति, महिला व बाल विकास विभाग और पुलिस के साथ संयुक्त छापेमारी एजी ऑफिस के पास स्थित दारूल कुरआन मदरसे पर की गई थी।
यहां से 26 बच्चे 18 बालक व आठ बच्चियों को रेस्क्यू कराया गया। आयोग ने पाया कि यहां बच्चियों को ठीक से नहीं रखा जा रहा था और पढ़ाई से भी बच्चे दूर थे। मदरसे पर कोई मान्यता व दस्तावेज नहीं मिले जिससे वह अवैध श्रेणी में पाया गया। यहां 57 बच्चे रजिस्टर्ड हैं शेष माता-पिता के पास मिले।
सभी बच्चों को बालक व बालिका गृहों में रखवाया गया जिसमें चार से सोलह साल के बच्चे-बच्चियां शामिल हैं। शनिवार को कलेक्टर रुचिका चौहान व समिति व आयोग के समक्ष बच्चियों के बालिका गृह में बयान लिए गए थे।
मदरसे से पीड़ित बच्चियां: 4 से 16 साल उम्र
- 12 साल- इस्लामपुरा
- 13 साल- बानमोर जिला मुरैना
- 13 साल- बहोड़ापुर
- 11 साल- बानमोर, जिला मुरैना
- 07 साल- भिंड
- 07 साल- घोसीपुरा
- 08 साल- जीवाजीगंज
- 10 साल- भिंड
माता-पिता भी भटके, सामने आया-सिर्फ आलिमा बनाना था
बाल कल्याण समिति की जांच में यह सामने आया कि जिन माता-पिता की बेटियां यहां रहकर पढ़ रहीं थीं उन्हें स्कूल नहीं भेजा जाता था, कुछ बच्चियां ही रजिस्टर्ड थीं लेकिन जाता कोई नहीं था। बच्चियों के माता-पिता के अनुसार वे बच्चियों को आलिमा बनाना चाहते थे जिस तरह हिंदू धर्म में साध्वी होती हैं। स्कूलों में पढ़ने नहीं भेजना चाहते थे क्योंकि उनका कहना था कि पढ़कर बेटियां क्या करतीं।
घर पर एक दिन भी अतिरिक्त रहने पर 500 रुपये
यह भी पता चला है कि बच्चियों ने विभिन्न अधिकारियों को यह बताया कि माह में एक दिन बच्चियों को घर जाने की अनुमति थी लेकिन अगर कोई बच्ची अतिरिक्त घर रूक जाती थी तो 500 रुपये मदरसे की ओर से वसूले जाते थे।
आगे क्या: एसआईआर जारी, सीडल्यूसी करेगी कार्रवाई तय
जिला कार्यक्रम अधिकारी उपासना राय ने बताया कि बालकों की ओर से प्रताड़ना की बात नहीं बताई गई है, बालकों व बच्चों के घरों पर सोशल इंवेस्टिगेशन कराई जा रही है जो एसआईआर रिपोर्ट के रूप में सामने आएगी। इसी सत्यापन के बाद बच्चे माता-पिता को सुपुर्द होंगे। मदरसे पर कार्रवाई बाल कल्याण समिति की रिपोर्ट तय करेगी।